बालोद : छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है. बालोद जिला मुख्यालय से लगे ग्राम सिवनी में 2 परिवारों द्वारा धर्म परिवर्तन कर गांव के नियमों का उल्लंघन करने का बड़ा मामला सामने आया है. जिसकी वजह से गांव में तनाव की स्थिति बन गई हैं.
ग्रामीणों को शंका है कि अब उक्त दोनों परिवार गांव के अन्य भोले भाले लोगों को डरा धमकाकर धर्मांतरण करा सकते है. जिसे रोकने एवं धर्म परिवर्तन करने तथा ग्रामीण नियमो का उल्लंघन करने वाले उक्त दोनों व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टोरेट पहुंच कलेक्टर के नाम डिप्टी कलेक्टर अमित श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपा है.
उन्होंने दोनों परिवारों की शिकायत करते हुए कहा है कि प्रशासन इनके खिलाफ कार्रवाई करे, नहीं तो ग्रामीणों को ही ठोस कदम उठाना होगा. ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों परिवारों ने अपना मूल धर्म छोड़ दिया है. गांव के रीति-रिवाजों को नहीं मानते हैं.
दरअसल, ग्राम सिवनी में मंगलवार को काम-धाम बंद कर दिया गया. प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति का कलेक्ट्रेट पहुंचना अनिवार्य किया गया था. ग्रामीणों ने बताया कि हम सब धर्मांतरण के खिलाफ हैं. गांव में जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन कर चुके हैं और कुछ लोग गुप्त रूप से ईसाई धर्म को अपना रहे हैं. यह गांव के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है. हिंदू हमारा मूल धर्म है ग्रामीणों का कहना है कि दोनों परिवार ईसाई बन गए हैं और उसका गांव में प्रचार करते हैं.
रीति रिवाज को मानते नहीं
धर्मांतरण की बड़ी बहस के बीच ग्रामीण अपने धर्म को बचाने निकले हुए हैं. ग्रामीणों ने कहा कि हमारे गांव में रीति रिवाज हैं, देवी-देवता है. कई सारी परंपराएं हैं, लेकिन यह दोनों परिवार गांव के रीति रिवाज को तुच्छ नजर से देखते हैं. इसको नहीं मानते हैं. दोनों परिवार धर्म परिवर्तित हो गए हैं और स्पष्ट रूप से अपने इसाई धर्म का प्रचार करते देखे जाते हैं. अगर इन परिवारों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो यह हमारे गांव को ईसाई मिशनरी गांव के रूप में तब्दील कर सकते हैं.
