2.20 करोड़ के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा गिरफ्तार, संयुक्त ऑपरेशन में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता
धनबाद-गिरिडीह सीमा पर संयुक्त ऑपरेशन में बड़ी कामयाबी
रांची नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों को ऐतिहासिक सफलता मिली है.करीब 2.20 करोड़ रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा को देर रात धनबाद और गिरिडीह सीमा स्थित मनियाडीह इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया.यह कार्रवाई केंद्रीय खुफिया एजेंसी (IB), झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के संयुक्त ऑपरेशन के तहत की गई.
गुप्त सूचना पर बिछाया गया जाल
सुरक्षाबलों को सूचना मिली थी कि मिसिर बेसरा अपने दो सहयोगियों के साथ टाटा मैजिक वाहन से गिरिडीह की ओर जा रहा है. इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने रणनीतिक घेराबंदी कर वाहन को रोका और मिसिर बेसरा के साथ उसके सहयोगी मेहनत उर्फ मोछू और गौरव को भी गिरफ्तार कर लिया। दो अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है.
आईबी की निगरानी से मिली सफलता
सूत्रों के अनुसार केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी पिछले कई महीनों से मिसिर बेसरा की गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए थी. आईबी से मिली सटीक सूचना के आधार पर झारखंड पुलिस, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर ने संयुक्त रणनीति तैयार की, जिसके परिणामस्वरूप यह बड़ी कार्रवाई सफल रही.
40 वर्षों से माओवादी संगठन में था सक्रिय
गिरिडीह के पीरटांड निवासी मिसिर बेसरा लगभग 40 वर्षों से माओवादी संगठन से जुड़ा था.धनबाद में कॉलेज की पढ़ाई के दौरान वह महाजनी आंदोलन के जरिए नक्सली संगठन में शामिल हुआ और बाद में संगठन के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया.
पहले भी गिरफ्तार हुआ, कोर्ट से छुड़ा लिया गया था
मिसिर बेसरा को पहली बार सितंबर 2007 में खूंटी से गिरफ्तार किया गया था. हालांकि वर्ष 2009 में बिहार के लखीसराय कोर्ट परिसर पर नक्सलियों के हमले के दौरान उसे छुड़ा लिया गया. इसके बाद वह बूढ़ा पहाड़, कोल्हान और सारंडा के जंगलों में सक्रिय रहकर संगठन की गतिविधियों का संचालन करता रहा.
150 से अधिक मामले, एनआईए को भी थी तलाश
मिसिर बेसरा के खिलाफ झारखंड, बिहार, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में हत्या, विस्फोट, नक्सली हिंसा समेत 150 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। दो मामलों में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को भी उसकी तलाश थी. झारखंड सरकार ने उस पर 1 करोड़ रुपये और ओडिशा सरकार ने 1.20 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था.
सरेंडर और गिरफ्तारी से कमजोर पड़ा माओवादी संगठन मंगलवार को ही सारंडा क्षेत्र में सक्रिय 24 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया। इससे पहले मई 2026 में भी मिसिर बेसरा दस्ते के 27 नक्सलियों ने सरेंडर किया था. सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन आत्मसमर्पणों से मिली जानकारी ने मिसिर बेसरा तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
माओवादी नेतृत्व को बड़ा झटका
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हाल के वर्षों में माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व को लगातार नुकसान पहुंचा है. बसवा राजू के मारे जाने और अन्य वरिष्ठ नेताओं के निष्क्रिय होने के बाद मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी को माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.


