ज्यादा सोचने से तन-मन की बीमारियों का आगमन: ब्रह्माकुमारीज़ के “ज्यादा सोचने पर विजय’ कार्यक्रम में बाला किशोर ने दिए टिप्स

भिलाई- कार्य की सफलता या असफलता में हमारे संकल्पों का अहम योगदान होता है. हमारे मन के विचारों से हमारा मस्तिष्क प्रभावित होता है, मन में आने वाले विचारों से ही हमें सुख और दुख की अनुभूति होती है. बिना ब्रेक के जरूरत से ज्यादा सोचना (ओवर थिंकिंग) शरीर और मन को बीमार कर बुढ़ापे को जल्दी निमंत्रण देने जैसा है. इससे बचने के लिए गहरी सांस, प्राणायाम और राजयोग मेडिटेशन को जीवन में अपनाना बेहद जरूरी है.
यह विचार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा सेक्टर-7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में “ज्यादा सोचने की आदत पर विजय विषय पर आयोजित कार्यक्रम में हैदराबाद से आए मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमार बाला किशोर ने व्यक्त किए.
मुख्य वक्ता बाला किशोर ने बताया कि मौसम,ट्रै फिक समस्या, दूसरों का आचरण सच्चाई है जिसे हम कंट्रोल नहीं कर सकते है. इसके विपरीत निगेटिव व्यर्थ विचारों की कहानी जो हम एक के बाद एक विचारों की श्रृंखला से अनुमान द्वारा घने काले बादलों से घेर लेती हैं. जिससे बचने गहरी श्वांस, प्राणायाम, राजयोग मेडिटेशन, तटस्थता का भाव धारण करे. उन्होंने कहा किव्यर्थ और निगेटिव विचार जंगल के समान होते है जो बढ़ते ही जाते है और सकारात्मक विचारों से सुंदर बगिया (गार्डन) बन हमारा जीवन तनावमुक्त रहता है. जिसकी सम्हाल हमें करनी है. उन्होंने ‘क्लोज द पॉपअप’ जैसी रोचक गतिविधियों और गेम्स के माध्यम से अत्यधिक सोचने से बचने के व्यावहारिक उपाय समझाए.

भिलाई सेवाकेंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि शरीर की व्याधि के लिए हम भोजन में नमक,शक्कर का सेवन कंट्रोल करते है, वैसे ही बोलने सोचने में भी कंट्रोल करने से हमारे तन, मन के लिए रिश्तों के लिए हमारे जीवन के लिए वरदान है. डिवाइन ग्रुप के बच्चों ने सुंदर सांस्कृतिक नृत्य द्वारा सभा में सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया.

कार्यक्रम के अंत में सभी को वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी द्वारा राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास कराया गया. कार्यक्रम का शिक्षा, चिकित्सा,रिसर्च स्कॉलर ,व्यापार जगत से जुड़े प्रबुद्धजनो ने बड़ी संख्या में लाभ लिया.
