रिसाली की सफाई व्यवस्था पर ‘अस्थायी’ कब्जा: 2 साल 4 बार टेंडर निरस्त, क्या निष्पक्ष जांच से खुलेगा राज?
रिसाली- नगर पालिक निगम रिसाली में बीते दो वर्षों से सफाई व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रशासनिक व वित्तीय अनियमितताओं का मामला गरमाया हुआ है. स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषय पर नगर पालिक निगम रिसाली की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि महापौर परिषद और सामान्य सभा के विरोध व फैसलों की अवहेलना करते हुए एक ही ठेकेदार को बार-बार दो-दो महीने का अस्थायी कार्यादेश देकर आर्थिक लाभ पहुँचाया जा रहा है. निगम महापौर शशि सिन्हा ने मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए मुख्यमंत्री के नाम पत्र सौंपकर उच्चस्तरीय जांच समिति गठित करने की भी मांग की गई है. परंतु महापौर और एमआईसी के द्वारा दो माह के लिए ठेका दिया गया.
नियमों की अवहेलना और प्रशासनिक गतिरोध
मामले से जुड़े दस्तावेजों के अनुसार, सफाई टेंडर को लेकर एमआईसी और सामान्य सभा में कई बार विरोध दर्ज कराया गया है. इसके बावजूद नियमित निविदा प्रक्रिया पूरी करने के बजाय एक ही ठेकेदार को काम देने का सिलसिला जारी है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों का कहना है कि बार-बार टेंडर निरस्त होना केवल तकनीकी खामी नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है? पूर्व पार्षद चुम्मन देशमुख का कहना है कि एग्जीक्यूटिव इंजीनियर सुनील दुबे ने सफाई का टेंडर ऑनलाइन और ऑफलाइन किया था किंतु कमिश्नर के द्वारा बिना कोई वजह बताए टेंडर निरस्त करने का निर्देश दिया, किस वजह से कमिश्नर के द्वारा उस टेंडर को निरस्त किया गया इसकी भी जांच होनी चाहिए.
कानूनी पेंच और मनमानी का आरोप
छत्तीसगढ़ नगर पालिका निगम अधिनियम की धारा 70 एवं 110 के प्रावधानों के अनुसार, यदि महापौर परिषद समय-वृद्धि के प्रस्ताव पर 10 दिनों के भीतर कोई निर्णय नहीं लेती है, तो समय-सीमा समाप्त होने के बाद प्रस्ताव यथावत पारित माना जाता है. आरोप है कि इस 10 दिवसीय नियम का पालन नहीं किया गया और आयुक्त द्वारा सीधे राज्य सरकार से 2 महीने की समय-वृद्धि ले ली गई.
विरोध दरकिनार, ऐसे पूरा किया गया ‘फोरम’
दो महीने की अवधि समाप्त होने के बाद जब दोबारा समय-वृद्धि का प्रस्ताव महापौर परिषद में रखा गया, तो तीन महापौर परिषद के सदस्यों ने इसका विरोध जताते हुए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. इसके बावजूद, महापौर, एमआईसी सदस्यों और स्वास्थ्य विभाग प्रभारी ने कथित रूप से 5 अन्य महापौर परिषद के सदस्यों की सहमति हासिल कर ‘फोरम’ पूरा कराया और पुनः 2 महीने की समय-वृद्धि दे दी जिसकी समय-सीमा अब समाप्त हो चुकी है.
4 बार टेंडर निरस्त, ठेकेदारों ने मांगा जवाब
निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि GeM पोर्टल पर चार-चार बार टेंडर जारी कर बिना कोई कारण बताए निरस्त क्यों किया गया? लगातार टेंडर कैंसिल होने से असंतुष्ट 3 निविदाकार (ठेकेदारों) ने आयुक्त को लिखित आवेदन देकर टेंडर निरस्त करने का वैधानिक कारण माँगा है.
