भिलाई- भारतीय संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर की 132वीं जयंती पर एक बार फिर उनकी चिंताओं पर चर्चा प्रारंभ हो गई है. डॉ अम्बेडकर एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था के हिमायती थे जिसमें राज्य सभी को समान अवसर प्रदान करे तथा धर्म, जाति, लिंग, आदि के आधार पर भेद-भाव न किया जाए. उनका दृढ़ विश्वास था कि जब तक आर्थिक और सामाजिक विषता समाप्त नहीं होगी तब तक जनतंत्र की स्थापना अपने वास्तविक स्वरूप को प्राप्त नहीं कर पाएगी. इन्हीं बातों की चर्चा करने अम्बेडकर जयंती पर 14 अप्रैल, 2023 को शाम 5:30 बजे से सेक्टर-2, सड़क-6 स्थित शक्ति सदन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है. दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ लक्ष्मण यादव इस आयोजन के मुख्य वक्ता होंगे.
डॉ लक्ष्मण यादव आरक्षण के वास्तविक लाभ पर लगातार सवाल उठाते रहे हैं. वे पूछते हैं कि आजादी के बाद से अमृतकाल उत्सव तक ओबीसी वर्ग आर्थिक, राजनैतिक, सामाजिक रूप से पिछड़ा हुआ क्यों है? आजाद देश में अब तक जातिगत जनगणना क्यों नहीं हुई? ओबीसी वर्ग की संख्या 52 प्रतिशत है तो इस अनुपात में न्यायालयों में जज, प्रशासन में कलेक्टर, कमिश्नर, विश्वविद्यालयों में कुलपति, प्रोफेसर, चिकित्सालयों में डॉक्टर क्यों नहीं हैं?
प्रो. लक्ष्मण यादव कहते हैं कि आबादी में 52 प्रतिशत भागीदारी होने के बावजूद सरकारी सेवा में केवल 6.9 प्रतिशत ही पिछड़ी जाति के लोग हैं. 10-12 फीसदी सवर्णों के पास 76.8 प्रतिशत नौकरियां हैं. अनुसूचित जाति के पास 11.5 एवं अनुसूचित जनजाति के पास केवल 4 प्रतिशत सरकारी नौकरियां हैं.
इसी तरह आबादी में ब्राह्मणों की प्रतिशत केवल 3.5 है जबकि राजनीति में उनकी भागीदारी 41 प्रतिशत, नौकरी में 60 प्रतिशत, व्यापार में 10 प्रतिशत, शिक्षा में 50 प्रतिशत है. क्षत्रियों का आबादी में 5.5 प्रतिशत हिस्सा है पर राजनीति, नौकरी, व्यापार एवं शिक्षा में उनका प्रतिशत क्रमशः 15, 10, 26 और 16 है. 90 प्रतिशत जमीन पर भी इनका ही कब्जा है. वैश्यों का प्रतिशत आबादी में 6 है पर राजनीति, नौकरी, व्यापार एवं शिक्षा में उनकी भागीदारी क्रमशः 6, 10.5, 10, 60 और 12 प्रतिशत है. पिछड़ा वर्ग का आबादी में योगदान 52 प्रतिशत है पर राजनीति, नौकरी, व्यापार एवं शिक्षा में उनकी भागीदारी 8, 6.9, 1.8 और 12.5 प्रतिशत मात्र है.
ओबीसी महासभा भिलाई-दुर्ग, लोकतांत्रिक इस्पात इंजीनियरिंग एवं मजदूर यूनियन, भिलाई लोक सृजन समिति, हाउसलीज संयुक्त संघर्ष समिति, सहकारिता संघर्ष समिति, रोहिणी आशा ट्रस्ट, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा (मजदूर कार्यकर्ता समिति) तथा गोंडवाना मातृशक्ति संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित इस सभा में सभी वर्गों के लोगों को आमंत्रित किया गया है.
