पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण में गड़बड़ी के बाद बाबू सुनील यादव निलंबित, कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने की थी निष्पक्ष जांच की मांग
बिलासपुर- जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय बिलासपुर में पदोन्नति, पदस्थापना, अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण और न्यायालयीन आदेशों के पालन में हुई गंभीर अनियमितताओं के मामले में प्रशासन ने कार्रवाई की है. जांच रिपोर्ट आने के बाद कनिष्ठ लेखा परीक्षक (बाबू) सुनील कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है.
कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने खोला था मोर्चा
इस पूरे मामले को लेकर अंकित गौरहा ने पूर्व में पांच अलग-अलग शिकायतें प्रस्तुत कर विभागीय प्रक्रिया और प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए थे और सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत की थी. 9 फरवरी से 4 मई 2026 के बीच प्रस्तुत शिकायतों में अनुकंपा नियुक्ति, प्रतिनियुक्ति, अटैचमेंट, युक्तियुक्तकरण, कोटा संबंधी वित्तीय अनियमितता, पदोन्नति, पदस्थापना, वरिष्ठता तथा न्यायालयीन आदेशों के पालन से जुड़े विषय उठाए गए थे. शिकायतों में संबंधित मूल नस्ती,नोटशीट, पत्राचार, पदोन्नति एवं वरिष्ठता सूची और पदस्थापना संबंधी अभिलेखों के परीक्षण के साथ-साथ पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी.
जांच के बाद हुई कार्रवाई
पूर्व में हुई जांच में तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे को भी जाँच में दोषी पाया गया था.जांच रिपोर्ट में युक्तियुक्तकरण एवं पदोन्नति प्रक्रिया से संबंधित अनियमितताओं और नियमों के पालन को लेकर भी टिप्पणियां दर्ज हैं. इसके बाद जारी आदेश में सुनील कुमार यादव, कनिष्ठ लेखा परीक्षक को निलंबित किया गया. आदेश में जांच समिति की रिपोर्ट,संबंधित अभिलेखों के परीक्षण और उनके जवाब का उल्लेख करते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है.

लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई, प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाना है : अंकित गौरहा
अंकित गौरहा ने कहा कि उनकी शिकायतों का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं,बल्कि विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रभावित शिक्षकों को न्याय दिलाना है. उन्होंने कहा, हमने दस्तावेजों के साथ लगातार सवाल उठाए. जांच हुई और अब कार्रवाई भी हुई है. यह प्रभावित शिक्षकों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है,लेकिन बिलासपुर शिक्षा विभाग में लगातार हुए भ्रष्टाचार के विरोध में ये संघर्ष आगे भी जारी रहेगा है.पदोन्नति,पदस्थापना और युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया से जिन शिक्षकों का हक प्रभावित हुआ है,उन्हें उनका वास्तविक अधिकार मिलना चाहिए.
उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण में जिन-जिन स्तरों पर जिम्मेदारी सामने आती है,वहां नियमानुसार जवाबदेही तय होना चाहिए. शिकायत से जांच तक,जांच से कार्रवाई तक,अब अगला लक्ष्य प्रभावित शिक्षकों को न्याय और उनका वास्तविक हक दिलाना है.
