महापौर, आयुक्त से लेकर एमआईसी सवालों के घेरे में
सफाई के ठेके में पारदर्शिता क्यों नहीं?
टेंडर प्रक्रिया पर उठे सवाल, नहीं मिला कोई जवाब
गंदगी की ढेर, सफाई कामगार बदहाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग
रिसाली- आखिर रिसाली नगर निगम में कौन डकार रहा है सफाई व्यवस्था के नाम पर करोड़ों की धनराशि? वह कौन है जो टेंडर प्रक्रिया में घाल-मेल कर साफ-सफाई और ठोस अपशिष्ट निपटान की प्रक्रिया में पलीता लगाकर पूरी व्यवस्था को चौपट किए हैं? आज रिसाली का नगर निगम साफ-सफाई के मामले में पूरे प्रदेश में संदेह की नजरों में घिर गया है! यहां की टेंडर प्रक्रिया से लेकर डोर टू डोर कचरा संग्रहण, नाली सफाई, झाडू व्यवस्था, एसएलआरएम तथा प्लेसमेंट कर्मचारियों से संबंधित कार्यों में लगातार बढ़ते खर्च को लेकर लगातार सवाल पर सवाल उठते रहे हैं. पार्षदों से लेकर महापौर तक हलचल होती रही हैं. शासन स्तर तक शिकायतों का सिलसिला चला है लेकिन इसके बाद भी किसी के कानों पर जूं नहीं रेंगी. आलम यह है कि पूरे निगम क्षेत्र में सफाई व्यवस्था केवल कागजों पर चल रही है! आप मैदानी इलाकों में चले जाइए तो गंदगी, कचरे का ढेर, गंदे जानवरों का जमावड़ा, बदबूदार नालियां, धूल से सनी सड़कें और बदहाल गली-मोहल्ले अपने पीड़ा की कहानी स्वयं कहते नजर आएंगे!
करोड़ों का खर्च और सफाई व्यवस्था सीफर
यह तथ्यात्मक सच्चाई है कि रिसाली नगर निगम में सफाई के लिए करोड़ों का खर्च किया जाता है. हम ज्यादे दूर नहीं वर्ष 2024 के सफाई एवं संबंधित कार्यों का खर्च देखें तो हमारी आंखें फटी की फटी रह जाएंगी. सवाल खड़े होते हैं कि इतने रूपये यदि खर्च किए जा रहे तो सफाई है कहां? ऊपर से सफाई कर्मियों का रोना रहता है कि उन्हें ठेकेदार समय बे समय हकाल देता है. तनख्वाह नहीं देता है, पगार में कटौती करता है और जब तब बेगारी भी कराता है. बेचारे गरीब मजदूर और श्रमिक बहनें परेशान होती हैं. कौन देगा इस ओर ध्यान?
अगर वर्ष 2024 में सफाई का ब्यौरा देखें, तो लगभग 6 करोड़ डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, झाड़ू एवं नाली सफाई के लिए, लगभग 1.99 करोड़ एसएलआरएम से संबंधित कार्यों के लिए, लगभग 1.99 करोड़ प्लेसमेंट कर्मचारियों, ऑफिस वर्क एवं अन्य कार्यों के लिए. इस प्रकार यदि कुल व्यय देखें तो इन मदों में लगभग 9.98 करोड़ का प्रावधान/व्यय बताया जा रहा है.
इसमें भी पूरे वर्ष का सफाई और अन्य मदों में खर्च के बाद व्यवस्था देखें तो नगर निगम की सामान्य सभा में बैठने वाले अनेक पार्षद पूरी व्यवस्था पर उंगली उठा चुके हैं. इतना ही नहीं कमिश्नर से लेकर महापौर तक भी बात पहुंची है कि ठेकेदार मनमानी कर रहा है लेकिन व्यवस्था है कि वही ढाक के तीन पात!
दूसरे वर्ष ही सफाई व्यवस्था के खर्च में दोगुनी वृद्धि!
यह चौंकाने वाला है कि 2024 में सफाई का जो बजट रखा था उसे 2025 में बढ़ा दिया गया! वह भी थोड़ा बहुत नहीं, सीधे-सीधे दोगुना! उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 में लगभग 12 करोड़ डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, झाड़ू एवं नाली सफाई, लगभग 4 करोड़ एसएलआरएम, लगभग 3.99 करोड़ प्लेसमेंट कर्मचारियों, ऑफिस वर्क एवं अन्य कार्य. इस प्रकार इन मदों की कुल राशि लगभग 19.99 करोड़ रुपय बैठती है!
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि वर्ष 2024 की तुलना में वर्ष 2025 में सफाई एवं संबंधित मदों में इतनी बड़ी वित्तीय वृद्धि का आधार आखिर था तो क्या? विशेष रूप से डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन, झाड़ू एवं नाली सफाई की राशि 6 करोड़ से बढ़कर लगभग 12 करोड़ बताई जा रही है. यह लगभग 100 प्रतिशत वृद्धि है. इसलिए यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इतनी बड़ी वृद्धि किस स्वीकृति, दर निर्धारण, निविदा शर्त, कार्यक्षेत्र, मात्रा या शासनादेश के आधार पर की गई?
टेंडर की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं?
इसी क्रम में देखें तो वर्ष 2026 में पुराना ढर्रा फिर से चला दिया गया! यानी फिर वही प्रक्रिया और समय वृद्धि का सवाल! देखें तो वर्ष 2026 में भी इसी प्रकार की सफाई व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई. इस मामले में यह बताया जा रहा है कि महापौर परिषद (MIC) द्वारा सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि संबंधित कार्य के लिए लगभग दो माह की समय-सीमा में नई टेंडर प्रक्रिया पूरी की जाए तथा प्रक्रिया पूरी नहीं होने की स्थिति में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए. इसके बाद दो माह की समय-वृद्धि का प्रस्ताव MIC के एजेंडे में लाया गया. जानकारी के अनुसार MIC ने समय-वृद्धि देने से सहमति नहीं दी, लेकिन इसके बाद शासन स्तर से दो माह की समय-वृद्धि प्राप्त होने की बात सामने आई. यदि यह तथ्य रिकॉर्ड से सही है तो जनता के सामने यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जब MIC ने समय-वृद्धि देने से इनकार किया था, तो शासन से समय-वृद्धि लेने का आधार क्या था? और सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि एक ही ठेकेदार को बार-बार दो-दो माह की समय-वृद्धि किस नियम, आदेश एवं प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर दी जा रही है? इस पूरे मामले में आयुक्त स्तर से लिए गए निर्णयों की भी स्वतंत्र जांच आवश्यक है.
वर्ष 2026 में टेंडर प्रक्रिया और खर्च विवरण में अप्रत्याशित हेरफेर!
रिसाली निगम के सफाई ठेके में वर्ष 2024 से लेकर 2025 और हालिया 2026 की रिपोर्ट देखें तो इनमें भारी असमानता और विसंगतियां हैं जो चीख-चीख कर बता रही हैं कि सफाई व्यवस्था में बड़े पैमाने पर गोलमाल किया जा रहा है. सरकारी पैसो की बंदरबांट की जा रही है. उपर से लेकर नीचे तक लोग मिले हुए हैं. नहीं तो कारण क्या है कि 2024 में सफाई व्यवस्था 9.98 करोड़ से चलकर 2025 में अचानक दोगूनी यानी 19.99 करोड़ तक पहुंच जाती है! और फिर वर्ष 2026 में एका-एक गिरकर 11 करोड़ हो जाती है! एक प्रायमरी में पढ़ने वाला बच्चा भी इन आंकड़ों को देखकर बता देगा कि रिसाली की सफाई व्यव्यस्था में ठेकेदार एवं अधिकारियों के साथ ही निर्वाचित प्रतिनिधियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा रहा है. लोग मिलकर जनता की गाढ़ी कमाई से आय पैसों की मलाई चाट रहे है और शासन है मूकदर्शक बना सब देख रहा है! वर्ना कारण क्या है कि वह रिसाली नगर निगम के प्रशासन से यह नहीं पूछती की वर्ष 2024-25-26 में कार्य की मात्रा कितनी थी? प्रत्येक वर्ष कितने कर्मचारी लगाए गए?, कितने वार्डों में कितनी सफाई व्यवस्था की गई? प्रतिदिन कितने टन कचरे का संग्रहण किया गया? भुगतान किस मापदंड पर किया गया? ठेकेदार को अब तक कितनी राशि का भुगतान किया गया? प्रत्येक समय-वृद्धि के पीछे क्या कारण था? क्या कार्य की गुणवत्ता का स्वतंत्र निरीक्षण हुआ? क्या किसी अधिकारी ने कार्य में कमी के लिए ठेकेदार पर जुर्माना लगाया? यदि लगाया गया तो कितनी राशि की वसूली हुई?
आयुक्त और महापौर की भूमिका भी सवालों के घेरे में
इस मामलें में रिसाली निगम के आयुक्त और महापौर की भूमिका बेहद संदिग्ध है. 50 प्रतिशत वृद्धि के सवाल पर आयुक्त को जवाब देना चाहिए कि वर्ष 2025 में सफाई टेंडर की राशि में भारी वृद्धि क्यों की गई? यदि शासन के किसी आदेश/प्रावधान के अनुसार सफाई टेंडर की दरों में निर्धारित वार्षिक वृद्धि का प्रावधान है, तो नगर निगम प्रशासन उस आदेश की प्रमाणित प्रति सार्वजनिक करने से क्यों बच रही है? आम जनता को यह जानने का अधिकार है कि जब निर्धारित वृद्धि सीमित प्रतिशत में होनी थी, तो सफाई व्यवस्था की राशि में इतनी बड़ी वृद्धि किस आधार पर हुई? आयुक्त को तो यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि वर्ष 2025 में बढ़ी हुई राशि की स्वीकृति किस अधिकारी, समिति और शासन स्तर से प्राप्त हुई?
सवाल यह भी उठना लाजिमी है कि GeM पोर्टल की निविदा बार-बार निरस्त क्यों हुई? इस मामले में शासन द्वारा GeM पोर्टल के माध्यम से निविदा प्रक्रिया किए जाने के निर्देश की स्थिति में यह भी गंभीर प्रश्न है कि रिसाली निगम द्वारा कथित रूप से बार-बार GeM की टेंडर प्रक्रिया को निरस्त क्यों की जा रही है? यदि किसी निविदा को निरस्त करना आवश्यक ही था तो निविदा निरस्त करने का कारण क्या था? तकनीकी या वित्तीय कारण क्या था? क्या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति ली गई? क्या पुनः निविदा की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई? क्या प्रत्येक निरस्तीकरण का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया गया? GeM की आधिकारिक शर्तों में सरकारी खरीदारों और निविदा प्रक्रियाओं के लिए निर्धारित प्रक्रियाएं मौजूद हैं; इसलिए निगम को अपनी प्रत्येक कार्रवाई का रिकॉर्ड सार्वजनिक जांच के लिए उपलब्ध कराना चाहिए.

ठेकेदार की मनमानी और गरीब कामगारों पर आफत
यह हैरतअंगेज है कि पूरी निष्ठा,लगन और ईमानदारी से सफाई का काम कर रहे कामगारों को बिना कोई नोटिस और बिना किसी पूर्व सूचना के काम से बैठा दिया गया? मात्र एक वाट्सएप मैसेज भेजकर इस प्रकार रोक दिया गया मानो वे सफाई कामगार नहीं बल्कि कोई पशु हों! यह कितनी बड़ी विडंबना है कि जिन दिहाड़ी कामगारों का परिवार रोज के पैसों से पलता है उसे इतनी निर्दयता के साथ काम से ही हटा दिया गया, क्यों? साफ है कि ठेकेदार की नियत ठीक नहीं है, वह गरीब कामगारों से हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहता है और कोई न कोई बहाना बनाकर अपने स्वार्थ की पूर्ति करना चाहता है वर्ना कारण क्या है कि 26 सितंबर से 30 सितंबर 2026 तक सफाई का काम बंद करने का फरमान सुना दिया गया? यह आदेश किस से पूछकर दिया गया? यदि ऐसा आदेश वास्तव में जारी हुआ है, तो सवाल है क्या किसी ठेकेदार को पूरे शहर एवं वार्डों की सफाई व्यवस्था पांच दिनों तक बंद करने की अनुमति दी जा सकती है? यदि सफाई कर्मचारियों ने इन पांच दिनों में काम नहीं किया, तो उनका वेतन काटने का आधार क्या है? और यदि काम बंद करने का निर्णय ठेकेदार का था, तो पांच दिनों के वेतन की जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी या नगर निगम की? यह भी स्पष्ट किया जाए कि निगम आयुक्त और स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा सफाई व्यवस्था जारी रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

जिम्मेदार कौन ?
इस मामले में यह सवाल उठते है कि इतने बड़े भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन है? जरुरी है कि शासन स्तर पर निष्पक्ष जांच कमेटी का गठन कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वर्ष 2024,25 और 2026 की सफाई व्यवस्था का टेंडर और उससे जुड़े तमाम पहलू सत्यनिष्ठ हैं अथवा नहीं? सभी टेंडर कार्यादेश, भुगतान, माप पुस्तिका, बिल, उपस्थित पत्रक, कर्मचारी संख्या, एसएलआरएम खर्च, समय वृद्धि आदेश तथा जेम टेंडर का रिकार्ड पूरी पारदर्शिता के साथ देखी जाए. यह भी देखा जाए कि नियमों की अनदेखी, अनावश्यक वित्तीय वृद्धि, अनुचित समय वृद्धि, प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी अथवा निगम के राजस्व को नुकसान तो नहीं हुआ?
इन सवालों का जवाब इसलिए भी जरूरी है कि रिसाली नगर निगम का एक बड़ा बजट है इस बजट को लेकर जनता की आकांक्षाएं जुड़ी हैं. यदि इनके साथ खेल-खेला जाता है तो कौन होगा जो इसे बर्दाश्त करेगा? जनता का पैसा जनता के हितों में खर्च होना चाहिए यदि यह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ता है तो कोई शहर के विकास की परिकल्पना करे भी तो कैसे?
बहुत भरोसे के साथ जनता ने महापौर और पार्षदों का चुनाव किया है और सरकार ने भी विकास के लिए पैसों के सदुपयोग के लिहाज से आयुक्त को भेजा है. स्थानीय विधायक भी इसके लिए जिम्मेदार है यदि सभी मिलकर भ्रष्टाचार को रोकेगें नहीं तो सुंदर और सुघ्घर रिसाली की परिकल्पना साकार होगी भी, तो कैसे?
