खनिज नगरी को मिलेगा नई पहचान, कई शहरों को होगा लाभ
आसपास के सैकड़ों गांवों के आदिवासियों को मिलेगा लाभ
बढ़ेगी लोगों की आवाजाही तो फिर से गुलजार होगा शहर
खेल अकादमी खुलने से मिलेगा स्थानीय प्रतिभा को मौका
पी. मोहन-
दल्ली-राजहरा के प्रतिष्ठित व्यवसायियों एवं उद्यमियों का मानना है कि यदि यहां मेडिकल कालेज और स्पोर्ट्स काम्पलेक्स की स्थापना कर दी जाए तो शहर नए स्वरूप में एक बार फिर निखर सकता है. यहां की खदानों ने सेल की फ्लैगशिप इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र को दीर्घ छह दशकों तक लौह अयस्क की आपूर्ति की है. पर समय के साथ ही यहां का भंडार चुकने लगा और शहर धीरे-धीरे मरने लगा. अब जबकि रावघाट की खदानों से अयस्क मिलने के मार्ग प्रशस्त हो गया है तो यहां के प्रतिष्ठित नागरिक इस शहर को पुनर्जीवित करने की कोशिश में जुट गए हैं.
इस शहर का एक वैभवशाली इतिहास रहा है. दल्ली-राजहरा की खदानों ने न केवल भिलाई इस्पात संयंत्र की चरण-दर-चरण बढ़ती क्षमता की मांग को पूरा किया बल्कि रेलवे को भी माल भाड़ा के रूप में एक बड़ी राशि पिछले छह दशकों में दी है. इस शहर को यूं ही मरने नहीं दिया जा सकता. भीखमचंद जैन, कमल सारडा, शांतिलाल जैन सहित शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायियों का कहना है कि यदि सरकार पहलकदमी करती है तो वे प्रत्येक स्तर पर अपनी क्षमता के अनुरूप सहयोग करने को तैयार हैं. मेडिकल कालेज, स्पोर्ट्स काम्पलेक्स, तारामंडल (प्लैनेटोरियम) जैसे प्रोजेक्ट इस शहर में नए प्राणों का संचार कर सकते हैं.
छत्तीसगढ़ प्रदेश कबड्डी संघ के प्रथम अध्यक्ष तथा अंचल के प्रतिष्ठित उद्योगपति एवं व्यवसायी भीखमचंद जैन का मानना है कि यदि दल्ली राजहरा में एक मेडिकल कालेज खुल जाता है तो शहर को नई ऊर्जा मिल सकती है. मेडिकल कालेज के खुल जाने से एक तरफ जहां अंचल के लोगों को स्तरीय इलाज अपने घर के पास मिल जाएगा वहीं इससे अंचल का व्यापार भी बढ़ेगा. लोगों की आवाजाही बढ़ेगी और शहर एक बार फिर से गुलजार हो जाएगा. यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है जिन्हें इसका सबसे बड़ा लाभ मिलेगा.
उन्होंने कहा कि फिलहाल यहां के लोगों को अच्छे इलाज के लिए जगदलपुर, राजनांदगांव, रायपुर या भिलाई के अस्पतालों तक जाना होता है. इससे कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण लोगों की स्थिति गंभीर हो जाती है. कई बार तो अस्पताल पहुंचते-पहुंचते ही रोगी दम तोड़ देता है. यहां से जगदलपुर की दूरी लगभग 250 किलोमीटर है. वहीं चिकित्सा का सबसे बड़ा केन्द्र रायपुर भी लगभग 122 किलोमीटर दूर है. भिलाई की दूरी यहां से 90 किलोमीटर है जबकि राजनांदगांव 67 किलोमीटर दूर है. सबसे निकट का केन्द्र धमतरी है जो यहां से लगभग 70 किलोमीटर दूर है.
श्री जैन बताते हैं कि यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है. दल्ली-राजहरा में मेडिकल कालेज अस्पताल खुल जाने से डौण्डीलोहारा, चारामा, कांकेर, अंतागढ़, बालोद, भानुप्रतापपुर जैसे शहरों और उनके आसपास फैले हजारों वनग्रामों को इसका लाभ मिलेगा. वे बताते हैं कि कुछ समय पहले लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार शिरोमणि माथुर के पुत्र की असामयिक मौत केवल इसलिए हो गई कि उसे समय पर सही उपचार नहीं मिल पाया.
भीखमचंद जैन बताते हैं कि मेडिकल कालेज के खुलने से दल्ली-राजहरा भी उच्च शिक्षा के नक्शे पर आ जाएगा. उनका परिवार हमेशा अंचल की बेहतरी के लिए काम करता रहा है. यहां के प्रसिद्ध नेमीचंद महाविद्यालय की स्थापना उनके पिता के नाम पर ही 1978 में की गई थी. पांच दशक से भी अधिक समय से यह महाविद्यालय आर्ट्स, साइंस एंड कामर्स के क्षेत्र में अंचल के आदिवासी विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा की जरूरतों को पूरा कर रहा है.
चंडीगढ़ की तर्ज पर खुले स्पोर्ट्स काम्पलेक्स
शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों का मानना है कि दल्ली-राजहरा में स्पोर्ट्स काम्पलेक्स या खेल अकादमी की स्थापना की जानी चाहिए. यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है. इसके आसपास के छोटे शहरों और असंख्य गांवों में भी आदिवासी खेल प्रतिभाएं बड़ी संख्या में रहते हैं जिन्हें पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाने के कारण उनकी प्रतिभा कुंठित होती है. यदि इन्हें प्रशिक्षण की सुविधा मिले तो ये भी देश विदेश में अपना परचम फहरा सकते हैं. उन्होंने बताया कि कुछ ही समय पूर्व कांकेर की बेट नैना सिंह धाकड़ ने माउंट एवरेस्ट सहित हिमालय की कई चोटियों पर तिरंगा लहराकर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश दिया था.
सभी प्रकार से सहयोग करने को तैयार
भीखमचंद जैन, कमल सारडा, शांतिलाल जैन आदि ने कहा कि दल्ली-राजहरा की लौह नगरी ने उन्हें काफी कुछ दिया है. अब उनकी बारी है कि वे इस शहर को कुछ लौटाएं. इसलिए यदि सरकार यहां के विकास की पहल करती है तो वे भी मुक्त हस्त से इसमें सहयोग करने को तैयार हैं. यदि शहर में मेडिकल कालेज अस्पताल खुल जाता है तो इसके साथ ही नर्सिंग कालेज, फार्मेसी कालेज जैसी संस्थाओं को भी यहां आने का मौका मिलेगा. यदि स्पोर्ट्स काम्पलेक्स की सौगात मिल जाती है तो यह इस अंचल के लिए एक और बड़ी सौगात होगी.
प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री से है उम्मीद
शहर के प्रतिष्ठित नागरिकों ने कहा कि प्रदेश के संवेदनशील और यशस्वी मुख्यमंत्री रचनात्कमता के लिए जाने जाते हैं. उन्हें पूरी उम्मीद है कि दल्ली-राजहरा को उसका खोया वैभव लौटाने तथा आदिवासियों की भलाई के लिए वे अवश्य इस अंचल की मांगों पर विचार करेंगे.
