जगदलपुर : बस्तर जिले में 70 के दशक में लगभग 60 हजार एकड़ वन भूमि पर पाईन वृक्षारोपण परियोजना शुरु की गई थी. जिस मकसद को लेकर इस परियोजना को शुरू किया गया था, वह पूरी नही हो सकी. जिसके बाद अब पाईन के विशाल पेड़ अनुपयोगी पड़े रहे, जिसे इन दिनों पाईन पेड़ों को काटकर नीलाम किया जा रहा है.

पाईन की जगह अब दूसरी प्रजाति के पौधे रोपे जायेंगे. पाईन वृक्षों से बस्तरवासियों को किसी तरह का लाभ नहीं हुआ. अब पाईन वृक्षों को काटकर हैदराबाद, बेंगलुरु, रायपुर, चेन्नई, अहमदाबाद, नागपुर आदि के पेपर फैक्ट्रियों को नीलाम किया जा रहा है.
जगदलपुर वन परिक्षेत्राधिकारी देवेन्द्र वर्मा ने बताया कि कायदे से पाईन वृक्षों को प्रत्येक पांच वर्षों में काटकर नीलाम किया जाना था, किंतु यह कार्य जबलपुर स्थित बोर्ड कार्यालय नही कर पाई और न ही लीज पर ली गई भूमि का किराया दिया गया, इसलिए वन विभाग पाइन वृक्षों को काटकर नीलाम कर रही है. विशेषज्ञों की राय के बाद इन खाली स्थानों में नया पौधरोपण किया जाएगा. पाईन की जगह किस तरह के पौधे लगाना उचित होगा, यह विशेषज्ञ तय करेंगे.
