6 राज्यों में 91.85 लाख की साइबर ठगी: फर्जी खातों के जरिए ठगी की रकम खपाने वाले 2 और आरोपी गिरफ्तार
राजनांदगांव- साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत राजनांदगांव पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम को सफलता मिली है. देश के 6 राज्यों में फैला 91,85,000 रुपये की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने 2 और आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है. मामले में 3 अक्टूबर 2026 को 1 आरोपी धनीराम सिन्हा को पहले ही जेल भेजा जा चुका है.
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर ऐसे म्यूल बैंक खातों की पहचान की गई, जिनका उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि के लेन.देन, व्ययन एवं संवर्धन के लिए किया जा रहा था. जांच के दौरान यह पाया गया कि आईसीआईसीआई बैंक खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से अर्जित अवैध धनराशि 91,85,000 रूपये को प्राप्त करने एवं आगे हस्तांतरित करने के लिए किया गया. बैंक खाता धारकों एवं सहयोगियों द्वारा यह जानते हुए भी कि उक्त राशि धोखाधड़ी एवं बेईमानी से प्राप्त की गई है, उसे प्राप्त एवं उपयोग किया जा रहा था. प्रकरण में विवेचना के दौरान आरोपी जितेन्द्र पाण्डेय और हिमांशु निर्मलकर को हिरासत में लेकर पूछताछ करने पर जुर्म स्वीकार करने पर 4 अक्टूबर 2026 को मामलें में विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया.
क्या है म्यूल अकाउंट
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से प्राप्त धनराशि को छिपाने स्थानांतरित करने अथवा निकालने के लिए करते हैं.
म्यूल अकाउंट कैसे काम करता है
अपराधी किसी व्यक्ति को लालच देकर या धोखे से उसका बैंक खाता उपयोग करने की अनुमति प्राप्त करते हैं. साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि उस खाते में जमा की जाती है, इसके बाद राशि को कई अन्य खातों में ट्रांसफर किया जाता है ताकि जांच एजेंसियों के लिए धन का स्त्रोत पता लगाना कठिन हो जाए.
म्यूल अकाउंट धारक कौन हो सकते हैं
ऐसे व्यक्ति जिन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनके खाते का गलत उपयोग किया जा रहा है.
आर्थिक रूप से कमजोर लोग जिन्हें कमीशन या लालच देकर फंसाया जाता है.
ऐसे व्यक्ति जो जानबूझकर अपराधियों की सहायता करते हैं.
इससे बचने के उपाय
- किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम न दें.
- किसी भी प्रकार के कमीशन या बड़ी रकम के लालच में न आएं.
- अपने बैंक खाते के लेन.देन की नियमित जांच करें.
- किसी भी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तत्काल पुलिस या साइबर सेल को दें.
गिरफ्तार आरोपी
- जितेन्द्र पाण्डेय पिता विनोद पाण्डेय उम्र 34 साल साकिन दया नगर रिसाली जय मंदिर रोड़ थाना पदनाभपुर जिला दुर्ग (छ.ग.)
- हिमांशु निर्मलकर पिता स्व. मोहन निर्मलकर उम्र 22 साल साकिन संजय नगर वार्ड नं. 15 शिक्षक कॉलोनी कुरूद थाना कुरूद जिला धमतरी (छ.ग.)
राजनांदगांव पुलिस की अपील
राजनांदगांव पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि किसी के कहने पर अपना बैंक खाताएं मोबाईल सिम, चेकबुक अथवा एटीएम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें. साइबर अपराधी ऐसे खातों का उपयोग गेमिंग एप, गैंबलिंग एप, फर्जी ट्रेडिंग एप, सेक्सटर्शन, डिजिटल अरेस्ट एवं अन्य प्रकार की साइबर ठगी में करते हैं. खाता किराये पर देना, कमीशन पर उपलब्ध कराना अथवा बेचना कानूनन अपराध है. ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है. इन खातों के माध्यम से साइबर अपराध में सहयोग करने वाले खाता, धारकों तथा ऐसे खातों की व्यवस्था करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध भी सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी.
