दुर्ग UCC मीटिंग : UCC से आदिवासियों को रखा जाए बाहर, बैठक में आदिवासी समाज ने की मांग
दुर्ग- दुर्ग स्थित लोक निर्माण विभाग के सभाकक्ष में मंगलवार को समान नागरिक संहिता (UCC) राज्य स्तरीय प्रारूप समिति द्वारा एक उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया. इस बैठक में आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए UCC का कड़ा विरोध किया और इसे आदिवासी समुदाय पर लागू न करने की मांग की.
बैठक में शामिल आदिवासी प्रतिनिधियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनकी विवाह पद्धति, उत्तराधिकार, जल-जंगल-जमीन के अधिकार, रूढ़िगत परंपराएं और सामाजिक व्यवस्था संविधान की 5वीं अनुसूची तथा PESA कानून के तहत सुरक्षित हैं. इन व्यवस्थाओं में UCC का हस्तक्षेप असंवैधानिक होगा.
आदिवासी नेताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री के पूर्व बयान का हवाला देते हुए कहा कि शासन ने स्वयं आदिवासियों को UCC से बाहर रखने की बात कही थी. समाज ने मांग की कि सरकार अपने वादे पर कायम रहे और UCC के अंतिम प्रारूप में स्पष्ट रूप से यह प्रावधान शामिल करे “यह संहिता अनुसूचित जनजाति समुदाय पर लागू नहीं होगी.
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रकला तारम, प्रदेश कोषाध्यक्ष संतानु मरकाम, दुर्ग जिला अध्यक्ष चंद्रभान सिंह ठाकुर, महिला जिला अध्यक्ष दिनेश्वरी भुआर्य, हल्बा महिला अध्यक्ष चंद्रिका रावत, रिसाली गोड़वाना अध्यक्ष अशोक कंगाली, महासचिव बसंत नेताम, भिलाई गोड़वाना अध्यक्ष बाबू लाल उइके, बालोद जिला अध्यक्ष प्रेमलाल कुंजाम, सर्व आदिवासी अध्यक्ष सुदर्शन ठाकुर, केंद्रीय धमधागढ़ महिला अध्यक्ष संगीता ध्रुव, पल्लवी ठाकुर, डालिया ढाले, बीएसपी एसटी एसोसिएशन अध्यक्ष प्रदीप टोप्पो, ओमनाथ नेताम, रामनगर पूर्व अध्यक्ष भागीरथी ठाकुर, युवा अध्यक्ष दीपेश मंडावी, नोविल ठाकुर, मनहरण ठाकुर, तुकाराम कोर्राम (जामड़ीपाट) सहित बड़ी संख्या में आदिवासी प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
