धरना स्थल पहुंचीं
बालाघाट (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर और बिरसा विकासखंड के आदिवासी अंचलों में मासूम बच्चों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. बिरसा क्षेत्र में 18 मई से शुरू हुई मौतों के बाद से अब तक 25 से अधिक बैगा आदिवासी मासूम बच्चों की जान जा चुकी है. इस गंभीर प्रशासनिक और स्वास्थ्य लापरवाही के खिलाफ स्थानीय आदिवासी संगठनों, राजनीतिक दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी है.
मामले के तूल पकड़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग प्रभावित गांवों में मेडिकल कैंप लगाकर जांच और उपचार का दावा कर रहा है. हालांकि, लगातार हो रही मौतों के बीच ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह विफल साबित हो रही हैं.

छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद का समर्थन
पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने और मौतों को रोकने के लिए जारी आंदोलन को अब अंतर्राज्यीय समर्थन भी मिलने लगा है. छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद की प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रकला ताराम, जिलाध्यक्ष चंद्रभान सिंह ठाकुर, महिला जिलाध्यक्ष दिनेश्वरी भूआर्य और जिला सचिव डालिया ढाले ने धरना स्थल पहुंचकर आंदोलन को समर्थन दिया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की.
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के नेताओं ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति के विशेष रूप से संरक्षित दत्तक पुत्र समुदाय (PVTG) के 25 से अधिक बैगा मासूम बच्चों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन? चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं दिया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा.

