भिलाई में आबू पर्वत, पानीपत और दिल्ली से आए ब्रह्माकुमारों का प्रेरक मार्गदर्शन
भिलाई- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, सेक्टर-7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में तनावमुक्त और खुशनुमा जीवन जीने की सहज विधि पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में माउंट आबू, पानीपत और नई दिल्ली से पधारे वरिष्ठ राजयोग शिक्षकों ने अपने अनुभवयुक्त विचारों से उपस्थित जनसमूह को मार्गदर्शित किया.
पांच शब्दों से बनाएं दूरी: ब्रह्माकुमार मोहन सिंघल
साइंटिस्ट एंड इंजीनियर्स विंग के अध्यक्ष ब्रह्माकुमार मोहन सिंघल (आबू राज पर्वत) ने कहा कि इधर-उधर देखने पर सर्वत्र कमियां और अवगुण दिखाई देंगे, इसलिए सामने केवल एक परमात्मा को देखें. उन्होंने जीवन को सरल बनाने के लिए ‘क्यों, क्या, कैसे, कहां, और कब’ जैसे पांच शब्दों से दूर रहने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि सोमवार को परमात्मा शिव को पिता के रूप में याद करें. मंगलवार को मां बनाकर शीतल पालना में रहे. बुधवार को शिक्षक के रूप में शिक्षा ले, गुरुवार को सद्गुरु के रूप में वरदान प्राप्त करे. शुक्रवार को सखा दोस्त के रूप में हर बात परेशानी तनाव चिंता सुनाकर अर्पण करे. शनिवार को परमात्मा को छोटा बच्चा बालक के रूप में याद करें. रविवार को जीवनसाथी, हमसफर बनाकर हर कदम में साथ देने वाले के रूप में प्रेम से याद करे.

घर को बनाएं ‘एंगर फ्री व स्माइलिंग जोन’: ब्रह्माकुमार भारत भूषण
पानीपत से आए ब्रह्माकुमार भारत भूषण ने कहा कि परमात्मा को अपने घर का मालिक बनाएं. उन्होंने बताया कि जिस प्रकार मंदिर की दीवारों में शक्तिशाली प्रकंपन होते हैं, उसी प्रकार परमात्मा की याद से घर के वातावरण को भी ऊर्जावान बनाया जा सकता है. उन्होंने एक महीने के ‘होमवर्क’ का आह्वान करते हुए कहा कि क्रोध (Anger) को डेंजर न बनने दें और टेंशन के आगे ‘अ’ लगाकर हर बात में अटेंशन दें, ताकि घर और मन दोनों एंगर फ्री और स्माइलिंग जोन बन सकें.
वर्तमान में जीना सीखें: ब्रह्माकुमार पीयूष
नई दिल्ली से आए ब्रह्माकुमार पीयूष ने कहा कि दिन में छोटा बच्चा 400 बार मुस्कुराता है क्योंकि बच्चे वर्तमान में जीते हैं और हम सभी बड़े पास्ट और फ्यूचर की बातों को पकड़कर जीते हैं. उन्होंने योगी जीवन की कठिनाई बताते हुए कहा कि मैं दुनिया में नहीं रहता लेकिन दुनिया की सारी बातें मेरे अंदर रहती है. आपको योगी जीवन बनाना है व्यर्थ बातों से अंधा,गूंगा, बहरा बनना है. उन्होंने “जो बीत गया उसका जिक्र नहीं और जो कल होगा उसकी फिक्र नहीं” का मूलमंत्र देते हुए कर्मेन्द्रियों पर संयम रखकर योगी जीवन जीने की प्रेरणा दी.

कार्यक्रम में भिलाई सेवाकेंद्रों की निदेशिका राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी आशा दीदी ने सभी अतिथियों का तिलक और पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया. डिवाइन ग्रुप के बच्चों ने सुंदर स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं मंच का कुशल संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी ने किया. डिवाइन ग्रुप के बच्चों ने सुंदर स्वागत नृत्य प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का सुंदर मंच संचालन वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी प्राची दीदी ने किया.


