धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नैतिकता नहीं, राजनीतिक मजबूरी: दीपक बैज
रायपुर- प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर तीखा हमला बोलते हुए इसे नैतिकता के बजाय राजनीतिक मजबूरी करार दिया है। दीपक बैज ने कहा कि धर्मेन्द्र प्रधान एवं भारतीय जनता पार्टी में नैतिकता होती तो मार्च में जब नीट का पेपर लीक हुआ था उसी समय धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा हो जाता. भाजपा ने हर संभव नीट के मामले को दबाने तथा युवाओं के अधिकार को कुचलने का काम किया, जब छात्र युवा विपक्ष के नेता राहुल गांधी लगातार दबाव बनाने लगे देश भर में सरकार के खिलाफ आवाज उठी उसकी मजबूरी में धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा आया है.
श्री बैज ने कहा कि जिस प्रकार से पूरे देश में मोदी सरकार के खिलाफ आम जनता विरोध में है. छात्र नौजवान दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर देश के हर शहर में आंदोलन कर रहे है. यह बताता है कि सरकार जनता के विश्वास खो चुकी है. प्रधानमंत्री अपनी विफलता स्वीकार करें तथा तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें. किसी प्रधानमंत्री और सरकार के खिलाफ देश के युवाओं में ऐसा आक्रोश पहली बार देखने को मिल रहा है. प्रधानमंत्री जनभावना की कद्र करे इस्तीफा दें.
उन्होंने कहा कि पेपर लीक का संकट अब एक राष्ट्रीय महामारी का रूप ले चुका है. मोदी की सरकार आने के बाद से देश में अब तक 150 से अधिक पेपर लीक की घटनाओं ने 7.5 करोड़ छात्रों और उनके परिवारों को सीधे प्रभावित किया है, लेकिन अब तक एक भी दोषी को सजा नहीं मिली है. लाखों अभ्यर्थी भारी दबाव के बीच औसतन पांच वर्षों तक प्रतिदिन 10 घंटे पढ़ाई कर परीक्षाओं की तैयारी करते हैं. इस तैयारी में न केवल अभ्यर्थियों, बल्कि उनके परिवारों को भी भारी आर्थिक बोझ और त्याग का सामना करना पड़ता है. क्योंकि अन्य अवसरों के दरवाजे उनके लिए बंद होते जा रहे है, इसलिए हर साल लगभग 9 करोड़ अभ्यर्थियों को केवल 6 लाख सरकारी नौकरियों के लिए संघर्ष करना पड़ता है.


