जयपाल सिंह मुण्डा स्मृति दिवस, बालक छात्रावास में बच्चों संग साझा हुई प्रेरक जीवनगाथा
बालोद- महान आदिवासी जननायक जयपाल सिंह मुण्डा की स्मृति दिवस पर छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद द्वारा भाठागांव (आर), जिला बालोद स्थित बालक छात्रावास में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस अवसर पर मुण्डा जी का छायाचित्र भेंट कर पुष्प अर्पित किए गए तथा बच्चों के साथ उनकी ऐतिहासिक जीवनगाथा पर विस्तार से चर्चा की गई.

कार्यक्रम में प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रकला तारम ने अपने पिता स्व. ताल सिंह ठाकुर (सामाजिक, आध्यात्मिक, राजनैतिक एवं साहित्यिक व्यक्तित्व) की स्मृति में छात्रावास के बच्चों को कॉपी-पेन का वितरण किया। उन्होंने बच्चों को जयपाल सिंह मुण्डा के जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संदेश दिया.
जयपाल सिंह मुण्डा का जन्म 3 जनवरी 1903 को झारखंड के खूंटी जिले के टकरा पाहनटोली गांव में हुआ था. वे एक प्रख्यात आदिवासी नेता, शिक्षाविद, राजनेता और अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी थे। 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम के कप्तान के रूप में उन्होंने देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाया.
उन्होंने 1938 में आदिवासी महासभा की स्थापना की और 1946 में संविधान सभा के सदस्य बने. आदिवासियों के अधिकारों के लिए उनका योगदान अतुलनीय रहा. “मरांग गोमके” (महान नेता) के नाम से प्रसिद्ध मुण्डा जी का निधन 20 मार्च 1970 को नई दिल्ली में हुआ था.
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष चंद्रभान सिंह ठाकुर, महिला अध्यक्ष दिनेश्वरी भुआर्य, अश्लेष मरावी, चंद्रिका राउत सहित परिषद के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे.
