देवी-देवताओं की तस्वीर से भावनात्मक ठगी, ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली सामान खपाया जा रहा
रायपुर- छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में नकली खाद्य और उपभोक्ता वस्तुओं का कारोबार तेजी से फैलता जा रहा है. बड़े राइस मिलर और चना, दाल, बेसन उत्पादक अधिक मुनाफे के लालच में घटिया सामग्री से बने नकली उत्पाद तैयार कर रहे हैं और पैकेजिंग पर देवी-देवताओं की तस्वीर छापकर उपभोक्ताओं को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर बेच रहे हैं.
शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस तरह के नकली खाद्य पदार्थ धड़ल्ले से बिक रहे हैं, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार, इन घटिया उत्पादों के सेवन से बीपी, शुगर जैसी बीमारियों के साथ अब पैरालिसिस जैसे गंभीर मामलों का खतरा भी बढ़ रहा है. वहीं, बच्चे घटिया स्नैक्स और दूषित पानी से बनी आइसक्रीम खाकर बीमारी का शिकार हो रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, डूमरतराई, गुढ़ियारी और गोलबाजार जैसे इलाके नकली उत्पादों के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं. यहां एमआरपी से 30 प्रतिशत कम कीमत पर ब्रांडेड कंपनियों के नाम से नकली सामान खपाया जा रहा है. तेल, साबुन, आटा, नमक, घी, मसाले से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम तक नकली रूप में बाजार में उपलब्ध हैं. हालांकि खाद्य एवं औषधि विभाग ने हाल ही में डूमरतराई में छापेमारी कर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, लेकिन इसके बावजूद इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है.
विशेषज्ञों का मानना है कि त्योहारों के दौरान नकली उत्पादों की खपत और बढ़ जाती है, क्योंकि सस्ते ऑफर के नाम पर उपभोक्ताओं को आसानी से भ्रमित किया जाता है. आम लोगों के लिए असली और नकली उत्पादों में फर्क करना मुश्किल हो जाता है. प्रशासन की ओर से सख्त और लगातार कार्रवाई की जरूरत है, ताकि इस बढ़ते काले कारोबार पर लगाम लगाई जा सके और उपभोक्ताओं को सुरक्षित व गुणवत्ता युक्त उत्पाद मिल सकें.
