विधानसभा में गूंजा दुर्ग की अवैध अफीम खेती का मामला, सत्ता-विपक्ष में तीखी बहस
रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को शून्यकाल के दौरान दुर्ग जिले में अवैध अफीम की खेती का मामला जोरदार तरीके से गूंजा. इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली. विपक्ष ने सरकार पर अफीम की खेती को संरक्षण देने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने पुलिस कार्रवाई और जब्ती की जानकारी देते हुए आरोपों को खारिज किया.
शून्यकाल में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्थगन प्रस्ताव लाते हुए कहा कि प्रदेश में धान के बजाय अफीम की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ को “धान का कटोरा” कहा जाता है, लेकिन अब इसे “अफीम का कटोरा” बनाने की शुरुआत हो चुकी है. महंत ने पूरे मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने या विधायकों की समिति गठित कर जांच कराने की मांग की.
वहीं सत्ता पक्ष की ओर से अजय चंद्राकर ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है. बहस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी हस्तक्षेप करते हुए एफआईआर का जिक्र किया और कहा कि एफआईआर में विनायक ताम्रकार का नाम नहीं है, बल्कि उनके नौकर का नाम दर्ज है, जबकि प्रशासन की ओर से विनायक ताम्रकार को मुख्य आरोपी बताया जा रहा है. इस मुद्दे पर सदन का माहौल कुछ देर के लिए काफी गरमा गया और सत्ता-विपक्ष के विधायक एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते नजर आए.
मामले पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि 6 मार्च 2026 को दुर्ग पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि समोदा गांव में अवैध रूप से अफीम की खेती की जा रही है. सूचना के आधार पर पुलगांव थाना क्षेत्र में पुलिस ने छापेमारी की. अंधेरा होने के कारण पहले फसल को सुरक्षित रखा गया और बाद में आगे की कार्रवाई की गई.
गृहमंत्री ने बताया कि इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और करीब 6,224 किलोग्राम अवैध अफीम बरामद की गई है, जिसकी बाजार कीमत 7 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है. सरकार ने स्पष्ट किया कि मामले में कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा.
