नई दिल्ली : उत्तराखंड के जोशीमठ को धीरे-धीरे जमीन निगलती जा रही है और खतरा बढ़ता ही जा रहा है. जोशीमठ की धरती तेजी से धंसती जा रही है और यही वजह है कि सड़क से लेकर घरों तक में दरारें पड़ रही हैं. जोशीमठ तबाह होने की ओर लगातार अग्रसर है, इसका खुलासा सैटेलाइट तस्वीरों से हुआ है.

तेज रफ्तार से धंस रही है जमीन
इसरो (ISRO) ने सैटेलाइट तस्वीरें जारी की हैं, जिससे भयावह संकेत मिल रहे हैं. जमीन धंसने के कारण उत्तराखंड का जोशीमठ लगातार नीचे की ओर खिसक रहा है. इसरो के नेश्नल रिमोट सेंसिंग सेंटर ने सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से खुलासा किया है कि महज 12 दिनों के भीतर यानी 27 दिसंबर से 8 जनवरी के बीच जोशीमठ 5.4 सेमी नीचे धंस गया.
आर्मी हेलीपैड और नरसिंह मंदिर भी धंस जाएगा?
इन तस्वीरों में सेना के हेलीपैड और नरसिंह मंदिर समेत पूरे शहर को संवेदनशील क्षेत्र के रूप में चिह्नित किया गया है. इसरो की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर उत्तराखंड सरकार खतरे वाले इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है और इन इलाकों के लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है.
जोशीमठ की यह सैटेलाइट तस्वीर इसलिए भी भयावह है, क्योंकि एनआरएससी ने दावा किया है कि अप्रैल 2022 और नवंबर 2022 के बीच जोशीमठ में 9 सेंटीमीटर का धीमा धंसाव दर्ज किया गया था, मगर पिछले सप्ताह दिसंबर और जनवरी के पहले सप्ताह के बीच जोशीमठ में जमीन के तेजी से धंसने की घटना शुरू हुई थी और महज 12 दिनों में ही पवित्र शहर जोशीमठ 5.4 सेमी धंस गया. सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि आर्मी हेलीपैड और नरसिंह मंदिर सहित सेंट्रल जोशीमठ में सबसिडेंस जोन यानी भू-धंसाव क्षेत्र है. मुख्य धंसाव जोन जोशीमठ-औली रोड के पास 2,180 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है. इस बीच जोशीमठ में मौसम का मिजाज भी बिगड़ा हुआ है.
जोशीमठ में स्थानीय लोगों का विस्थापन जारी
गुरुवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ का दौरा किया और नरसिंह मंदिर में पूजा अर्चना की. सीएम धामी ने कहा कि जोशीमठ को हर हाल में बचाया जाएगा. उन्होंने कहा कि सबसे पहले लोगों की सुरक्षा है और हम इसके लिए काम कर रहे हैं.
