जन संघर्ष मोर्चा ने विभिन्न मांगो लेकर भिलाई परिवार चौंक में किया प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
भिलाई- सिविक सेंटर के पास परिवार चौंक में जन संघर्ष मोर्चा, आदिवासी मातृ संगठन, आम आदमी पार्टी समेत अन्य समाज के लोग किसान मजदूर संगठन द्वारारविवार को विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया. जन संघर्ष मोर्चा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया की महामहिम राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन दिया जिसमे उक्त संस्याओ को सिलसिले वार बताया गया.
1 .बस्तर के बीजापुर जिले के अंतर्गत ग्राम पीडिया में सशस्त्र बलों द्वारा 10 माओवादियों को मार गिराने का दावा किया जा रहा है जबकि ग्रामवासियों के अनुसार मारे गए 10 आदिवासी ग्रामीण थे जो तेंदुपत्ता तोड़ने जंगल गए थे. वे वहां उपस्थित सशस्त्र बलों को देखकर डर कर भागे तब फोर्स ने गोलिया चला दी जिसमे 10 आदिवासी मारे गए. इस निर्मम हत्याकांड के बारे में कई जन संगठनों द्वारा फैक्ट फाइंडिंग की गई है और सच को उजागर किया गया है.
माओवाद को अंकुश में लाने के नाम पर निर्दोष आदिवासियों की हत्या का हम जन संगठन (जन संघर्ष मोर्चा) पुरजोर विरोध करते हैं. साथ ही अडानी, अंबानी, जिंदल जैसे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घरानों को बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों को सौंपने की भाजपा सरकार के कॉरपोरेट परस्त नीतियों का भी हम विरोध करते हैं.
हमारी मांग है कि बीजापुर जिले की ग्राम पीडिया में आदिवासियों के मारे जाने की घटना की सही और निष्पक्ष जांच हो तथा दोषी पुलिस/ प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कारवाई की जाय.
साथ ही पीड़ित परिवार को समुचित सुरक्षा और मुआवजा प्रदान किया जाए. जल जंगल जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे आदिवासियों के ऊपर झूठे मुकदमे दर्ज करने पर रोक लगाई जाए.सशस्त्र बलों द्वारा आदिवासी महिलाओं के यौन अत्याचार की घटनाओं पर तुरंत रोक लगे.
हिंसा किसी भी तरफ से हो कही से हो हम लोग विरोध करते है हम लोग यह मानते हैं की सैन्यीकरण से नहीं बल्कि राजनैतिक वार्तालाप/ संवाद के जरिए करने की मांग हम राज्य सरकार से करते हैं. निर्दोष आदिवासीयों को जेल से रिहा करने की मांग भी हम इस ज्ञापन के माध्यम से रख रहे हैं.
- राज्य के सरगुजा संभाग के कोरबा, सरगुजा व सूरजपुर जिले में जैव विविधता तथा प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हंसदेव के वनक्षेत्र में परसा कोल ब्लॉक के उत्खनन का ठेका अडानी जैसे महाभ्रष्ट कॉरपोरेट घराने को सौंप दिया गया है. परसा कोल ब्लॉक के लिए अडानी कॉरपोरेट समूह द्वारा हंसदेव वन की बड़े पैमाने पर कटाई के खिलाफ क्षेत्र की आदिवासी जनता तथा जन संगठन लंबे समय से आवाज उठा रहे हैं. इस मुद्दे को उठाते हुए हसदेव वनक्षेत्र की सैकड़ों आदिवासी जनता द्वारा 400 किलोमीटर से भी ज्यादा पैदल यात्रा कर राजधानी रायपुर में आकर तत्कालीन राज्यपाल अनुसुइया उइके को ज्ञापन सौंपा गया था. हाल ही में राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने जांच में पाया है कि हंसदेव वन को अडानी समूह को सौंपने के लिए फर्जी ग्रामसभा का आयोजन किया गया था. क्योंकि पांचवी अनुसूची के अनुसार इस क्षेत्र में कोई भी परियोजना को मंजूरी देने से पहले ग्रामसभा की सहमति आवश्यक है.जो कि विधिसम्मत नहीं हुआ था.आशंका जताई जा रही है कि राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा संभागायुक्त सरगुजा को हंसदेव वन में कटाई को रोकने के लिए कहने के बावजूद,लोकसभा चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी की सरकार, हंसदेव वन में कॉरपोरेट हित में बड़े पैमाने पर कटाई शुरू करने वाली है. हमारी मांग है कि परसा कोल ब्लॉक के हित में अविलंब हंसदेव वनक्षेत्र की कटाई रोकी जाए.क्योंकि हंसदेव अरण्य ,छत्तीसगढ़ का फेफड़ा है. ये मुद्दा पर्यावरण/ पारिस्थितिकी विनाश के साथ साथ आदिवासी जनता के जीवनयापन से भी गंभीरता से जुड़ा हुआ है. कॉरपोरेट घरानों द्वारा जल जंगल जमीन की बेलगाम लूट के चलते,बड़े पैमाने पर आदिवासी विनाश और विस्थापन के कगार पर हैं.
हमारी यह भी मांग रही है कि कॉरपोरेट सेक्टर के हित में राज्य की विष्णुदेव साय सरकार द्वारा जिन आदिवासी ग्रामीणों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर प्रताड़ित किया जा रहा है उन मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए और उन्हें पुलिस प्रशासन द्वारा प्रताड़ित करने पर रोक लगे.
- गत 25 मई को बेमेतरा जिले के पिरदा में एक निजी बारूद कारखाने ” प्राइवेट ब्लास्ट लिमिटेड” में हुए भीषण विस्फोट में 12 मजदूरों के मारे जाने की आशंका है. अभी तक 8 मजदूरों के देह के कुछ अंश प्राप्त हुए हैं. घटना के 5 दिन बाद पुलिस ने स्थानीय जनता के भीषण दबाव पर एफआईआर दर्ज किया है. तब तक पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ रख कर बैठा था.पता चला है कि फैक्ट्री मालिक मध्य प्रदेश का भाजपा नेता है.जिसने तमाम कानूनों को ताक पर रख कर पिरदा ग्राम के समीप कारखाने को लगाया था. तमाम मजदूर ठेका प्रणाली पर कार्यरत थे. फैक्ट्री प्रबंधन श्रम कानूनों का उल्लंघन करता आया है.ग्रामीणों ने कई बार बारूद कारखाने में लापरवाही से विस्फोट की आशंका जताते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत की थी.लेकिन श्रम विभाग और जिला प्रशासन के कानों में जूं तक नहीं रेंगी.पुलिस ने अभी तक फैक्ट्री प्रबंधन को गिरफ्तार नहीं किया है.अभी भी पुलिस प्रशासन,बारूद कारखाने में हुए विस्फोट की घटना की लीपापोती में लगा हुआ है. जबकि स्थानीय जनता, न्याय पाने के लिए संघर्ष कर रही है.
हमारी मांग है कि अविलंब प्रशासन द्वारा फैक्ट्री प्रबंधन को लापरवाही से श्रमिकों की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराकर उन्हें गिरफ्तार किया जाए. साथ ही गैर जिम्मेदार शासकीय अधिकारियों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाय. सिर्फ 8 नहीं बल्कि लापता 12 मजदूरों के लिए 50 – 50 लाख रुपए मुआवजा उनके परिजनों को दिया जाय. इसके अलावा मृतकों के प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति को शासकीय नौकरी का नियुक्ति पत्र दिया जाय. राज्य में खतरनाक उद्योगों के लिए श्रम एवं पर्यावरणीय सुरक्षा को सुनिश्चित किया जाए.
हम अधोहस्ताक्षरित इस ज्ञापन के माध्यम से राज्य में शासन द्वारा किए जा रहे मानवाधिकारों एवं जीने के अधिकारों पर हमलों के बारे में आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं.आपसे हमारी गुज़ारिश है कि कृपया उपरोक्त मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए अपने स्तर पर पहल करें.
- बस्तर के अल्प संख्यको को गाँव से अलग रहने लाश को दफनाने नही देने ईसाई आदिवासी हैं उन्हे आदिवासी के सारे अधिकारों से वंचित करने का सडयंत्र लगातार जारी. इस पर रोक लगाने छत्तीसगढ़ सरकार से न्याय दिलावे
- आदिवासी सामाजिक नेता सरजू टेकाम को रिहा कराए.
प्रदर्शन में आदिवासी मातृ संगठन से चंद्रकला तारम, चंद्रिका, महिला मुक्ति मोर्चा से निरा डेहरिया, आदिवासी समाज से चन्द्रभान ठाकुर, ओम नाथ नेताम, लोईमु से सुरेंद्र मोहंती, तुकाराम, नगरीय निकाय जनवादी सफाई कामगार यूनियन से मनोज कोसरे, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा मजदूर कार्यकर्ता समिति से जय प्रकाश नायर, रमाकांत बंजारे, प्रगतिशील सीमेंट श्रमीक संघ से मोहमद अली, मुस्लिम कम्युनिटी से सज्जाद भाई, जन संघर्ष मोर्चा से वी एन प्रसाद राव, कलादास डेहरिया, अब्दुल, पी यू सी एल से एस एस गिल, आम आदमी पार्टी से मेहरबांन सिंह, ज्योति, ईसाई कम्युनिटी से पास्टर चोवा राम, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी रेड स्टार से सौरा यादव, तुहीन देव, हाउस लिंज संघर्ष समिति से राजेंद्र परगनिहा आदि सैकड़ों सामाजिक संगठन के लोग उपस्थित रहे.
