अहता दुकानों की ऑनलाइन होगी नीलामी
एक साल के लिए दिया जाएगा लाइसेंस
सरकार को केवल शराब बिक्री से ही नहीं, बल्कि शराब पिलाने के लिए चलाए जाने वाले अहातों से भी बड़ी कमाई मिलने जा रही है. राज्य सरकार ने अब देशी और अंग्रेजी शराब दुकानों के आसपास चलने वाले अहातों से भी कमाई का रास्ता निकाला है. अब जल्द ही शराब दुकानों से लगे अहातों की ऑनलाइन नीलामी की जाएगी. छोटी-छोटी जगहों की दुकानों के लिए 3 लाख से 41 लाख रुपए तक नीलामी दर रखी गई है. राज्य सरकार पहली बार शराब दुकानों के लिए अहाता पॉलिसी लाने जा रही है. अहाता चलाने के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड टेंडर करेगी. इसमें लाइसेंस की राशि निर्धारित की जाएगी. जिसे भी टेंडर मिलेगा, उसे अहाता चलाने के लिए लाइसेंस दिया जाएगा.
एक साल के लिए दिया जाएगा लाइसेंस
आबकारी अधिकारियों ने बताया कि अहाता चलाने के लिए लाइसेंस दिया जाएगा. अभी जो पॉलिसी बनाई जा रही है, उसके तहत 2 से 3 करोड़ रुपए अहाता चलाने वाले को देना होगा. दुकान की सेलिंग जितनी होगी, उसके अनुसार प्रतिशत तय किया जाएगा. इसे 12 किस्तों में देना होगा. लाइसेंस एक साल के लिए दिया जाएगा. अहाता पॉलिसी लागू होने के बाद शराब दुकान के 100-150 मीटर की दूरी में कोई भी दूसरा व्यक्ति चखना सेंटर नहीं खोल सकेगा.
राज्य सरकार के आबकारी आयुक्त कार्यालय ने वर्ष 2024-25 के लिए देशी-विदेशी शराब की फुटकर दुकानों के पास बने अहातों को ऑनलाइन निविदा के माध्यम से नीलाम करने की तैयारी शुरू कर दी है. इस संबंध में प्रदेश के सभी कलेक्टरों को कार्ययोजना भेजी गई है. अहातों की नीलामी 1 मई 2024 से 31 मार्च 2025 तक के लिए की जाएगी.
पहले आओ पहले पाओ का फार्मूला
सरकार ने अहाता की बोली लगाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए पहले आओ पहले पाओ का फार्मूला भी तैयार रखा है. अहाता नीलामी की शर्तों में साफ किया गया है कि जिन अहातों के लिए एक ही निविदा पत्र प्राप्त होगा, उन अहातों का सर्वप्रथम चयन किया जाएगा. इसके बाद जिन अहातों के लिए एक से अधिक निविदा पत्र प्राप्त होते हैं, उन अहातों के लिए बढ़ते क्रम से प्राप्त निविदा पत्र अनुसार अहातों के चयन की प्रक्रिया अपनाई जाएगी यानी जिन अहातों के लिए कम निविदा पत्र रहेंगे, उन अहातों को पहले, इसी प्रकार बढ़ते क्रम की निविदाओं की संख्या के अनुसार अहातों का चयन किया जाएगा. जिसे भी लाइसेंस दिया जाएगा उसे बैठने से लेकर खाने-पीने की पूरी व्यवस्था करनी होगी. इसमें बारिश और ठंड को ध्यान रखकर सेटअप तैयार किया जाएगा. वहां एसी या कूलर लगाना होगा. दुकान के आसपास साफ-सफाई की जिम्मेदारी भी अहाता संचालक की होगी. अहाता मेन रोड से हटकर ही खोला जाएगा, ताकि ट्रैफिक प्रभावित न हो.
आबकारी से 6000 करोड़ का राजस्व
आबकारी से सरकार को हर साल 6000 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व मिलता है. हर साल इसमें इजाफा हो रहा है. राज्य के 33 जिलों में देशी और अंग्रेजी मिलाकर 650 से ज्यादा दुकानें हैं.
