स्क्रीन टाइम अधिक होने के कारण बढ़ रही समस्या
आंख हमारे शरीर का ही नहीं बल्कि हमारी जिंदगी का भी एक अहम हिस्सा है. जिनके पास आंखें नहीं हैं, उनसे पूछिए बिना आंख के जिंदगी क्या होती है. इसलिए जरूरी है अपनी आंखों की देखभाल करें और समय रहते किसी भी तरह की समस्या होने पर तुरंत डाक्टर से जांच करवाएं. आंखों की समस्या को लेकर छत्तीसगढ़ प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने स्कूलों में सर्वे किया है. जिसमें सात महीने में 28 हजार 193 बच्चों में आंखों की समस्या सामने आई है.
स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रदेश के 9 हजार 741 स्कूलों में सर्वे में सामने आया कि 90% मामलों में स्क्रीन टाइम अधिक यानी कंप्यूटर, मोबाइल में अधिक समय देना, गैर जरूरी उपयोग, आउट डोर गेम खेलने की प्रवृत्ति कम होने से बच्चों की आंखों में समस्या आई है. जबकि 10% बच्चों में आंखों की समस्या का कारण अनुवांशिक व अन्य है. इसलिए जरूरी है कि बच्चों में स्क्रीन की आदत कम करें व उन्हें आउट डोर गेम खेलने के लिए प्रोत्साहित करें एवं पौष्टिक भोजन प्रदान करें.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार प्रदेश में बाल नेत्र सुरक्षा योजना के तहत अप्रैल से अक्टूबर-2022 तक सात माह में 9,741 स्कूलों में सर्वे किया गया. इस दौरान 8,45,673 बच्चों के आंखों की जांच की गई. दृष्टिदोष वाले 13,454 बच्चों को नि:शुल्क चश्मे का वितरण किया है. आंखों से जुड़ी समस्या सामने आने वाले बच्चों को चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है. कैडेवर अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डाॅ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि आंखों की समस्या को सहीं समय पर जांच व उपचार नहीं लेने व दृष्टिदोष पर चश्मा नहीं पहनने से बच्चों की आगे चलकर परेशानी अधिक बढ़ जाती है. बाद में चश्मा भी काम नहीं आता है. वहीं लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता होती है.
वयस्कों को लगा चश्मा
डाॅ. सुभाष मिश्रा ने बताया कि 46,741 वयस्कों को चश्मा लगा है. इनमें से करीब 50% को कंप्यूटर, मोबाइल, लैपटाप तथा शेष 50% को वृद्धावस्था, मोतियाबिंद व अन्य कारणों से आंखों में रोशनी की समस्या आई है. आंखों की समस्याओं और उपचार के लिए शासकीय अस्पतालों में बेहतर व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं.
पिछले एक साल में 90,000 लोगों का मोतियाबिंद आपरेशन
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक साल में मोतियाबिंद का आपरेशन कर 90 हजार लोगों की आंखों की रोशनी लौटाई गई है. अधिकारियों ने बताया कि अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में नि:शुल्क सर्जरी से एक वर्ष में 90 हजार से अधिक मोतियाबिंद रोगियों की आंखों की रोशनी लौटी है. इसमें सफेद मोतियाबिंद के 85,178 व काला मोतियाबिंद के 5,069 लोग शामिल हैं.
