मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में केन्द्र सरकार के महत्वाकांक्षी चीता प्रोजेक्ट के तहत बुधवार को एक बड़ी खुशखबरी आई है. नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाकर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में लाकर बसाए गए चीतों को कुनबा बढ़ गया है. यहां नामीबिया से लाई गई मादा चीता आशा ने बुधवार को तीन शावकों को जन्म दिया है. तीनों शावक पूरी तरह से स्वस्थ हैं. कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मैदानी अमला और डॉक्टरों की टीम शावकों पर नजर बनाए हुए हैं.
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने पीएम नरेंद्र मोदी के प्रोजेक्ट चीता की सफलता का जिक्र करते हुए सोशल मीडियो प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें चीते के सभी शावक नजर आ रहे हैं. इस वीडियो को पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “कूनो नेशनल पार्क ने तीन नए सदस्यों का स्वागत किया है. इन शावकों का जन्म नामीबियाई चीता आशा से हुआ है.”
चीते के नए शावकों का वीडियो
इस दौरान उन्होंने प्रोजेक्ट चीता में शामिल सभी विशेषज्ञों, कुनो वन्यजीव के अधिकारियों को बधाई दी. इससे पहले मार्च 2023 में ज्वाला नाम की मादा चीता ने चार शावकों को जन्म दिया था, लेकिन उनमें से केवल एक ही जीवित बचा था. उस चीते को भी नामीबिया से कूनो नेशनल पार्क लाया गया था.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने जन्मदिन के मौके पर 17 सितंबर, 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में छोड़ा था. मादा चीता आशा उन्हीं में से एक है. इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से यहां 12 चीते लाए गए थे. इस तरह कूनो में कुल 20 चीते बसाए गए थे. मार्च 2023 में मादा चीता सियाया ने यहां चार शावकों को जन्म दिया था, इस तरह कूनो में कुल चीतों की संख्या 24 हो गई थी, लेकिन मार्च से मई के बीच छह चीतों और तीन शावकों की मौत हो गई थी.
इसके बाद यहां 14 चीते और एक शावक शेष बचे थे, अब तीन नन्हे शावकों को मिलाकर 18 हो चुकी है. इनमें सात नर चीते गौरव, शोर्य, वायु, अग्नि, पवन, प्रभाष और पावक तथा 7 मादा चीते आशा, गामिनी, नाभा, धीरा, ज्वाला, निरवा ओर वीरा शामिल हैं. इनमें से अभी केवल दो चीते ही खुले जंगल में मौजूद है जो भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों को दिख सकते हैं, जबकि शेष सभी चीतों को अभी बड़े बाड़े में ही रखा गया है.
