आज घर-घर विराजेंगे विघ्नहर्ता भगवान गणेश,जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि…

हिंदू धर्म में भगवान गणेश की उपासना का विशेष महत्व है. विघ्नहर्ता भगवान गणेश प्रथम पूजनीय देवता हैं. मान्यता है कि भगवान गणेश की उपासना करने से सुख-समृद्धि, बुद्धि व बल आदि का आशीर्वाद प्राप्त होता है. हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को भगवान गणेश का जन्मोत्सव धूमधाम के साथ मनाया जाता है. गणेश जी ऋद्धि-सिद्धि के स्वामी हैं. इसलिए उनकी कृपा से संपदा और समृद्धि का कभी अभाव नहीं रहता. श्री गणेश जी को दूर्वा और मोदक अत्यंत प्रिय है. उदयातिथि के अनुसार 19 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है.
आज गणेश चतुर्थी पर सुबह से ही भद्रा लगा है. भद्राकाल सुबह 06:08 से दोपहर 01:43 तक है. लेकिन गणेश जी की पूजा और मूर्ति स्थापना पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि इस भद्रा का वास पाताल लोक में होगा .
(गणेश चतुर्थी शुभ योग)
इस साल गणेश चतुर्थी पर 300 साल बाद ब्रह्म, शुक्ल और शुभ योग का अद्भुत संयोग बना है. साथ ही स्वाति नक्षत्र और विशाखा नक्षत्र भी रहेंगे.
(गणेश चतुर्थी विशेष मुहूर्त)
गणेश चतुर्थी पर आज विशेष मुहूर्त की बात करें तो, सुबह 09:10 से दोपहर 01:43 के दौरान चर, लाभ और अमृत के शुभ मुहूर्त हैं. ऐसे में गणपति की स्थापना आप सुबह 09:10 से दोपहर 01:43 के बीच कर सकते हैं. लेकिन सुबह 11:01 से विशाखा नक्षत्र में वृश्चिक लग्न में श्रीगणेश की स्थापना करना श्रेष्ठ रहेगा.
गणेश चतुर्थी व्रत व पूजन विधि
- व्रती को चाहिए कि प्रातः स्नान करने के बाद सोने, तांबे, मिट्टी की गणेश प्रतिमा लें.
- चौकी में लाल आसन के ऊपर गणेश जी को विराजमान करें.
- गणेश जी को सिंदूर व दूर्वा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाएं. इनमें से 5 लड्डू गणेश जी को अर्पित करके शेष लड्डू गरीबों या ब्राह्मणों को बाँट दें.
- सांयकाल के समय गणेश जी का पूजन करना चाहिए. गणेश चतुर्थी की कथा, गणेश चालीसा व आरती पढ़ने के बाद अपनी दृष्टि को नीचे रखते हुए चन्द्रमा को अर्घ्य देना चाहिए.
- इस दिन गणेश जी के सिद्धिविनायक रूप की पूजा व व्रत किया जाता है.
- ध्यान रहे कि तुलसी के पत्ते (तुलसी पत्र) गणेश पूजा में इस्तेमाल नहीं हों. तुलसी को छोड़कर बाकी सब पत्र-पुष्प
गणेश जी को प्रिय हैं. - गणेश पूजन में गणेश जी की एक परिक्रमा करने का विधान है. मतान्तर से गणेश जी की तीन परिक्रमा भी की जाती है.
