पैसे के इंतजार में थम गईं कई बुजुर्गों की सांसें, सरकार के पास इच्छाशक्ति की कमी: विनोद चंद्राकर
महासमुंद- पूर्व संसदीय सचिव एवं महासमुंद के पूर्व विधायक विनोद सेवन लाल चंद्राकर ने सहारा रिफंड पोर्टल के माध्यम से निवेशकों का पैसा न लौटाए जाने पर केंद्र सरकार के खिलाफ तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि पोर्टल शुरू होने के साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी महज 2 प्रतिशत से कम निवेशकों को ही राशि मिल पाई है, जो कि देश और प्रदेश के लाखों परिवारों के साथ सीधा छल और वादाखिलाफी है. चंद्राकर ने मांग की है कि सरकार इस पोर्टल को तत्काल पुनः सक्रिय कर सभी लंबित आवेदनों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करे और मृतक निवेशकों के आश्रितों को प्राथमिकता के आधार पर उनका हक दिलाएं.
श्री चंद्राकर ने कहा कि देश के गृहमंत्री व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 18 जुलाई 2023 को बड़े प्रचार के साथ सहारा रिफंड पोर्टल का शुभारंभ किया था और मोदी की गारंटी के तहत पैसा लौटाने की बात कही गई थी. आज लगभग साढ़े तीन साल बाद भी धरातल पर कुछ नहीं हुआ. सरकारी आंकड़ों के अनुसार आज 19 अगस्त 2026 तक की स्थिति में देशभर में 1 करोड़ 45 लाख 79 हजार 780 आवेदन रिफंड पोर्टल में दर्ज हैं. इनमें छत्तीसगढ़ के लाखों निवेशकों के भी आवेदन शामिल है, इन्हें आवेदन किए हुए साढ़े तीन साल होने को हैं. इतनी बड़ी संख्या के बावजूद आज तक 2 प्रतिशत निवेशकों को भी उनका पैसा वापस नहीं मिल पाया है. चुनावी मजबूरी में पश्चिम बंगाल और बिहार चुनाव के पहले जिन लोगों को कंपनी से लाखों रुपये मिलने थे, उन्हें भी केवल 10 से 20 हजार रुपये देकर खानापूर्ति कर दी गई और चुनाव निपटते ही पोर्टल को निष्क्रिय कर दिया गया.
पूर्व संसदीय सचिव ने बताया कि तीन वर्षों में इंतजार करते-करते कई बुजुर्ग निवेशकों की मृत्यु हो गई. पैसे की आस में उनकी सांसें थम गईं, लेकिन सरकार ने उनके परिवारों की सुध तक नहीं ली. यह केवल आर्थिक क्षति नहीं है, यह लाखों परिवारों के भरोसे का कत्ल है. सरकार के पास आंकड़े हैं, आवेदन हैं, लेकिन इच्छाशक्ति नहीं है. निवेशक आज भी कलेक्टर और मंत्रियों के चक्कर काट रहे हैं और हर दरवाजे से उन्हें निराशा ही मिल रही है. छत्तीसगढ़ में जब भूपेश बघेल की सरकार थी, तब अनेक चिटफंड कंपनियों के निवेशकों की राशि वापस कराने की कार्रवाई गंभीरता से शुरू की गई थी. भाजपा की सरकार बनते ही वह प्रक्रिया बंद कर दी गई. घोषणा पत्र में सहारा निवेशकों को पैसा वापस करने का वादा किया गया था, लेकिन वह वादा कागज तक सीमित रह गया. केंद्र सरकार 12 साल बेमिसाल का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर जनता अपने को ठगा हुआ महसूस कर रही है.
श्री चंद्राकर ने आरोप लगाया कि सरकार में काम करने की इच्छाशक्ति के कमी के कारण लाखों निवेशकों को अपनी गाढ़ी कमाई के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है. यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है. उन्होंने मांग करते हुए कहा कि केंद्र सरकार तुरंत सहारा रिफंड पोर्टल को पुनः सक्रिय करे, लंबित सभी आवेदनों का समयबद्ध निराकरण करे और मृतक निवेशकों के परिजनों को प्राथमिकता के आधार पर भुगतान सुनिश्चित करे. निवेशकों का मूलधन ब्याज सहित लौटाना सरकार की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है.



