विधानसभा में गूंजेंगे आदिवासियों के अधिकार!

दुर्ग- छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद (शाखा-दुर्ग) ने प्रदेश के जनजातीय समुदाय के कई ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दों को लेकर सीधे विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है. परिषद ने मांग की है कि आगामी विधानसभा सत्र में इन गंभीर मुद्दों पर विशेष रूप से चर्चा कराई जाए और आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा हेतु आवश्यक वैधानिक कदम उठाए जाएं.
मांग पत्र में उठाए गए 4 प्रमुख और ज्वलंत मुद्दे:-
- 5वीं अनुसूची क्षेत्रों में असंवैधानिक कृत्य
संविधान की 5वीं अनुसूची एवं पेसा अधिनियम 1996 के तहत ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य है. परंतु बालोद जिले के तुएगोंदी-जामड़ीपाट क्षेत्र की वनभूमि पर बिना ग्रामसभा की अनुमति के अवैध कब्जे हो रहे हैं. प्रशासन द्वारा स्वयं पेसा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है.
- पवित्र “पेन ठांना” स्थल का संरक्षण
कोंडागांव जिले में आदिवासियों की आस्था के केंद्र “पेन ठांना स्थल” के साथ छेड़छाड़ की जा रही है. जल-जंगल-जमीन के साथ-साथ आदिवासियों की धार्मिक आस्था भी संविधान के अनुच्छेद 25 से 29 द्वारा संरक्षित है. इसे तत्काल रोका जाए.
- बस्तर में विस्थापन और विकास
वर्तमान केंद्र व राज्य सरकार को नक्सल उन्मूलन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए निवेदन हैं कि बस्तर में स्थानीय विकास के नाम पर आदिवासियों का उन्मूलन नहीं होना चाहिए. क्षेत्रीय विकास में शत-प्रतिशत आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु आपसे आग्रह हैं. बस्तर के औद्योगिक विकास में भूमि अधिग्रहण करते समय ग्राम सभा की 100% सहमति अनिवार्य की जाए एवं फर्जी ग्राम सभाओं के खिलाफ सख्ती से निपटा जाए.
- जनगणना 2027 में “आदिवासी धर्म” कॉलम विधानसभा में पारित किया जाए
देश में प्रस्तावित जनगणना में छत्तीसगढ़ राज्य में निवासरत जनजातीय समुदाय को अपना धर्म दर्ज करने हेतु,स्वतंत्र कॉलम सम्मिलित किया जाए.
