विधानसभा में गूंजा आउटसोर्सिंग कर्मियों के पुलिस सत्यापन का मुद्दा, सत्ता पक्ष के विधायकों ने ही स्वास्थ्य मंत्री को घेरा

रायपुर- छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन आज सरकारी संस्थानों और अस्पतालों में प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों के पुलिस सत्यापन (कैरक्टर वेरिफिकेशन) का मुद्दा गरमाया रहा. दिलचस्प बात यह रही कि इस संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष से पहले सत्ता पक्ष यानी भाजपा के ही वरिष्ठ विधायकों ने अपनी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को घेरा. विधायकों की भारी तीखे सवालों के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि भविष्य में आउटसोर्सिंग के जरिए आने वाले सभी कर्मचारियों का अनिवार्य रूप से पुलिस सत्यापन कराया जाएगा.
प्रश्नकाल में भाजपा विधायक धरम लाल कौशिक ने यह मामला उठाते हुए सरकार से पूछा कि क्या प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन जरूरी है आज तक कितने का सत्यापन कराया गया है. नियम का पालन नहीं करने वाले एजेंसी पर कार्रवाई का क्या प्रावधान है. आपके टेंडर में यह शर्त अनिवार्य है तो फिर इसका पालन क्यों नहीं हो रहा है. जवाब में स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने बताया कि प्लेसमेंट कर्मचारी के रूप में सुरक्षा, सफाई और चालक के पद में रखने का प्रावधान है. डी के हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज रायपुर में आउटसोर्सिंग का प्रावधान है जहां शत प्रतिशत सत्यापन किया जा चुका है परंतु अंबेडकर अस्पताल में यह लागू नहीं है. पुलिस सत्यापन के बगैर भुगतान रोकने की शर्त नहीं है. भाजपा विधायक अजय चंद्राकर और धरम लाल कौशिक आउटसोर्सिंग के सभी कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन कराने की मांग की. इस पर स्वास्थ्य मंत्री ने सदन को भरोसा दिलाया कि भविष्य में सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का चरित्र सत्यापन कराया जाएगा.
