द्रोपदी प्रसंग सुनाकर तरुणा ने दी अपने गुरु तीजन को दी श्रद्धांजलि

राजनांदगांव- लोक कला संगीत व साहित्य के लिए समर्पित,छत्तीसगढ़ साहित्य सृजन समिति द्वारा फरहद स्थित स्मार्ट सिटी में सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई को श्रद्धांजलि देने सांगीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के तैल चित्र व पद्मश्री तीजन बाई के फोटो पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. कार्यक्रम में सबसे पहले कवि एवं लोक कलाकार पप्पू पौर्वात्य’ कलिहारी ने सुप्रसिद्ध लोक गायक लक्ष्मण मस्तुरिहा के गीत मोर बोले तम्बूरा जिनगानी अधूरा – अधूरा गीत गाकर तीजन बाई को श्रद्धा के पुष्प अर्पित किया वहीं कार्यक्रम की मुख्य अतिथि समाजसेवी श्रीमती शारदा तिवारी ने पद्मश्री तीजन बाई के पंडवानी गायन के प्रथम विदेश यात्रा की परिस्थिति की चर्चा की और कहा कि तीजन पंडवानी गायन की मसीहा थी. उनका निधन छत्तीसगढ़ी लोक कला की अपूरणीय क्षति है.
पद्मश्री तीजन बाई की पटु शिष्या तरुणा साहू ने महाभारत की द्रौपदी प्रसंग का गायन कर माहौल को पंडवानी मय बनाया और कहा के उनकी गुरु पद्मश्री तीजन बाई के यह प्रसंग अति प्रिय था. उन्होंने कहा कि कलाकार कभी मरते नहीं, लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं. तीजन बाई भी अमर हो गई है. इस अवसर पर हारमोनियम पर संगत संगीतकार गोविन्द साव, व्यैंजो पर पप्पू पौर्वात्य’ व तबले पर मोतीलाल साहू ने की वही रागी की भूमिका कवि रौशन साहू मोखलिहा ने निभाई.
तीजन बाई तै गज़ब याद आवत
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के जिला समन्वयक वरिष्ठ कवि साहित्यकार एवं लोक संगीतकार आत्माराम कोशा “अमात्य” ने काव्यात्मक लहजे में – तुन -तुन, तुन – तुन तम्बूरा बजावत, / तबला के ताल में करताल मिलावत,,,
बड़ा ध्यान से सुनत रिहिस तोर पंडवानी ल जमाना,, तही सुत गेय हरि गुन गावत,.,, तीजन बाई तै,गज़ब याद आवत,,कहते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की. कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रुप में उपस्थित राजगामी संपदा की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा साहू ने तीजन की पंडवानी गायन को लोक कला की धरोहर बताया वही दिग्विजय कालेज के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ शंकर मुनि राय ने कहा कि तीजन की पंडवानी देश – विदेश में चर्चित हुई जिससे हमें गर्व की अनुभूति होती है. साहित्य समिति के संरक्षक कवि गिरीश ठक्कर “स्वर्गीय”,व राकेश इंदु भूषण ठाकुर ने तीजन बाई के पंडवानी गायन की कला को सराहते हुए उन्हें पंडवानी की अमर गायिका बताया.
सांस्कृतिक ग्रूप आफ कल्चर महावीर स्मार्ट सिटी फरहद चौक द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम की संयोजिका कवयित्री करिश्मा-अमित ने तीजन बाई की छत्तीसगढ़ी को बहुत मधुर और प्रिय भाषा बताते हुए उसके पंडवानी की मुरीद बताई. कार्यक्रम का संचालन कर रही कवयित्री सुषमा शुक्ला “अंशुमन” ने पद्म श्री तीजन बाई को पुरुष गायको के पंडवानी गायन की परंपरा को तोड़ने वाली संघर्ष शील महिला बताया.
मंच पर जीवंत हो जाते थे पांचों पाण्डव व हस्तिनापुर
साहित्य समिति के सचिव कवि/ कथाकार मानसिंह मौलिक ने बसंतपुर के सुप्रसिद्ध पंडवानी गायक रेवाराम-गणेशराम द्वारा जन बाई को पंडवानी गायन के राजनांदगांव में सबसे पहले मंच देने की बात कही वही समिति के अध्यक्ष अखिलेश मिश्रा “अकाट्य” ने पद्म श्री तीजन बाई को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने पंडवानी कला को अमर कर दिया जिसके गायन के सभी मुरीद थे. रंगधर्मी कवि एवं उद्घोषक गजेंद्र हरिहारणो दीप ने तीजन बाई के पंडवानी गायन से मंच पर पांचों पाण्डव व हस्तिनापुर जीवंत हो जाने की बात कही. इसी तरह वात्सल्य कुटुंब की अध्यक्ष विद्या पांडे ने बताया कि तीजन बाई का अपने तम्बूरे को कभी भीम का गदा, अर्जुन का धनुष-बाण और श्रीकृष्ण की बंशी बना कर अपनी प्रस्तुति से लोगों को आनंदित व आश्चर्यचकित कर देती थी. ग्राम्य कवि आंनदराम सार्वा “अनंत” ने “तै रोवा के चल देयेस तीजन बाई” कहा वही प्रलेसं के प्रभात तिवारी व साकेत के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू अंकुर ने तीजन बाई के संघर्ष शील जीवन पर प्रकाश डाला. सुमधुर गजल कार अनुराग सक्सेना,चक्रधर कत्थक कल्याण केंद्र के डा, कृष्ण कुमार सिन्हा डॉ इकबाल खान “तनहा”,शैलेष गुप्ता, अमलेंदू हाजरा, प्रकाश साहू “वेद”, महेंद्र बघेल “मधु” पवन यादव “पहुंना”, राजकुमार चौधरी “रौना” कवि रिखीराम पटेल ,जीतेंद्र पटेल, दिनेश साहू,रुपल साहू आदि ने पंडवानी गायन को अमर कर देने वाली तीजन बाई को अपनी काव्य प्रस्तुतियों से श्रद्धांजलि अर्पित की.
इस दौरान बड़ी संख्या में कवि साहित्यकारों के अलावा पंडवानी प्रेमी जन व महावीर स्मार्ट सिटी की पंडवानी अनुरागी महिलाएं न गणमान्य नागरिक उपस्थित थे.आभार प्रदर्शन समिति के जिला समन्वयक राकेश इंदु भूषण ठाकुर ने किया. उक्ताशय की जानकारी मीडिया प्रभारी पप्पू पौर्वात्य’कलिहारी द्वारा दी गई.
