मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, सिकल सेल एवं गैर संचारी रोग की पहचान पर किया गया जागरूक

बलरामपुर- कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से सामुदायिक स्वयंसेवकों के लिए स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर एक दिवसीय उन्मुखीकरण कार्यक्रम का आयोजन शासकीय नवीन महाविद्यालय बलरामपुर में किया गया. जिसके माध्यम से समुदाय स्तर पर कार्य कर रहे स्वयंसेवकों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बच्चों में गैर-संचारी रोगों की पहचान, किशोर स्वास्थ्य तथा सामाजिक चुनौतियों से जुड़े विषयों की व्यवहारिक जानकारी प्रदान कर उन्हें स्वास्थ्य जागरूकता के प्रभावी माध्यम के रूप में तैयार किया गया.
जिसमें 55 सामुदायिक स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण के दौरान सिकल सेल रोग (एससीडी), बच्चों में टाइप-1 मधुमेह, जन्मजात हृदय रोग तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तारपूर्वक जानकारी दी. साथ ही जिले में बाल विवाह, किशोरी गर्भावस्था तथा स्कूल छोड़ चुके बच्चों जैसी सामाजिक चुनौतियों पर भी चर्चा करते हुए इनके समाधान में समुदाय की सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया गया.
इस दौरान बताया गया कि बच्चों में बढ़ते गैर-संचारी रोग की रोकथाम के लिए समुदाय स्तर पर कार्यरत स्वयंसेवकों की विशेष भूमिका है. यदि उन्हें रोगों के शुरुआती लक्षणों, समय पर जांच, उपचार एवं रेफरल सेवाओं की सही जानकारी होगी, तो वे जरूरतमंद बच्चों एवं परिवारों को समय रहते स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़कर गंभीर जटिलताओं को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं.
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को टाइप-1 मधुमेह के शुरुआती लक्षणों जैसे अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन कम होना तथा अत्यधिक कमजोरी की पहचान करने की जानकारी दी गई. साथ ही सिकल सेल रोग की समय पर जांच एवं नियमित उपचार, जन्मजात हृदय रोग से प्रभावित बच्चों के शीघ्र रेफरल तथा गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की नियमित स्वास्थ्य जांच एवं देखभाल के महत्व को विस्तार से समझाया गया.
बाल विवाह की रोकथाम के लिए परिवारों को जागरूक करने, इसके दुष्परिणामों से अवगत कराने तथा किशोरी गर्भावस्था के स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों की जानकारी देते हुए स्वयंसेवकों को समाज में जागरूकता बढ़ाने की बात कही गई. स्कूल ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए समुदाय एवं अभिभावकों को प्रेरित करने पर भी चर्चा की गई.
प्रशिक्षण सत्रों में पूर्ण टीकाकरण, संतुलित पोषण, एनीमिया नियंत्रण, संस्थागत प्रसव, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी तथा समुदाय आधारित स्वास्थ्य गतिविधियों को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया.
स्वयंसेवकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों को गति देने, जरूरतमंद परिवारों को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों से जोड़ने, बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित कराने का संकल्प लिया.
