डोंगरगढ़ में बैगा की गिरफ्तारी पर भड़की परिषद
दुर्ग- छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद शाखा दुर्ग की महत्वपूर्ण बैठक गुरूवार को मरोदा सेक्टर में संपन्न हुई. बैठक में मुख्य रूप से देश और प्रदेश में आदिवासियों के खिलाफ बढ़ते उत्पीड़न, विस्थापन और उनकी आस्था पर हो रहे प्रहारों को लेकर गंभीर चर्चा की गई और आक्रोश व्यक्त किया गया.
हल्बा समाजध्यक्ष चंद्रिका रावत ने कहा कि माइनिंग प्रभावित राज्यों में आदिवासियों का जमीनी संघर्ष आज भी लगातार जारी है. सरकार द्वारा लाठीचार्ज और दमन की कार्रवाई की जा रही है. आज स्थिति यह है कि आदिवासियों की पुलिस प्रशासन और कॉर्पोरेट के नुमाइंदों से सीधी भिड़ंत हो रही है.
परिषद की प्रदेश उपाध्यक्ष चंद्रकला तारम ने देश के हालातों पर चिंता जताते हुए कहा कि मणिपुर में आज भी आग लगी हुई है, जहां आदिवासी बेमौत मारे जा रहे हैं. वहां जनजीवन पूरी तरह तबाह हो चुका है और बच्चों की पढ़ाई व भविष्य अंधकार में है. वहीं महिला अध्यक्ष दिनेश्वरी भूआर्य ने जल, जंगल और जमीन की अंधाधुंध कटाई तथा आदिवासियों के लगातार हो रहे विस्थापन का मुद्दा उठाया.
जिलाध्यक्ष चंद्रभान सिंह ठाकुर ने कॉर्पोरेट जगत और पूंजीपतियों पर असंवैधानिक तरीकों से आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि आदिवासियों को ‘डीलिस्टिंग’ के मुद्दे में उलझाकर माइनिंग का खेल खेला जा रहा है.
डोंगरगढ़ मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि वहां एक आदिवासी बैगा की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की आस्था की गिरफ्तारी थी. उन्होंने प्रदेश सरकार से सवाल किया कि सरकार को यह तय करना होगा कि छत्तीसगढ़ का असली मूलनिवासी कौन है—शिकायतकर्ता या फिर सदियों से बलिप्रथा की परंपरा को मानने वाले आदिवासी?
बैठक में ये रहे उपस्थित
बैठक में छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद शाखा दुर्ग जिलाध्यक्ष चंद्रभानसिंह ठाकुर, प्रदेश उपाध्यक्ष चन्द्रकला तारम, प्रदेश महामंत्री जमूना ठाकुर, हल्बा समाजाध्यक्ष चंद्रीका रावत, वरिष्ठ सलाहकार अष्लेश मरावी, पल्लवी ठाकुर, उमा सिंह, महिलाध्यक्ष दिनेश्वरी भूआर्य, भुवनेश्वरी उईके, कोमल नेताम सहित समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे.
