जन सहभागिता से साकार हुआ अमृत सरोवर, 1 माह में बनी मिसाल

3 करोड़ लीटर जल भंडारण क्षमता वाला अमृत सरोवर बनेगा सुरक्षा कवच
बदलेगी गांव की तस्वीर जल और पर्यावरण संरक्षण से मिलेगी नई दिशा
आखिर औरी को अपना तालाब मिलने में क्यों लगे 75 साल?
अमृत सरोवर बना लेकिन छोड़ गया कई सवाल
दुर्ग- पाटन विकासखंड के ग्राम औरी ने जल संरक्षण और जनसहभागिता का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जो आने वाले वर्षों में पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बनेगा. लगभग साढ़े तीन एकड़ क्षेत्र में निर्मित और करीब 3 करोड़ लीटर जल संग्रहण क्षमता वाले अमृत सरोवर का लोकार्पण दुर्ग सांसद विजय बघेल के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ. गांव की नई पहचान बने इस सरोवर ने जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है.
सांसद विजय बघेल ने कहा कि जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की सुरक्षा का माध्यम है. उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य गांवों को जल संपन्न बनाना और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना है. उन्होंने इसे ग्रामवासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने का ऐतिहासिक अवसर बताया.
विशेष बात यह रही कि जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, संचेती फाउंडेशन और एसएमएस लिमिटेड के सहयोग से यह सरोवर महज एक माह के रिकॉर्ड समय में तैयार हुआ. बताया गया कि यदि यही कार्य सामान्य शासकीय प्रक्रिया से कराया जाता तो इसकी लागत ढाई – तीन करोड़ रुपये से अधिक होती.
यह बताना आवश्यक है कि संचेती फांउडेशन ने अपने CSR फंड से SMS लिमिटेड कंपनी द्वारा 3.5 एकड़ जमीन पर अमृत सरोवर तालाब की मजबूत आधारशिला रखी.
इस सरोवर में नहीं भी तो लगभग 2 करोड़ 84 लाख 93 हजार 430 लीटर पानी भरा जाएगा. बताया जा रहा है कि यह क्षमता इतनी है कि गांव वालों की निस्तारी की समस्या के साथ-साथ खेतों की सिंचाई और पशुओं के पीने का साधन उपलब्ध होगा, साथ ही साथ भू-जल का स्तर भी बढ़ेगा और गांव वालों को निश्चित तौर पर पीने के पानी की समस्या भी अप्रत्यक्ष रूप से इस तालाब से पूरी हो सकेगी.
पर्यावरण एवं जल संरक्षण का पूरा हुआ उद्देश्य
इस महत्वपूर्ण सरोवर के लोकार्पण के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वरुण पूजा महायज्ञ का आयोजन किया गया, जिसमें सांसद विजय बघेल ने परिवार सहित क्षेत्र की सुख-समृद्धि और उत्तम वर्षा की कामना की. वहीं “हर आंगन एक पेड़” अभियान के तहत अमृत सरोवर और मुक्तिधाम परिसर में पीपल, बरगद, नीम और आम के पौधे रोपे गए तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया.
पाटन विकासखंड के ग्राम औरी के ग्रामीणों का मानना है कि यह अमृत सरोवर न केवल जल संकट से राहत दिलाएगा, बल्कि गांव के सामाजिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक जीवन का भी केंद्र बनेगा.
75 साल बाद मिला अपना तालाब : आखिर ग्राम औरी को अब तक अमृत सरोवर का इंतजार क्यों करना पड़ा?
पाटन विकासखंड के ग्राम औरी में लगभग 3 करोड़ लीटर जल संग्रहण क्षमता वाले अमृत सरोवर का लोकार्पण भले ही उत्सव का विषय हो, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है—आखिर सैकड़ों परिवारों वाले इस गांव में आजादी के 75 वर्ष बाद तक कोई बड़ा और स्थायी जलस्रोत या तालाब क्यों नहीं बन पाया?
लगभग साढ़े तीन एकड़ क्षेत्र में बने इस अमृत सरोवर ने गांव को नई पहचान दी है. जल संरक्षण, भू-जल स्तर सुधार और सिंचाई की संभावनाओं को देखते हुए ग्रामीणजन इसे ऐतिहासिक पहल मान रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि जिस तालाब की जरूरत आज महसूस की जा रही है, क्या उसकी आवश्यकता दशकों पहले नहीं थी?
कार्यक्रम में सांसद विजय बघेल ने कहा है कि गांव की वर्षों पुरानी मांग अब पूरी हुई है. ऐसे में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि वर्षों तक शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताओं में यह मांग आखिर पीछे क्यों रही. यदि यह कार्य पहले हो जाता तो ग्रामीणों को जल संकट और भू-जल स्तर में गिरावट जैसी समस्याओं से काफी हद तक राहत मिल सकती थी.
ग्रामीणों का मानना है कि अमृत सरोवर केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि यह इस बात का प्रतीक भी है कि गांवों में बुनियादी जल संरचनाओं को समय रहते प्राथमिकता देना कितना जरूरी है. अब जबकि औरी को अपना बड़ा जलाशय मिल गया है, उम्मीद है कि भविष्य में विकास योजनाओं में ऐसी जरूरतों को दशकों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.
वैसे ग्रामीणों का इसे लेकर अपना तर्क था. उन्होंने बताया कि इस गांव में बारहमासी एक नाला है जो यहां के लोगों के निस्तारी की समस्या को दूर करता रहा. इस नाला में स्टॉप डेम भी बना है. दो कुंए है और भी सुविधाएं उपलब्ध हैं. साथ ही साथ गांव में लगभग 50 ट्यूबवेल भी खुदे हुए है जिनसे खेतों की सिंचाई और अन्य काम हो जाता है. बताया गया कि गांव मे 50 पोल्ट्री फार्म भी है और आर्थिक समृद्धि भी कम नहीं है.
गांव को संस्कारों की शिक्षा देता हैं स्वामी आत्मानंद का प्रभाव
ग्राम औरी तीन गांव से मिलकर एक ग्राम पंचायत का स्वरूप ले चुका है इसमें ग्राम बड़े औरी, छोटे औरी और भाटागांव शामिल है इन तीनों ही गांवों को मिलाकर अगर आंकलन करें तो हजार-डेढ़ हजार की जनसंख्या दिखाई देती है, लेकिन इन सबके बीच गांव में कुर्मी समाज का बोल-बाला है. चंद्राकर कुनबे के लोग बड़े दाऊ लोगों में गिने जाते हैं इन्हीं में एक हैं सदाराम चंद्राकर जी जो स्वामी आत्मानंद के करीबी रहे और आज भी उनके बड़े अनुयायी हैं. इसी प्रकार कुछ दाऊ ऐसे भी है जो बड़े कास्तकार हैं, और गांव में पांरपरिक मूल्यों का संरक्षण कर रहे हैं. साहित्यिक पृष्ठभूमि भी मजबूत हैं. यहां के कवि मुरली चंद्राकर मशहूर गीतकार हैं. उनकी कई खिताबे प्रकाशित हो चुकी हैं. मोर जिनगी के नइये ठिकाना लहर गंगा… जैसे गीतों की रचना की.
राजस्व रिकार्ड में कहीं नहीं है ग्राम औरी!
यह भी आश्चर्यजनक तथ्य है कि बड़े औरी की जनसंख्या ग्राम औरी से कम हैं. जहां बड़े औरी की जनसंख्या 450 है वही औरी की जनसंख्या 400 है. दोनों का रकबा देखें तो हजार एकड़ से ज्यादा है. लेकिन विडम्बना देखिए कि राजस्व रिकार्ड में बड़े औरी गांव का कहीं अता-पता नहीं है. इसे मुख्यअतिथि विजय बघेल ने टीपा भी की कि “बड़े औरी हर छोटे होगे अऊ छोटे हर बड़े होगे”. इससे लगता है कि कहीं पाटन विकासखंड का ये चंद्राकर बाहुल्य समृद्ध गांव राज प्रशासन की उपेक्षा का ही शिकार बना रहा. जब इस गांव में इतना बड़ा अमृत सरोवर तालाब का निर्माण हुआ है तो लगता है कि आने वाले दिनों में प्रशासन एवं शासन की देख-रेख में औरी विकास के नए सोपानों को छुएगा और समृद्ध किसान का सपना साकार होगा. भूपेश बघेल हो या विजय बघेल या फिर यहां के कोई और नेता सभी को मिलकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के पाटन राज की समृद्धि के लिए कोशिश करनी होगी.
जनप्रतिनिधियों के लिए आत्म मंथन का अवसर
यह सामान्य तौर पर आत्म मंथन का अवसर उपलब्ध कराता है कि आखिर पाटन विकासखंड से इतने राजनेता पैदा हुए इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से लेकर दो-दो बार के विधायक संसदीय सचिव, सांसद विजय बघेल, पूर्व विधायक कैलाश शर्मा से लेकर दिवंगत पूर्व उपमंत्री अनंतराम वर्मा, पूर्व विधायक केजूराम वर्मा, उदेराम वर्मा जैसे राजनेताओं के बाद भी औरी में तालाब क्यों नहीं बना? यह सवाल सहज ही मन में कौंध उठता है. अमृत सरोवर का निर्माण स्वागतयोग्य और अनुकरणीय पहल है, लेकिन विकास कार्यों का मूल्यांकन केवल उनके उद्घाटन से नहीं, बल्कि इस आधार पर भी होना चाहिए कि वे कितनी देर से पहुंचे. यदि गांव की यह जरूरत वर्षों पहले पूरी हो जाती, तो संभव है कि क्षेत्र को जल संकट और भू-जल गिरावट जैसी चुनौतियों का कम सामना करना पड़ता. सरकार और जनप्रतिनिधियों के लिए यह अवसर आत्ममंथन का भी है कि ग्रामीण बुनियादी आवश्यकताओं को योजनाओं में प्राथमिकता कैसे और कब मिलती है.
अब जरूरत इस बात की है कि इस सरोवर को केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि जल संरक्षण के स्थायी मॉडल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी गांव को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए दशकों तक प्रतीक्षा न करनी पड़े.
सर्वकुर्मी समाज से जुड़े हुए श्री मोरध्वज चंद्राकर बताते हैं कि ग्राम औरी बहुत पुराना गांव है और यहां पर अद्भुत लोक परंपरा देखने को मिलती है. मोरध्वज चंद्राकर के अनुसार इस गांव के संस्कार के उदाहरण पूरे विकासखंड से देखे जा सकते हैं.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद विजय बघेल थे. इस अवसर पर संजय बघेल, जनपद पंचायत पाटन की अध्यक्ष कीर्ति नायक, कमलेश वर्मा, नीलम चंद्राकर, कस्तूरी बंजारे, पवन शर्मा, तृप्ति चंद्राकर, भागचंद जैन, राजा पाठक, राजेश चंद्राकर, कमलेश चंद्राकर, दीपक चंद्राकर, संदीप चंद्राकर तथा ग्राम सरपंच कलेन्द्री मानिकपुरी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं ग्रामीण उपस्थित रहे.
लोकार्पण के उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ वरुण पूजा महायज्ञ संपन्न हुआ. सांसद विजय बघेल अपनी धर्मपत्नी रजनी बघेल, पुत्र सौरभ बघेल, पुत्रवधू पल्लवी बघेल, पुत्री प्रतीक्षा बघेल एवं दामाद अनंत उपाध्याय के साथ यज्ञ में शामिल हुए तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उत्तम वर्षा और जनकल्याण की कामना की.
