खुद के पिता की हत्या के आरोप में भी जेल की हवा खा चुका है मुख्य आरोपी
सक्ती- जिले के प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने जीजा की बेरहमी से हत्या करने वाले साले और उसके दोस्त को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. माननीय न्यायाधीश प्रशांत कुमार शिवहरे ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) सहपठित धारा 3(5) के तहत दोषी पाते हुए उम्रकैद और अर्थदंड से दंडित किया है.
पारिवारिक विवाद और मारपीट बनी हत्या की वजह प्रकरण के अनुसार, मृतक अशोक उर्फ दिलीप चंद्रा का विवाह वर्ष 2011 में ग्राम फरसवानी की ईश्वरी चंद्रा के साथ हुआ था. विवाह के बाद से ही अशोक अपनी पत्नी के साथ अक्सर मारपीट करता था और उसे घर से निकाल देता था. घटना के एक महीने पहले भी पीड़ित पत्नी अपने पति की प्रताड़ना से तंग आकर अपने मायके (फरसवानी) में रह रही थी.
दिनांक 3 मई 2025 की रात करीब 8:00 से 9:00 बजे के बीच, अशोक अपनी ससुराल ग्राम फरसवानी पहुंचा और वहां फिर से अपनी पत्नी के साथ मारपीट करने लगा. अपनी बहन को पिटता देख भाई रामेश्वर चंद्रा का गुस्सा फूट पड़ा. उसने अपने दोस्त सीलाराम कहरा के साथ मिलकर अशोक को पकड़ा और उसे गांव के ही ‘अमरईया खार’ (खेत) में ले गए. वहां दोनों ने बेल्ट और नीम के पेड़ के सोंटे (डंडे) से अशोक की बेरहमी से पिटाई कर दी. गंभीर हालत में अशोक को डभरा अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.
मर्ग जांच से खुला हत्या का राज, कोर्ट में सिद्ध हुआ अपराध सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डभरा के वार्ड बॉय मनहरणलाल पटेल की सूचना पर थाना डभरा में मर्ग क्रमांक 30/2025 दर्ज किया गया था. पुलिस की मर्ग जांच और विवेचना के बाद आरोपियों के खिलाफ धारा 103(1), 3(5) भान्यासं के तहत अपराध क्रमांक 138/2025 दर्ज किया गया. पुलिस ने आरोपियों के मेमोरेण्डम कथन के आधार पर हत्या में इस्तेमाल बेल्ट और नीम का सोंटा जब्त किया.
23 गवाहों की गवाही और पुराना आपराधिक रिकॉर्ड
डभरा पुलिस ने पुख्ता सबूतों के साथ चालान न्यायालय में पेश किया. अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए कोर्ट में 23 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. संपूर्ण साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर न्यायालय ने 15 मई 2026 को अंतिम फैसला सुनाया. कोर्ट ने दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई. अर्थदंड न पटाने की स्थिति में आरोपियों को 6-6 महीने की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी. चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई कि मुख्य आरोपी रामेश्वर चंद्रा इससे पहले अपने खुद के पिता की हत्या के आरोप में भी जेल की हवा खा चुका है.
