रायपुर भारतीय जनता पार्टी की राजनीति में यदि किसी नेता ने अपने जनसंपर्क, संगठन क्षमता और लगातार जनसेवा के दम पर विशेष पहचान बनाई है, तो वह नाम है बृजमोहन अग्रवाल। पक्ष हो या विपक्ष या फिर प्रशासनिक दायरा, हर जगह ‘मोहन भैया’ के नाम से अपनी अलग पहचान बनाने वाले बृजमोहन अग्रवाल ने के पास जाने कौन सा गीता मन्त्र है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में कभी फेल नहीं हुए और आज भी छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लेकर देश की राजधानी नई दिल्ली तक के राजनैतिक गलियारे में उनकी धमक बनी हुई है और वे लोकसभा में छत्तीसगढ़ के लोगों की आवाज मुखरित करने में पूरी शिद्दत के साथ लगे हुए हैं.1 मई को उनका जन्मदिन केवल एक राजनीतिक अवसर नहीं, बल्कि उनके लंबे सार्वजनिक जीवन, संघर्ष और जनविश्वास का उत्सव बन जाता है.लगातार जनता के बीच सक्रिय रहने वाले कद्दावर एवं भरोसेमंद नेता बृजमोहन अग्रवाल को छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे प्रभावशाली “पॉलिटिकल मैनेजर” माना जाता है. पार्टी और संगठन जब भी कठिन परिस्थितियों में रहे, तब उन्होंने अपनी रणनीति, अनुभव और नेतृत्व क्षमता से संगठन को मजबूती प्रदान की। यही कारण है कि वे आज भी जनता और कार्यकर्ताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं.
छात्र राजनीति से जननेता बनने तक
1 मई 1959 को रायपुर में जन्मे बृजमोहन अग्रवाल ने कम उम्र से ही सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में रुचि लेना शुरू कर दिया था. मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता ग्रहण कर छात्र राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई.वर्ष 1981 और 1982 में वे छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए.इसी दौरान उनके नेतृत्व कौशल और संगठन क्षमता की पहचान बनने लगी.वर्ष 1984 में वे भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा.
सबसे युवा विधायक से लोकप्रिय मंत्री तक
वर्ष 1990 में वे पहली बार मध्यप्रदेश विधानसभा के लिए विधायक चुने गए.उस समय वे राज्य के सबसे युवा विधायकों में शामिल थे.इसके बाद उन्होंने लगातार चुनाव जीतकर जनता के बीच अपनी मजबूत पकड़ साबित की.
1993, 1998, 2003, 2008 और 2013 में भी वे विधायक निर्वाचित हुए.मध्यप्रदेश के विभाजन से पहले भी उन्होंने मंत्री पद की जिम्मेदारी निभाई। बाद में छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात रमन सिंह सरकार में उन्होंने कृषि, सिंचाई एवं जल संसाधन, पशुपालन, मछली पालन, बायोटेक्नोलॉजी और धार्मिक ट्रस्ट जैसे महत्वपूर्ण विभागों का सफल नेतृत्व किया.
विकास और जनसंपर्क की राजनीति
बृजमोहन अग्रवाल की सबसे बड़ी विशेषता उनका जनता से सीधा जुड़ाव माना जाता है. वे केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में भी निरंतर सक्रिय रहे हैं.रायपुर और आसपास के क्षेत्रों में सड़क, सिंचाई, शिक्षा, धार्मिक स्थलों के विकास तथा किसानों से जुड़े मुद्दों पर उनकी सक्रियता ने उन्हें जनप्रिय नेता बनाया.उनकी कार्यशैली में प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक संतुलन स्पष्ट दिखाई देता है.
संगठन के संकटमोचक
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बृजमोहन अग्रवाल केवल जननेता ही नहीं, बल्कि संगठन के कुशल रणनीतिकार भी हैं.पार्टी के कठिन दौर में कार्यकर्ताओं को एकजुट रखना और चुनावी रणनीति तैयार करना उनकी बड़ी ताकत रही है.
उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि दशकों से वे लगातार जनता का विश्वास जीतते आ रहे हैं.यही कारण है कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनका नाम एक मजबूत और प्रभावशाली नेता के रूप में लिया जाता है.
सम्मान और उपलब्धियाँ
बृजमोहन अग्रवाल को मध्यप्रदेश विधानसभा द्वारा “सर्वश्रेष्ठ विधायक” सम्मान भी प्राप्त हो चुका है.उन्होंने एम.कॉम के साथ रायपुर के दुर्गा महाविद्यालय से एलएलबी की शिक्षा प्राप्त की.
जनसेवा के सफर को सलाम
अपने लंबे राजनीतिक जीवन में बृजमोहन अग्रवाल ने संगठन, सरकार और समाज — तीनों क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है.उनका जीवन संघर्ष, अनुशासन और जनसेवा का उदाहरण माना जाता है.उनके जन्मदिन के अवसर पर समर्थक और कार्यकर्ता न केवल उन्हें शुभकामनाएँ देते हैं. बल्कि उनके योगदान को भी याद करते हैं.छत्तीसगढ़ की राजनीति में उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का विषय बना रहेगा.
