छत्तीसगढ़ में अनियमित कर्मचारियों की अनदेखी का आरोप, “एक हस्ताक्षर–मुख्यमंत्री के नाम” अभियान शुरू
रायपुर- छत्तीसगढ़ में शासकीय कार्यालयों में कार्यरत अनियमित कर्मचारी— जैसे-आउटसोर्सिंग (प्लेसमेंट), सेवा प्रदाता, ठेका, समूह/समिति के माध्यम से नियोजन, जॉबदर, संविदा, दैनिक वेतनभोगी, कलेक्टर दर, श्रमायुक्त दर पर कार्यरत श्रमिक, मानदेय, अशंकालिक ने राज्य सरकार पर उनकी समस्याओं की अनदेखी करने का आरोप लगाया है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार के ढाई वर्षों के कार्यकाल में उनके नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और अन्य मांगों को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई है.
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई विभागों में वेतन लंबित है, संविदा कर्मियों को निर्धारित वेतन नहीं मिल रहा है, और न्यूनतम वेतन में लंबे समय से कोई वृद्धि नहीं हुई है. साथ ही कुछ स्थानों पर छंटनी की कार्रवाई भी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है.
छत्तीसगढ़ प्रगतिशील अनियमित कर्मचारी फेडरेशन ने अपनी मांगों को लेकर “एक हस्ताक्षर–मुख्यमंत्री के नाम” अभियान शुरू किया है, जो 10 से 30 अप्रैल तक चलेगा. इस अभियान के तहत कर्मचारी अपने-अपने विभागों से मुख्यमंत्री को ईमेल भेजकर अपनी समस्याएं और मांगें रखेंगे.
कर्मचारियों का आरोप है कि बीजेपी जब विपक्ष में थे तो उनके अनेक वरिष्ठ नेता/जनप्रतिनिधियों ने हमारे मंच में आकर हमारी समस्याओं को सुना एवं अनियमित कर्मचारियों की समस्याओं को भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने पर इनका यथाशीघ्र निराकरण करने की बात कही थी तथा छत्तीसगढ़ के लिए मोदी की गारंटी 2023 पत्र के “वचनबद्ध सुशासन” अंतर्गत बिंदु क्र. 2 में एक कमिटी गठित कर कमेटी में अनियमित कर्मचारियों को सम्मिलित करते हुए समीक्षात्मक प्रक्रिया प्रारंभ करने का उल्लेख किया है, लेकिन कमेटी गठन आदेश में अनियमित कर्मचारियों का कोई उल्लेख नहीं है.
संघ ने सभी अनियमित कर्मचारियों से इस अभियान में शामिल होकर अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने की अपील की है.
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों
1. अनियमित कर्मचारियों का नियमितीकरण/स्थायीकरण किया जावे.
2. कार्य से पृथक कर्मचारियों को बहाल किया जावे.
3. अत्यंत कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन दिया जावे.
4. अंशकालीन कर्मचारियों को पूर्णकालीन किया जावे.
5. आउट सोर्सिंग/ठेका/सेवा प्रदाता/समूह/समिति के माध्यम से नियोजन बंद किया जावे.
