गरियाबंद : गरियाबंद जिले के पंटोरा की पैरी नदी में एक मछुआरे को डेविल फिश मिली है. इस मछली की चार आंखें होती हैं. इनका असली घर भारत की नदियां नहीं हैं. यह मछली भारत से हजारों किलोमीटर दूर दक्षिण अमेरिका की अमेजन नदी में पाई जाती है. जानकारों का कहना है कि यह मछली पूरी तरह मांसाहारी होती है. इस मछली का वैज्ञानिक नाम है हाइपोस्टोमस प्लेकोस्टोमस के अंतर्गत आता है. इसे मछली चूसने वाली शैवाल, कांच साफ करने, पत्थर चूसने, कांच चूसने के नाम से भी जाना जाता है.

इसका शरीर हल्के भूरे रंग का होता है जिसमें कुछ गोल, काले धब्बे होते हैं. सिर पर भी काले धब्बे हैं. प्रजातियों के आधार पर, कुछ नमूने ऐसे होते हैं जिनका पूरे शरीर पर गहरा रंग होता है. डेविल फिश में पानी से बाहर लंबे समय तक रहने की क्षमता होती है. ये मछलियां 14 घंटे तक पानी से बाहर रह सकते हैं.
एक्सपर्ट का मानना है कि भारत में इन मछलियों का मिलना ठीक नहीं हैं. एक्सपर्ट के मुताबिक इस मछली का मिलना नदी के इकोसिस्टम के लिए भी चिंताजनक है. यह मछली आसपास के जीव-जंतुओं को खाकर जिंदा रहती है. यह अपने पास किसी दूसरे जीव या मछली को जिंदा नहीं रहने देती. दूसरे के लिए यह खतरनाक तो है ही साथ ही मार्केट में इस फिश की कोई वैल्यू भी नहीं है. इसे लोग खाना पसंद नहीं करते और खाने से डरते हैं. यह मछली बिल्कुल बेस्वाद होती है. इसमें एयरोप्लेन के आकार के पंख दिखाई पड़ते हैं. आमतौर पर मछलियों का आकार ऐसा नहीं होता है.
