कोरबा : हसदेव नदी पर मड़वारानी एनीकट का निर्माण अब खनिज न्यास की जगह जल संसाधन करेगा. इससे क्षेत्र के 17 गांव में पेयजल की आपूर्ति की जाएगी. शासन ने निर्माण कार्य को मूर्त रूप देने के लिए जल संसाधन विभाग से प्राक्कलन मांगा है. 37 करोड़ की लागत से तैयार होने वाली कार्य योजना तैयार कर शासन को भेज दिया है. राशि मिलते ही कार्य शुरू हो जाएगा. चार साल पहले यह प्रस्ताव तैयार किया गया था.

मडवारानी पहाड़ के निकट तैयार होने वाले एनीकट निर्माण में गति के आसार बढ़ गए हैं. शासन ने इसे बजट में पहले ही शामिल कर लिया था, लेकिन अब प्रशासकीय स्वीकृति के लिए जल संसाधन विभाग ने निर्माण कार्य की जानकारी मांगी है. बताना होगा कि मड़वारानी पहाड़ सहित आसपास के गांवों में जल आपूर्ति को सुलभ बनाने के लिए तात्कालिक सांसद स्वर्गीय बंशीलाल महतो ने कार्य योजना तैयार कराई थी.
यह कार्य जिला खनिज न्यास से पूरा होना था. तय समय पर राशि स्वीकृति नहीं होने से यह योजना अंततः निरस्त हो गई. अब जल संससाधन ने इसे विभागीय मद से पूरा कराने का निर्णय लिया है. तैयार प्राक्कलन के अनुसार 340 मीटर लंबा और 4.30 मीटर चौड़ा इस एनीकट की ऊंचाई 3.50 मीटर ऊंची होगी. पहाड़ के आसपास बसे ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिगत जल कमजोर होने की वजह से नदी से जल आपूर्ति की आवश्यकता महसूस की जा रही है. शहर के गेरवाघाट में सर्वेश्वर के बाद हसदेव नदी में तैयार होने वाला यह दूसरा बड़ा एनीकट होगा. बताना होगा कि सर्वेश्वर एनीकट का निर्माण निगम क्षेत्र के 23 वार्डों को पानी आपूर्ति के लिए किया गया है. नदी में दो एनीकट के अस्तित्व में आने से वर्षा जल का संरक्षण होगा.
पहाड़ के ऊपर मंदिर तक पहुंचेगा पानी
एनीकट निर्माण की जिम्मेदारी जल संसाधन की होगी. फिल्टर प्लांट से 17 गांव में पानी पहुंचाने के लिए प्राक्कलन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी ने पहले ही तैयार कर लिया है. योजना के तहत गांव में ही नहीं बल्कि पहाड़ के ऊपर भी पानी पहुंचाई जाएगी. जल आपूर्ति सुनिश्चित होने से मड़वारानी मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए सुविधा होगी. पहाड़ के ऊपर जल पहुंचाने के लिए पिरामिड पद्धति से पानी संग्रहण टैंक बनाया जाएगा. इससे ऊपरी छोर तक पानी पहुंचाने में आसानी होगी.
एनीकट के अस्तित्व में आने से कनकी से चांपा की दूरी 22 किलोमीटर घट जाएगी. वर्तमान में मड़वारानी चांपा मार्ग पहुंचने के लिए लोगों को उरगा मार्ग से पहुंचना होता है. विभागीय अधिकारी की माने तो एनीकट से दो पहिया व चार पहिया वाहनों के आवागन की अनुमति होगी. सामान्य आवागन के लिहाज से एनीकट की ऊंचाई तय की गई है. खासबात यह है कि एनीकट कनकेश्वर धाम के निकट होगा इसलिए आसपास के ग्रामीणों को जलापूर्ति हो सकेगी. साथ ही निस्तारी की सुविधा भी उन्हे मिलेगी.
एनीकट से नदी में चल रहे अवैध रेतघाट बंद हो जाएगें. स्वीकृति नहीं होने के बाद भी भादा, तरदा व भैंसामुड़ा के आसपास खासी संख्या में अवैध रेतघाट का संचालन हो रहा है. प्रशासन को खनिज राजस्व की चपत लग रही है. साथ ही पर्यावरण नियमों की भी अवहेलना हो रही है. एनीकट बनने से नदी में तीन किलोमीटर तक जल भराव रहेगा. इससे नदी कछार योजना के तहत तट से लगे आसपास के गांव के किसानों को लाभ मिलेगा. उद्यानिकी और जिला कृषि विभाग की ओर से संचालित योजनाओं से भी किसान जुड़ सकेंगे.
इन गांवों में पहुंचेगा पानी
एनीकट निर्माण से जिन गांवों में पेय जल की सुविधा मिलेगी उनमें महोरा, देवलापाठ, बगधर, चिचोली, कछोरा, गितारी, बीर तराई, संडैल, भैंसामुड़ा, ढनढनी, जोगीपाली, कनकी, बैगपाली, भादा तरदा शामिल हैं.
मड़वारानी एनीकट को बजट में शामिल किया जा चुका है. निर्माण को मूर्त रूप देने के लिए प्राक्कलन तैयार कर शासन को भेजा गया है. एनीकट के अस्तित्व में आने से 17 गांवों में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चत होगी. साथ ही पहाड़ उपर पानी पहुंचाने में सहूलियत होगी.
