पार्ट- 02
आयुक्त की भूमिका संदिग्ध
पार्षदों में भारी आक्रोश का माहौल
ठेके की पारदर्शिता को लेकर उठ रहे गंभीर सवाल
रिसाली नगर निगम में विकास कार्यों को लेकर कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है. महापौर से लेकर एमआईसी और पार्षदों तक असंतोष और आक्रोश का माहौल है. वे लोग टेंडर प्रक्रिया और कार्यआदेश को लेकर सवाल उठा रहे हैं और शासन से लेकर प्रशासन तक जाने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन सवाल है कि इतने बड़े भ्रष्टाचार और घोटाले पर पर्दा डालने वाले जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी? प्रदेश में पारदर्शी सरकार की बात कही जा रही है लेकिन उसी के संरक्षण में इस प्रकार का भ्रष्ट और घिनौना खेल भला कौन बर्दाश्त करेगा?
हालिया मामला 12 करोड़ के टेंडर से जुड़ा है जिसमें रिसाली नगर निगम के 33 वार्डों में सफाई कार्यों के लिए चहेते ठेकेदार को नियम-कायदे को ताक पर रखकर ठेका दिया गया है. और तो और बड़ी और गंभीर बात यह है कि ठेका कंपनी एलमेक की वैधानिकता को लेकर भी अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं. सबसे पहले तो एलमेक टेक्नोक्रेट्स कंपनी का दस्तावेज ही संदिग्ध है. दस्तावेजों के मुताबिक इस कंपनी का पीएफ में नाम एलीमेक(Eleemech) है जबकि ईएसआई में एलमेक(Elemch) दर्ज है. शपथपत्र में ईपीएफ और ईएसआई मार्कावाली मुख्य कंपनी के नाम से पीएफ और ईएसआई का नाम मिलान नहीं करता है. यह संदिग्ध है. कंपनी का ऑडिट रिपोर्ट भी बेहद संदेह के दायरे में है क्योंकि दो वर्ष का ऑडिट एक ही बार कराकर दे दिया गया है जबकि यह अलग-अलग वर्षों में अलग-अलग होना चाहिए. ऑडिट रिपोर्ट 31 मार्च 2022 का यूडीआईएएन (UDIAN) ही नहीं है. जो कि वैध ऑडिट रिपोर्ट माना ही नहीं जा सकता है. ऑडिट रिपोर्ट 31 मार्च 2021 का भी यूडीआईएएन (UDIAN) नहीं है इसलिए इसे भी वैध नहीं माना जा सकता और ऑडिट रिपोर्ट का थ्री सीडी (3 CD) भी जमा नहीं किया गया, यह भी गलत है. बताया जा रहा है कि ऐसा ऑडिट रिपोर्ट गलत और फेक माना जाता है क्योंकि सीए के विधि विधान के अनुरूप यह ऑडिट रिपोर्ट नहीं है. यह भी जानकारी आ रही है कि कंपनी का जो इनकम टैक्स रिपोर्ट (ITR) वित्तीय वर्ष 2022-23 और 2023-24 का नहीं है. आईटीआर में वित्तीय इनकम नहीं दिखाया गया है. यह भी एक गंभीर त्रुटि है.
एलमेक कंपनी के नाम के साथ ऑडिट रिपोर्ट आईटीआर फाइल से लेकर अनेक विसंगतियां यह दर्शाती हैं कि यह कंपनी फर्जीवाड़ा को जन्म देने वाली है. जिसका काम केवल काली कमाई करना. अधिकारियों की शह पर यह ठेका कंपनी किस तरह से गलत काम करती है यह जांच के बाद ही उजागर हो सकती है.
भारतीय सिक्यूरिटी सर्विस कंपनी का भी संदिग्ध मामला
बताया जा रहा है कि एलमेक के साथ ही भारतीय सिक्यूरिटी सर्विस कंपनी ने भी हिस्सा लिया था. यह कंपनी भी एलमेक का ही सहायक कंपनी की तरह बताई जा रही है. दोनों ने मिलकर ठेके में गड़बड़ी का खेल खेला है. भारतीय सिक्यूरिटी सर्विस कंपनी के बारे में पता चला है कि PWD में पंजीयन तक नहीं है. गंभीर तो यह है कि आधार में नाम मीना पटले (Meena Patle) लिखा है जबकि कंपनी के जीएसटी दस्तावेज में मीना पटेल (Meena Patel) इस प्रकार यह गंभीर त्रुटि है. क्या इसे अधिकारी और जिम्मेदार लोग नहीं देखते कि पीएफ रजिस्ट्रेशन और चालान में नाम भारतीय सिक्यूरिटी सर्विसेस है. जो कि फर्म के नाम से मिलान ही नहीं करता.
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय सीमा में पूर्ण करने हेतु पार्षदों का दबाव
कुछ पार्षदों ने कमिश्नर से मिलकर अपनी बात भी रखी जिसमें वार्ड क्रमांक 1 से 40 तक की स्वच्छता सेवाओं हेतु नवीन पारदर्शी प्रक्रिया समय सीमा में पूर्ण करने हेतु मांग की गई है. जिसमें कहा गया है कि नगर पालिक निगम रिसाली के समस्त 40 वार्डों (ग्रुप 01 से 04) में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन एवं अन्य सफाई कार्यों हेतु वर्तमान ठेकेदार (मेसर्स एलमेक टेक्नोक्रेट्स) को पूर्व में दी गई अनुबंध अवधि समाप्त होने के पश्चात 02 माह की अल्पकालिक समयवृद्धि (Extension) दी गई थी. उक्त विस्तार की अवधि भी अब शीघ्र ही समाप्त होने की कगार पर है. इस मामले में स्वच्छता का अधिकार छत्तीसगढ़ नगरपालिका निगम अधिनियम, 1956 की धारा 66 (अनिवार्य कर्तव्य) के तहत नगर निगम क्षेत्र में निरंतर सफाई सुनिश्चित करना निगम प्रशासन का वैधानिक उत्तरदायित्व है. यदि वर्तमान 02 माह का एक्सटेंशन समाप्त होने से पूर्व आगामी वर्ष (2026-27) हेतु नई निविदा प्रक्रिया पूर्ण नहीं की जाती है, तो पूरे रिसाली क्षेत्र में सफाई व्यवस्था ठप्प हो सकती है, जिससे महामारी या जन-स्वास्थ्य का संकट उत्पन्न होने की आशंका है. पारदर्शिता, विधिक प्रक्रिया एवं निविदा प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम तथा अधिनियम की धारा 73 एवं 74 का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है. इसके लिए प्रस्ताव को अविलंब सलाहकार समिति, महापौर परिषद (MIC) एवं सामान्य सभा (General Body) में चर्चा हेतु प्रस्तुत किया जाना चाहिए. लेकिन गंभीर सवाल यह है कि बार-बार सामान्य सभा और एमआईसी को गुमराह करके एक ही ठेका कंपनी को बार-बार उपकृत करने की कोशिश क्यों की जा रही है जबकि अन्य बहुत सी कंपनियां पहले से काम के इंतजार में बैठे है.
नियमों की अवहेलना की गई!
इस मामले में सामान्य सभा के साथ ही साथ मेयर इन काउंसिल को भी गुमराह करने की भी साजिश की गई. 07 जनवरी 2026 की बैठक की कार्यवाही विवरण देखें तो स्पष्ट होता है कि ग्रुप 1 से 4 प्रस्ताव सीरियल क्रमांक 12,13,14,15 में वर्तमान में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन सिवरेज एवं अन्य सफाई कार्य हेतु वित्तीय वर्ष 2025-26 में निविदा की कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने के कारण आगामी निविदा के कार्यादेश होने तक वर्तमान में कार्यरत् एजेंसी मेसर्स एलमेक टेक्नोक्रेट्स से पूर्व स्वीकृत दर पर कार्य कराए जाने की अनुमति हेतु प्रकरण एमआईसी के समक्ष विचारार्थ प्रस्तुत किया गया.
उच्चस्तरीय शिकायत की तैयारी
उपरोक्त मामले की शिकायत उच्चस्तर पर किए जाने की तैयारी एमआईसी के कुछ सदस्यों ने कर ली है. दस्तावेजी सबूत के अनुसार रिसाली नगर निगम में मेसर्स एलमेक टेक्नोक्रेट्स का काम ठीक नहीं है. खासकर विगत वर्ष लगभग 1 वर्ष की सफाई कार्य का ठेका उक्त कंपनी को दिया गया था जो 15 जनवरी 2026 को समाप्त हो गया. एक वर्षीय ठेका समाप्त होने के पश्चात् नियमानुसार नवीन निविदा आमंत्रित नहीं किया गया बल्कि निविदा प्रक्रिया पूर्ण करने हेतु एमआईसी के माध्यम से केवल दो माह के अस्थायी विस्तार की स्वीकृति प्रदान की गई. जिसमें स्पष्ट उल्लेख है कि केवल दो माह तक की समय वृद्धि किए जाने तथा नए निविदा प्रक्रिया प्रारंभ किया जाए. 1 माह के भीतर प्रक्रिया संपन्न नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी पर कार्रवाही किए जाने का प्रस्ताव एमआईसी ने पास किया था. इसके बावजूद आयुक्त द्वारा वर्क ऑर्डर में अनुबंध की अवधि का कोई उल्लेख नहीं किया गया. जो कि स्पष्ट रूप से छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 58 एवं 69 के अंतर्गत एमआईसी के निर्णयों को बाध्यकारी मानने जैसे प्रावधानों का उल्लंघन है. यह भी गंभीर तथ्य है कि अधकचरा अनुभव एवं दस्तावेजों के आधार पर ही पात्रता अर्जित कर विगत वर्ष का ठेका तथा वर्तमान रनिंग टेंडर प्राप्त किया गया जिससे यह स्पष्ट होता है कि संबंधित अधिकारियों एवं फर्म के मध्य आपसी साठ-गांठ के माध्यम से एक ही ठेकेदार को बार-बार अनुचित लाभ पहुंचाया जा रहा है.

आयुक्त से संपर्क नहीं हो सका, कॉल नहीं उठाया
मामले को लेकर नगर निगम आयुक्त मोनिका वर्मा से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी. कॉल किए जाने के बावजूद उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया. ऐसे में इस संबंध में उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया.

सफाई व्यवस्था के टेंडर में देरी, एमआईसी के निर्णय के बाद भी प्रक्रिया लंबित : महापौर
महापौर एवं एमआईसी सदस्यों द्वारा पारित दो महीने की समयवृद्धि के बावजूद नगर निगम की टेंडर प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है. एमआईसी ने जनहित और सफाई व्यवस्था से जुड़े मामले में समयवृद्धि संकल्प पारित किया था और टेंडर प्रक्रिया में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई का आदेश भी जारी किया गया था. हालांकि, दो महीने बीत जाने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया संपन्न नहीं हुई. आयुक्त द्वारा जारी वर्क ऑर्डर में समय सीमा का उल्लेख नहीं किया गया, जिससे प्रशासन में आशंका जताई जा रही है कि शड्यंत्र रचा गया.
