निशा परगनिहा का हुआ सम्मान
भिलाई- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 8 मार्च को सेक्टर-2 स्थित शक्ति सदन भिलाई में मातृ शक्ति संगठन, अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन, लोइमू और ऐक्टू भिलाई के संयुक्त तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ महतारी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ की गई.
इस अवसर पर विशेष रूप से आमंत्रित निशा परगनिहा का गुलदस्ता भेंट कर सम्मान किया गया. आयोजकों ने बताया कि निशा परगनिहा शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और उनके शरीर में 100 से अधिक फ्रैक्चर हो चुके हैं. इसके बावजूद वे किसी पर आर्थिक बोझ बनने के बजाय बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर आत्मनिर्भर जीवन जी रही हैं. उनके आत्मसम्मान और संघर्ष को देखते हुए उन्हें सम्मानित किया गया.

कार्यक्रम में वक्ताओं ने महिलाओं के संघर्ष और बलिदान को याद करते हुए बताया कि 1908 में न्यूयॉर्क में 15 हजार महिलाओं ने काम के घंटे कम करने, बेहतर वेतन, समान अधिकार और मतदान के अधिकार की मांग को लेकर मार्च निकाला था, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत हुई.
वक्ताओं ने कहा कि संघर्षों से मिले अधिकारों को मजबूत करने के बजाय आज फिर से महिलाओं को पुराने सामाजिक बंधनों में धकेलने की कोशिश हो रही है. आंगनबाड़ी, स्कीम वर्कर्स और सफाई कर्मचारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं कार्यरत हैं, लेकिन उन्हें अब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा और सम्मानजनक वेतन नहीं दिया गया है.
मुख्य वक्ता डॉ. सियाराम शर्मा ने मातृसत्तात्मक समाज से लेकर वर्तमान पितृसत्तात्मक समाज व्यवस्था तक के इतिहास पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में महिलाओं पर कई तरह की पाबंदियां थीं, जैसे सती प्रथा, विधवा विवाह पर रोक, संपत्ति और शिक्षा के अधिकार से वंचित रखना आदि. आज समाज को सभ्य कहा जाता है, लेकिन उच्च पदों पर पहुंचने के बाद भी महिलाओं को पुरुषवादी मानसिकता का सामना करना पड़ता है.
कार्यक्रम में चार श्रम कोड वापस लेने, स्कीम वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने, महिलाओं के लिए शिक्षा-स्वास्थ्य और रोजगार की बेहतर व्यवस्था करने सहित कई मुद्दों को उठाया गया.
इस अवसर पर नीरा डहरिया, नोमिन साहू, स्वर्णलता चौरसिया, नीता लोधी, शिखा रायसिंग, सीमा रानी साहू, पुष्पा यादव, तुलसी निषाद, बृजेन्द्र तिवारी, अंजू साहू, साधना सिंह, अश्विनी चौधरी, निशा परगनिहा, बशीर खान, शशी सिन्हा, मुक्तानंद साहू, रिमशा और ज्ञानू मैत्री सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे. कार्यक्रम में अंजू जांगड़े, माधुरी अहिरवार, निर्मला चतुर्वेदी, कनकलता नाग, रेणुका, उमासिंग, अभिषेक यादव और सुरेन्द्र मोहंती का विशेष योगदान रहा. स्वागत भाषण शारदा रामटेके ने दिया, जबकि मंच संचालन ममता वर्मा और आभार प्रदर्शन राजेन्द्र परगनिहा ने किया.
