बजट विकास का रोडमैप नहीं बल्कि निराशा का दस्तावेज : अशोक फड़नवीस
राजनांदगांव- प्रदेश की साय सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक फड़नवीस ने जनता के साथ खुला छलावा करार दिया है. उन्होंने कहा कि यह बजट आम जनता की बुनियादी जरूरतों से पूरी तरह कटा हुआ है और इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य तथा बेरोजगार युवाओं के लिए कोई ठोस रोडमैप नजर नहीं आता.
श्री फड़नवीस ने आरोप लगाया कि सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की अनदेखी की है. उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति सुधारने के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया. अस्पतालों में डॉक्टरों और दवाइयों की कमी दूर करने को लेकर बजट में स्पष्ट योजना नहीं है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया. उन्होंने कहा कि जब प्रदेश की जनता बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद कर रही थी, तब सरकार ने आंकड़ों का पुलिंदा पेश कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया.
उन्होंने ने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार की तलाश में भटक रहा है, लेकिन बजट में रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस कार्ययोजना नहीं दिखाई देती. सरकार ने रोजगार के नाम पर केवल घोषणाएं की हैं ज़मीनी स्तर पर युवाओं को राहत देने की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है. श्री फड़नवीस ने बजट में शराब नीति को लेकर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में शराब दुकानों से भारी राजस्व वसूला जा रहा है. एक शराब दुकान से ही 20 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हो जाती है. वहीं नशा मुक्ति अभियान के लिए मात्र 20 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. उन्होंने इसे ऊंट के मुंह में जीरा बताते हुए कहा कि सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए शराब बिक्री पर निर्भर है, लेकिन नशा मुक्ति के प्रति गंभीर नहीं है. श्री फड़नवीस ने कहा कि महंगाई से जूझ रही जनता को राहत देने के बजाय सरकार ने प्रचार-प्रसार पर अधिक ध्यान दिया है. उनके अनुसार किसान, मजदूर और महिलाओं के लिए ठोस आर्थिक राहत नहीं है. मध्यम वर्ग को टैक्स और महंगाई से कोई बड़ी राहत नहीं मिली. योजनाएं कागजों तक सीमित हैं जमीनी असर दिखाई नहीं देता. आगे उन्होंने कहा कि यह बजट विकास का रोडमैप नहीं बल्कि निराशा का दस्तावेज है. सरकार ने जनता की उम्मीदों को तोड़ा है और आने वाले समय में प्रदेश की जनता इसका जवाब देगी. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी जनहित के मुद्दों पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष को और तेज करेगी.
