चढ़ावे के नाम पर लूट पर कांग्रेस ने की भाजपा की खिंचाई

राजनांदगांव – प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर रायपुर के महापौर प्रमोद दुबे ने प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता आयोजित कर बताया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक हैं. देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए. भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशकों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की, देश के गरीब व मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की. आज वही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ावा आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया? यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है. यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है.
भाजपा राम द्रोही है, उसने पहले चंदा में हेराफेरी करवाया अब चढावा में चोरी. भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण के समय रामशिला पूजन के नाम से जो 14000 करोड़ रू. से अधिक राशि एकत्रित हुआ था. उसका जवाब आरएसएस एवं भाजपा के लोग नहीं दे पाये. उनके ही सहयोगी नेताओं ने ही राम मंदिर निर्माण के समय एकत्रित किये चंदे का आरोप लगाया था. जिन लोगों ने मंदिर बनाने के नाम पर चंदा में हेराफेरी किया था वही लोग मंदिर बनने के बाद चढ़ावे में हेराफेरी करने लगे, इन सबकी पृष्ठ भूमि आरएसएस और भाजपा की रही है. कहा जा सकता है इन घोटालों को आरएसएस भाजपा का संरक्षण रहा है. भाजपा ने देवद्रव्य चोरी करने के महापाप का संरक्षण किया है. राम मंदिर न्यास ट्रस्ट का गठन गृहमंत्री अमित शाह ने किया था इसलिए वहां पर घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी मोदी और शाह की बनती है.
प्रेस वार्ता में उपस्थित शहर कांग्रेस अध्यक्ष जीतू मुदलियार, जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष विपिन यादव, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता किसन खंडेलवाल कुतुबुद्दीन सोलंकी, मेहुल मारु, कांग्रेस नेत्री विभा साहू आदि की उपस्थिति में पूर्व महापौर ने कहा कि कांग्रेस ने इस चंदा चोरी मामले में तीन बड़े सवाल उठाए हैं जिनमें जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा? अगर सब कुछ ठीक था, तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?
और अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है? अब तक सामने आए तथ्य अत्यंत गंभीर हैं. साथ ही कहा गया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्र के इस्तीफे स्वीकार किए जा चुके हैं. यह स्वयं इस बात का संकेत है कि मामला सामान्य प्रशासनिक त्रुटि का नहीं, बल्कि एक बड़े घोटाले का है . ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने स्वयं सार्वजनिक रूप से बयान दिए हैं, जबकि ट्रस्ट की वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और संपत्तियों की सुरक्षा की सर्वोच्च जिम्मेदारी उन्हीं की थी .मीडिया रिपोटों के अनुसार, ट्रस्ट के विशिष्ट आमंत्रित सदस्य गोपाल राव (गोपाल नगरकोटे) को हटाए जाने और उनकी स्थिति को लेकर भी गंभीर भ्रम और विरोधाभास सामने आए हैं.
भगवान श्री राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं
प्रेसवार्ता में कहा गया कि राम मंदिर के लिए प्राप्त समस्त चंदे, चढ़ावे, भूमि खरीद, आयोजनों और व्ययों का स्वतंत्र फॉरेंसिक ऑडिट कर उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए.भगवान राम किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं. वे करोड़ों भारतीयों की आस्था हैं. भगवान राम के नाम पर जुटाए गए धन की कथित लूट और उस पर पर्दा डालने की हर कोशिश देश की धार्मिक चेतना का अपमान है. मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की आस्था पर डाका डालने वालों को बचाने की नहीं, बेनकाब करने और कानून के कठघरे में खड़ा करने की आवश्यकता है.
