बड़ा बजट, कमजोर प्राथमिकताएं- गांव, किसान और युवा फिर हाशिये पर : अनीस खान
राजनांदगांव- जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अनीस खान ने विधानसभा में प्रस्तुत राज्य बजट को जमीनी हकीकत से कटा हुआ बताया है. उन्होंने कहा कि बजट का आकार बढ़ा देना विकास का प्रमाण नहीं होता, असली कसौटी यह है कि प्राथमिकताएं किसके हित में तय की गई हैं. यह बजट आंकड़ों में बड़ा जरूर है, लेकिन आमजन की वास्तविक जरूरतों को पर्याप्त स्थान नहीं देता.
प्रदेश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, फिर भी किसानों की आय बढ़ाने, लागत कम करने और सिंचाई विस्तार के स्पष्ट व ठोस लक्ष्य सामने नहीं रखे गए. यदि कृषि और ग्रामीण क्षेत्र को मजबूत आधार नहीं मिलेगा तो राज्य की अर्थव्यवस्था कैसे सुदृढ़ होगी?
अनीस खान ने कहा कि कांग्रेस की भूपेश बघेल जी की सरकार की गौठान योजना को बंद कर दिया गया, जबकि यही योजना गोवंशी पशुओं की सुरक्षा और ग्रामीण स्वावलंबन का सशक्त माध्यम बनी थी. गौठानों से जहां गोवंश सुरक्षित हो रहे थे, वहीं स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही थी. गोवंश को पूजनीय बताने वाली वर्तमान सरकार के बजट में गौठान योजना या उसके विकल्प का कोई उल्लेख नहीं होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था की अनदेखी को दर्शाता है.
उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में हजारों शासकीय पद रिक्त हैं, पर रोजगार सृजन की स्पष्ट रूपरेखा प्रस्तुत नहीं की गई. डी.एड. प्रशिक्षित अभ्यर्थी महीनों से राजधानी में प्रदर्शन कर रहे हैं, किंतु उनके लिए कोई प्रावधान नहीं है. मेडिकल कॉलेज विस्तार के नाम पर सीमित राशि रखी गई है, जबकि वास्तविक लागत कहीं अधिक है. रसोइया संघ हड़ताल पर है, संविदा कर्मचारी नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं और महिलाओं को ₹500 में सिलेंडर देने संबंधी भी बजट में कोई उल्लेख नहीं किया गया.
अनीस खान ने कहा कि यह बजट संतुलित और समावेशी विकास की दिशा तय नहीं करता. जब तक गांव, किसान, युवा, महिला और कर्मचारी वर्ग को केंद्र में रखकर ठोस निर्णय नहीं लिए जाएंगे, तब तक विकास के दावे केवल कागजों तक सीमित रहेंगे.
