नवनियुक्त पदाधिकारियों ने लिया शपथ
रायपुर- छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद का रजत जयंती समारोह 29 जनवरी को राजधानी रायपुर के वृदांवन हाल में भव्य रूप से मनाया गया. इस अवसर पर प्रदेशभर से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे. वर्ष 2026 में छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश अध्यक्ष के.आर. शाह ने आदिवासी समाजहित में ऐतिहासिक छ: सूत्रीय कार्यक्रम की घोषणा की. कार्यक्रम के अतिथियों के द्वारा परिषद के पदाधिकारियों को शपथ दिलाया गया.

कार्यक्रम में परिषद की 25 वर्षों की सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया. वक्ताओं ने आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास, अधिकारों की रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार के क्षेत्र में किए गए प्रयासों को रेखांकित किया. समारोह के दौरान समाज के लिए उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया.

परिषद पदाधिकारियों ने भविष्य में आदिवासी समाज को संगठित कर संवैधानिक अधिकारों की रक्षा एवं विकास की नई दिशा तय करने का संकल्प लिया. रजत जयंती समारोह ने आदिवासी एकता और सामाजिक चेतना का सशक्त संदेश दिया.

छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद के छ: सूत्रीय कार्यक्रम
01. निरपराध आदिवासी लोगों को जेलों से छुड़ाया जायेगा
छत्तीसगढ़ के सभी केन्द्रीय जेलों, जिला जेलों, उपजेलों में आदिवासी महिलाएं, पुरूषों, युवक-युवतियों व अवयस्क बच्चे जो विचाराधीन बंदियों के रूप में कैद हैं उनके आंकड़े प्राप्त कर, उनकी विधि सम्मत समीक्षा उपरान्त निरपराध लोगों को निःशुल्क कानूनी सहायता (जमानत / बांड आदि) देकर जेलों से छुड़ाया जायेगा. इसमें आबकारी एक्ट और फॉरेस्ट एक्ट के बंदी भी शामिल हैं. इसके लिए राज्य स्तरीय विधिक सेल / संभाग स्तरीय विधिक सेल / जिला स्तरीय विधिक सेल का गठन होगा.
02. भूमि संबंधी समस्त प्रकार के विवाद
राज्य के आदिवासियों की आवासीय भूमि और खेतिहर भूमि पर अवैध कब्जों की भरमार है. अज्ञानता, आर्थिक कमजोरी व सीधे-सरल स्वभाव के कारण आदिवासियों की लाखों एकड़ स्वामित्व वाली भूमि पर अन्य लोगों ने बलात् कब्जा कर रखा है. परिषद द्वारा जिला व तहसील स्तर पर ऐसे सभी प्रकरणों को सूचीबद्ध कर जिला विधिक सेल के माध्यम से विधि अनुसार अतिक्रमण समाप्त कर आदिवासियों को उनकी भूमि वापस दिलाने में सहायता प्रदान की जायेगी.
03. शिक्षा शेरनी का दूध है
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद आदिवासी समाज में गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा के लिए विशेष कार्य करेगा. पांचवी अनुसूची के अन्तर्गत आने वाले सभी प्राथमिक, मिडिल, हाई स्कूल, उ.मा. विद्यालय, महाविद्यालयों और आश्रमों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा. इसे मूर्तरूप देने के लिए निम्नानुसार समितियां बनाई जायेगी. प्रदेश के समस्त आदिवासी विकासखण्डों में 20 लोगों की “शिक्षा विकास निगरानी समिति” का गठन किया जायेगा.
04. राजस्व भूमि और वनभूमि
परिषद द्वारा स्थापित होने वाले विधि प्रकोष्ठों व सलाहकार समितियों में ऐसे सभी मामलों के निपटारे का प्रयास किया जायेगा.
05. रोजगार और व्यवसाय
परिषद द्वारा सम्पूर्ण राज्य में जिला स्तरीय समितियों के माध्यम से आदिवासी शिक्षित युवक युवतियों के लिए रोजगार और व्यवसाय हेतु कार्यशालाओं का शुभारंभ किया जायेगा. विशेषकर पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में वनोपज से संबंधित प्रोसेसिंग प्लांट लगाने हेतु विशेष प्रयास किये जायेंगे.
06. जल-जंगल-जमीन और आदिवासी सभ्यता, संस्कृति पर महासंकट
भारत का आदिवासी वर्तमान समय में जल-जंगल-जमीन और अपनी महान संस्कृति, बोली, भाषा व धार्मिक परम्पराओं के विकराल संकट से जूझ रहा है. देश की आदिवासियों की संस्कृति का सीधा संबंध जंगलों, पहाड़ों और वहां के नदी-झरनो से है.

कार्यक्रम में मुख्यअतिथि भागचंद मीना (सेवानिवृत्त आई.आर.एस) अध्यक्ष अनु.जनजाति संयुक्त संस्थान जयपुर राजस्थान, विशिष्ठ अतिथि अमरजीत भगत पूर्व केबिनेट मंत्री एवं संभाग अध्यक्ष छत्तीसगढ़.आविप.सरगुजा संभाग, जनकराम ध्रुव विधायक बिंद्रानवागढ़ एवं पूर्व महामंत्री आविप, परदेशीराम वर्मा, मुकेश मीना, भगतराम सोनी समेत बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे.
