अडानी की कोयला खदान के विरोध में सैकड़ों ग्रामीणों का जोरदार प्रदर्शन, पूर्व सीएम भूपेश ने ग्रामीणों की मांग का किया समर्थन

रायगढ़- जिले में अंबूजा कोयला खदान की प्रस्तावित जनसुनवाई को निरस्त कराने की मांग को लेकर रायगढ़ जिले के चार से अधिक गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने गुरुवार को जिला मुख्यालय पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. हाथों में तख्तियां लेकर ग्रामीणों ने रैली निकाली और कलेक्टर कार्यालय के सामने धरना दिया. इस आंदोलन को खरसिया विधायक उमेश पटेल और धरमजयगढ़ विधायक लालजीत राठिया का भी समर्थन मिला. धरना प्रदर्शन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भाजपा सरकार पर तंज कसा है.
https://x.com/bhupeshbaghel/status/1986453953102684324
उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा- अडानी की पुरंगा कोयला खदान के विरुद्ध आज दोपहर एक बजे से रायगढ़ ज़िला मुख्यालय में ग्रामीणों का धरना जारी है. भाजपा सरकार लगातार छत्तीसगढ़ की संपदा को अडानी पर लुटाने का काम कर रही है. क्षेत्रवासियों के भयंकर विरोध के बावजूद भाजपा सरकार ने धरमजयगढ़ की पुरंगा कोयला खदान अडानी समूह के स्वामित्व वाली अंबुजा सीमेंट को आवंटित कर दी है. लगभग 2150 एकड़ में फैला हुआ यह खदान क्षेत्र पेसा कानून के तहत संरक्षित क्षेत्र है, यहां की तीन ग्राम पंचायतों ने इस खदान के लिए 11 नवंबर को होने वाली जनसुनवाई के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित कर दिया है लेकिन आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार पेसा कानून को ठेंगा दिखाते हुए जनसुनवाई को लेकर अड़ी हुई है.
आज एक बार फिर इस खदान से प्रभावित होने वाले क्षेत्रवासियों ने जनसुनवाई निरस्त करने की मांग लेकर रायगढ़ जिला मुख्यालय में अपना विरोध प्रदर्शन किया है. अडानी की इस खदान से पुरंगा, तेंदुमुडा, कोकधार और समरसिंघा गांव बुरी तरह से प्रभावित होंगे और क्षेत्र का इकोसिस्टम तबाह हो जाएगा. पेसा कानून को धता बताकर, जनसुनवाई का ढोंग रचकर छत्तीसगढ़ की संपदा को अपने मालिक अडानी को सौंपने का ये भाजपाई खेल अब नहीं चलेगा. पुरंगा क्षेत्र के इन ग्रामीणों की मांग का हम पूर्ण समर्थन करते हैं.
मिली जानकारी के अनुसार, 11 नवंबर को अंबूजा कोल माइंस की जनसुनवाई निर्धारित है. प्रभावित गांव पुरूंगा, सांभरसिंघा, तेंदूमूड़ी, कोकदार समेत अन्य पंचायतों के ग्रामीणों ने कहा कि उनका क्षेत्र पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून लागू है. इसके तहत ग्रामसभा की अनुमति के बिना किसी परियोजना पर निर्णय नहीं लिया जा सकता.
ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन ने मौखिक रूप से जनसुनवाई की अनुमति का दावा किया है, जबकि ग्रामसभा ने इस जनसुनवाई को निरस्त करने का प्रस्ताव पारित किया है. बावजूद इसके प्रशासन ने ग्रामीणों को अब तक कोई लिखित सूचना नहीं दी है, जिससे ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है. प्रदर्शनकारी ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि जब तक जनसुनवाई को निरस्त करने की लिखित घोषणा नहीं की जाती, उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा. कई ग्रामीणों ने तो धरना स्थल पर ही रुककर भोजन बनाने और रात बिताने की तैयारी की है.
