सरकार ऋण पुस्तिका छपवा नहीं पा रही तो उसकी उपयोगिता समाप्त कर दी

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल और वित्त एवं पंजीयन मंत्री ओ पी चौधरी के निर्देश पर छत्तीसगढ़ पंजीयन विभाग ने कृषि भूमि की खरीदी-बिक्री (रजिस्ट्री) के लिए ऋण पुस्तिका (किसान किताब) प्रस्तुत करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है.
इस पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि सरकार ने कृषि भूमि की रजिस्ट्री के समय ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त कर दिया. सरकार का यह कदम अदूरदर्शी है. ऋण पुस्तिका एक मात्र ऐसा दस्तावेज है जो राजस्व विभाग की तरफ से भू-स्वामी के अधिकार को प्रमाणित करता है. वर्षों से किसान किताब किसानों के भरोसे का प्रतीक है तथा ऋण पुस्तिका किसानों को उनके जमीन के मालिक होने का अहसास जताता है.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि बी-1 खसरा खतौनी सभी कुछ तो ऑनलाइन है कोई भी, कही से भी निकाल सकता है. ऋण पुस्तिका को किसान के लिए पटवारी बना कर देता है. यह उसके भूमि का प्रमाणित दस्तावेज होता है जिसमें उसकी फोटो भी लगती है. बिक्री के समय रजिस्ट्रार द्वारा किसान के ऋण पुस्तिका अनिवार्य रूप से परीक्षण किया जाता था. सरकार के द्वारा ऋण पुस्तिका की अनिवार्यता समाप्त करने से फर्जी रजिस्ट्री और धोखा होने की संभावना बढ़ जाएगी.
उन्होंने कहा कि यह निर्णय जमीन खरीदने बेचने वाले दोनों के हितों के खिलाफ है. सरकार नई ऋण पुस्तिका की छपवाई नहीं कर पा रही तो उसने इसकी उपयोगिता ही समाप्त करने का आदेश जारी कर दिया. कांग्रेस, सरकार के इस निर्णय का विरोध करती है, यह कदम जन विरोधी है.
