बदलाव की लहर में पुरानी व्यवस्थाओं पर सवाल

वर्षों तक चुनाव टालने का सीधा असर न्याय व्यवस्था और वकीलों के अधिकारों पर
वकीलों को नए नेतृत्व से बड़ी उम्मीदें
अधिवक्ता समुदाय के लोकतांत्रिक अधिकारों की पुनः स्थापना की लड़ाई
दुर्ग- छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल के 30 सितम्बर को होने वाले चुनाव का शंखनाद होने के बाद से ही प्रदेश भर के न्यायालयों में गहमागहमी और चर्चाओं का बाजार गर्म है. लंबे समय से अधिवक्ताओं के बीच जिस लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग उठ रही थी, आखिरकार वह मुकाम अब सामने आ गया है. तीन साल के कार्यकाल वाली इस सबसे बड़ी अधिवक्ता संस्था में वर्षों तक चुनाव न होना न केवल अधिवक्ताओं की नाराजगी का कारण बना, बल्कि संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े करता रहा. तमाम तरह की गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए बार काउंसिल आफ इंडिया ने इस बार पुख्ता प्रबंधन किया है. अब जब चुनाव की औपचारिक घोषणा हो चुकी है, तो नए नेतृत्व की तलाश, जवाबदेही की मांग और पारदर्शिता की उम्मीद ने इस चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया है.
24 हजार अधिवक्ता देंगे वोट, 105 प्रत्याशी मैदान में, चुने जाएंगे 25
11 साल बाद होने जा रहे छत्तीसगढ़ स्टेट बार काउंसिल चुनाव को लेकर प्रदेशभर में जबरदस्त सरगर्मी है. अभी तक तस्वीर सामने आयी उसके अनुसार राज्य के करीब 24 हजार अधिवक्ता 25 सीटों के लिए 105 प्रत्याशियों का भाग्य तय करेंगे. मतदान 30 सितंबर को सुबह 10 से शाम 5 बजे तक सभी जिला एवं सत्र न्यायालयों और सिविल कोर्ट परिसर में होगा. बिलासपुर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के मतदाताओं के लिए जिला कोर्ट परिसर में अलग केंद्र बनाया गया है.
पिछले चुनाव में वोट टेंपरिंग और फर्जीवाड़े के आरोपों के बाद इस बार बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने सख्त प्रबंध किए हैं. नए नियमों के अनुसार मतदाताओं को न्यूनतम पाँच उम्मीदवारों को वरीयता क्रम में वोट देना होगा. साथ ही हाई कोर्ट या जिला बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों को चुनाव लड़ने से रोका गया है.
उम्मीदवार व्यक्तिगत संपर्क के साथ-साथ सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए जोरदार कैंपेन कर रहे हैं. मतदान के बाद मतपेटियां स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी जाएंगी, जिसकी निगरानी के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं.
चुनावी परिदृश्य
दुर्ग जिले से 13 उम्मीदवार चुनावी मैदान में भाग्य आजमाने उतरे हैं. इनमें संतोष कुमार वर्मा, बादशाह प्रताप सिंह, चेतन कुमार तिवारी, हेंमत कुमार मिश्रा, मोहम्मद अरश्द खान, नागेंद्र कुमार शर्मा, नरेंद्र कुमार सोनी, संजय कुमार अग्रवाल, सोहन लाल चंद्रवशी, सुधीर कुमार चंद्राकर, तामस्कर टंडन, उत्तम कुमार चंदेल एवं विपिन कुमार तिवारी प्रमुख रूप से शामिल है. इन 13 प्रत्याशियों ने धुआंधार चुनाव प्रचार किया खासकर संतोष कुमार वर्मा की पकड़ पूरे प्रदेश के वकीलों में लोकप्रिय बनी हुई है. वैसे भी संतोष कुमार वर्मा जिला न्यायालय दुर्ग से लेकर हाईकोर्ट बिलासपुर तक काफी केसेस हैंडल किए हैं और वकीलों के कल्याण के लिए आवाज उठाते रहते हैं. उनका पलड़ा बहुत भारी है. इसी तरह से नागेंद्र कुमार शर्मा भी मजबूती के साथ प्रचार में बढ़त बनाए हुए हैं. श्री शर्मा का पलड़ा इसलिए भी भारी है कि वे निरंतर वकीलों के हक के लिए लड़ते रहते हैं. और मजबूती के साथ अपना पक्ष रखते है. दुर्ग में चार बुथ है यहां जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कमरे के बगल में सभागार में क्रमांक 1 से 14 सौ तक एवं नवीन भवन काऊंसलर कक्ष में 1401 से लेकर 2196 तथा नवीन सूची के क्रमांक 1 से 382 का नाम अंकित है. इस प्रकार दुर्ग,भिलाई और भिलाई-3 से कुल 2665 वोटर मतदान करेंगे.

रायपुर जिले से 16 उम्मीदवार चुनावी मैदान में भाग्य आजमाने उतरे हैं. इनमें अब्दुल मुज, आदित्य कुमार झा, अजय जोशी, आशुतोष दुबे, भांजन कुमार जांगड़े, सुरेशनाथ पांडे, देवर्षि ठाकुर, दिलीप छत्रे, दिवाकर सिन्हा, फैजल रिजवी, कोषराम साहू, राकेश त्रिपाठी, संजय कुमार गजभिये, सौरभ मिश्रा, विराट वर्मा, विवेकानंद भोई शामिल हैं. ये सभी वकील प्रत्याशी लगातार मतदाताओं से संपर्क में है. फैजल रिजवी इनमें ऐसे प्रत्याशी हैं जो लोकप्रिय हैं और उनकी पकड़ भी मजबूत है लेकिन वही कोषराम साहू भी लगातार प्रचार में आगे चल रहें हैं.


बिलासपुर जिला कोर्ट से 15 उम्मीदवार चुनावी मैदान में भाग्य आजमाने उतरे हैं. इनमें अब्दुल मोईन खान, आलोक कुमार गुप्ता, चंद्रप्रकाश जांगेड़े, हरिनाम सिंह चंदेल, केशव कुमार अग्रवाल, लवकांत दुबे, राजेश कश्यप, राकेश कुमार मिश्रा, रूपेश कुमार त्रिवेदी, सचिन दिगास्कर, संजय कुमार साहू, शिरीष तिवारी, सुखीराम साहू, सुशील कुमार हजारी एवं भरतलाल लुनिया प्रमुख रूप से शामिल हैं.
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन से 23 प्रत्याशियों की सूची प्रकाशित हुई और ये सभी अपनी जीत का दावा करते हुए मतदाताओं के बीच घूम रहें है चूकि प्रदेश के सबसे बड़े न्यायालय के वकील होने के नाते इन लोगों पर दारोमदार अधिक हैं कहा जा रहा है कि इन सभी प्रत्याशियों पर प्रदेश के वोटरों का नजर भी है. देखने वाली बात यह होगी कि ये लोग चुनावी रणनीति को किस तरह से मैनेज करेंगे क्योंकि पिछला अनुभव ठीक नहीं रहा है.
इसी तरह छत्तीसगढ़ के समस्त जिला,तहसील एवं उपन्यायलयों से उम्मीदवारों की सूची जारी हो गई है. खासकर राजनांदगांव, बेमेतरा, कवर्धा, कोरबा, धमतरी, महासमुंद, अंबिकापुर, सरगुजा, जांजगीर-चांपा, बलोदाबाजार, बालोद, जगदलपुर, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, भानुप्रतापपुर, मानपुर मोहला-अंबागढ़ चौकी से लेकर समस्त जिला एवं तहसील न्यायालयों के वकील इस चुनाव पर न केवल अपनी नजर बनाये हुए है बल्कि मतदान के लिए व्याकुल भी नजर आ रहे हैं.
6 साल की देरी : सवालों का बोझ और नाराजगी का माहौल
बार काउंसिल का कार्यकाल महज पांच साल का होता है, लेकिन 2019 के बाद से लगातार चुनाव टलते गए. इस दौरान न केवल अधिवक्ता कल्याण योजनाएं ठप रहीं, बल्कि काउंसिल की बैठकों और निर्णयों पर भी “मनमानी और एकाधिकार” के आरोप लगे. वकीलों का कहना है कि यह सिर्फ चुनाव में देरी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. कई अधिवक्ताओं ने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों तक चुनाव न कराने के पीछे कौन-सी बाधाएं थी? क्या कुछ लोग संगठन को अपना जेबी संगठन बनाकर मनचाही नीतियां लागू कर रहे थे?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि जिन याचिकाओं के आधार पर चुनाव टलते रहे, उनके निराकरण में भी अनावश्यक देरी हुई. “कछुए की चाल” वाली इस प्रक्रिया के लिए अधिवक्ता नेतृत्व की अनिच्छा और धीमी पहल को जिम्मेदार माना जा रहा है. भले ही पूर्व पदाधिकारी इस आरोप को खारिज करते हों, लेकिन प्रदेशभर के अधिवक्ता इस देरी को लेकर बेहद नाराज हैं और चुनाव को अपने सम्मान और अधिकारों की पुनर्स्थापना मान रहे हैं.
पुरानी बनाम नई पीढ़ी : नेतृत्व की परीक्षा
लंबे समय से रुके इस चुनाव ने अधिवक्ता समाज को दो खेमों में बांट दिया है. एक ओर पुरानी पीढ़ी के वरिष्ठ वकील हैं, जो अनुभव, संगठनात्मक मजबूती और परंपराओं को बनाए रखने की बात कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर युवा अधिवक्ता हैं, जो डिजिटलाइजेशन, समय पर चुनाव और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को लेकर आक्रामक हैं.
नई पीढ़ी की मांगें साफ हैं—समय पर चुनाव की गारंटी, आधुनिक सुविधाओं का विस्तार, और काउंसिल के कामकाज में 100% पारदर्शिता.
वरिष्ठ अधिवक्ता भी मानते हैं कि युवा वकीलों की इस ऊर्जा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. यह चुनाव अब केवल पदों का नहीं, बल्कि संगठन की दिशा तय करने का निर्णायक संघर्ष बन गया है.
घोषणा–पत्र : कल्याण और पारदर्शिता का साझा एजेंडा
06 साल बाद हो रहे इस चुनाव में उम्मीदवारों ने ऐसे घोषणा–पत्र पेश किए हैं, जो केवल वादों तक सीमित नहीं, बल्कि व्यावहारिक योजनाओं का रोडमैप प्रस्तुत करते हैं. सभी पैनलों के साझा मुद्दों में अधिवक्ता कल्याण, डिजिटल सुविधाएं, समयबद्ध चुनाव और पारदर्शिता शामिल हैं.
अब तक सामने आए प्रमुख वायदे –
- अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट को लागू कर वकीलों की पेशेवर सुरक्षा सुनिश्चित करना.
- वकीलों की मृत्यु पर उनके परिजनों को हाउसिंग सोसाइटी में मकान उपलब्ध कराना.
- आपात स्थिति में त्वरित आर्थिक सहायता और दुर्घटना/बीमारी पर तत्काल मदद.
- जिला अधिवक्ता संघ और स्टेट बार काउंसिल की मासिक बैठकें अनिवार्य करना.
- राज्य अधिवक्ता संघ की मासिक पत्रिका का प्रकाशन.
- प्रत्येक जिले में अधिवक्ताओं के लिए एम्बुलेंस सेवा और स्वास्थ्य बीमा योजना.
- जिला और तहसील स्तर पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर और मेडिकल कार्ड सुविधा.
- सभी जिला बार एसोसिएशन में हाई-स्पीड इंटरनेट और ई-लाइब्रेरी/वाचनालय की स्थापना.
- सप्ताह में एक दिन वरिष्ठ अधिवक्ताओं का उद्बोधन सत्र ताकि नए वकील सीख सकें.
- समय पर चुनाव की गारंटी के लिए नियमों में संशोधन.
- जिला व उप–न्यायालय परिसरों में नए एडवोकेट चैंबर, मीटिंग हॉल और महिला अधिवक्ताओं के लिए अलग रेस्ट रूम.
- युवा अधिवक्ताओं के लिए स्टाइपेंड योजना और राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर.
- काउंसिल की सभी आय-व्यय और निर्णयों का ऑनलाइन प्रकाशन, साथ ही ऑनलाइन शिकायत पोर्टल.
- प्रदेश और जिला स्तर पर सहकारी आवास योजना, न्यायालय परिसरों में इंडियन कॉफी हाउस और नोटरी के लिए बैठने की समुचित व्यवस्था.इन वादों से साफ है कि यह चुनाव केवल नेतृत्व बदलने का नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज की जीवनशैली और पेशेवर सुविधाओं में बड़ा बदलाव लाने का प्रयास भी है.
डिजिटलाइजेशन और नई तकनीक पर जोर
युवा वकीलों की सबसे बड़ी मांग है कि छत्तीसगढ़ बार काउंसिल को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जाए. ई-लाइब्रेरी, हाई-स्पीड इंटरनेट, ऑनलाइन ग्रिवेंस पोर्टल और फैसलों का ऑनलाइन प्रकाशन जैसी सुविधाएं अब केवल घोषणा नहीं, बल्कि समय की मांग बन चुकी हैं. यह कदम न केवल पारदर्शिता को मजबूत करेगा, बल्कि युवा वकीलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा.
महिला अधिवक्ताओं के लिए विशेष योजनाएं
घोषणा–पत्रों में महिला अधिवक्ताओं की सुरक्षा और सुविधाओं पर भी जोर दिया गया है. अलग रेस्ट रूम, सुरक्षित चैंबर, मातृत्व लाभ और करियर काउंसलिंग जैसी सुविधाओं को लेकर विशेष प्रस्ताव पेश किए गए हैं. वरिष्ठ अधिवक्ताओं का मानना है कि महिला वकीलों की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह कदम संगठन को अधिक समावेशी और आधुनिक बनाएगा.
उम्मीदों का चुनाव
वरिष्ठ अधिवक्ता बताते हैं कि 11 साल के लंबे इंतजार ने अधिवक्ताओं की उम्मीदें कई गुना बढ़ा दी हैं. इस बार चुनाव केवल नए पदाधिकारियों के चयन तक सीमित नहीं, बल्कि संगठन में भरोसे और लोकतंत्र की बहाली की प्रक्रिया है. युवा वकीलों के बीच डिजिटल सुविधाओं और स्टाइपेंड योजना को लेकर उत्साह सबसे ज्यादा है, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता अधिवक्ता प्रोटेक्शन एक्ट और आवास योजनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं.
परिवर्तन की निर्णायक जंग
छग स्टेट बार काउंसिल चुनाव 2025 केवल एक संगठन का चुनाव नहीं, बल्कि अधिवक्ता समाज की आवाज और भविष्य की दिशा तय करने वाली ऐतिहासिक लड़ाई है. 11 साल की चुप्पी के बाद उठ रही बदलाव की लहर इस बात का संकेत है कि इस बार का चुनाव परंपरा बनाम परिवर्तन का निर्णायक मुकाबला होगा. अधिवक्ताओं को उम्मीद है कि जो भी नया नेतृत्व चुना जाएगा, वह न केवल इन वादों को धरातल पर उतारेगा, बल्कि संगठन में पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिकता का नया अध्याय लिखेगा. यह चुनाव आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ की न्याय व्यवस्था और अधिवक्ता कल्याण को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो सकता है.
कौन लड़ सकता है और कौन वोट दे सकता है
मतदाता: केवल वही अधिवक्ता, वकील, प्लीडर या अटॉर्नी, जो चुनाव तिथि पर उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने के अधिकार के हकदार हों और सामान्यतः छत्तीसगढ़ (या संबंधित संघ-राज्य क्षेत्र) में प्रैक्टिस करते हों. (एडवोकेट्स एक्ट, धारा 53)
उम्मीदवार: वही अधिवक्ता, जो बार काउंसिल में पंजीकृत है और अधिवक्ता अधिनियम के अनुसार नामांकन हेतु पात्र है.
