छत्तीसगढ़ से लेकर दिल्ली तक गरमाई राजनीति

क्या छत्तीसगढ़ में बढ़ेगा लूट तंत्र?
परेशान करने के लिए ईडी का दुरूपयोग
पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे को बनाया निशाना
छत्तीसगढ़ आजतक- छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर पर एक बार फिर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापामार कार्रवाई करते हुए उनके बेटे चैतन्य बघेल को गिरफ्तार कर लिया है. वे पिछले तीन दिनों से ईडी हिरासत में उनकी पूछताछ का सामना कर रहे हैं. उनसे लगातार पूछताछ जारी है. इन सबके बीच विपक्षी कांग्रेस और सत्ताधारी दल भाजपा एक दूसरे पर आरोप मढ़ रहे हैं और कांग्रेस इस मामले में लगातार हमलावर बनी हुई है. वह सोमवार 22 जुलाई को इसके विरोध में पूरे छत्तीसगढ़ का आर्थिक नाकेबंदी एवं चक्काजाम करने जा रही है जिसके लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की गई है. इधर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राजधानी रायपुर स्थित ईडी दफ्तर में रविवार को पहुंचे जहां उन्होंने अपनी बेटी और बहू के साथ चैतन्य बघेल से मुलाकात की और उनका कुशलक्षेम जाना. दूसरी ओर कांग्रेस के दिग्गज इस मामले में ईडी की कार्रवाई का खुलकर विरोध कर रहे हैं. राजधानी रायपुर से लेकर देश की राजधानी नई दिल्ली तक खलबली मची हुई है और भाजपा को दबाव का सामना करना पड़ रहा है!
कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर ईडी के कसते शिकंजे पर राजनीतिक गलियारे में चर्चा सरगर्म है कि अडानी का विरोध करने की वजह से दोनों राष्ट्रीय स्तर के बड़े नेताओं पर इस प्रकार के दमन की कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है. अनेक सवाल उठने लगे हैं.
ऐन जन्मदिन के मौके पर ही ईडी की एंट्री क्यों?
ऐसे समय में जबकि 18 जुलाई को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल का जन्मदिन था और पूरा परिवार खुशियां मनाने जुटा था तब अचानक सुबह-सुबह ईडी की एंट्री भूपेश बघेल के घर कैसे हो गई? यह किसी को पच नहीं रहा है कि ईडी ने पदुम नगर भिलाई-3 स्थित भूपेश निवास में सुबह 6.20 बजे बिना किसी नोटिस या जानकारी के घुस गई और मनमाने तरीके से उनके परिवार को परेशान करने लगी. हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने ट्विटर हेंडल पर उसी दिन लिखा कि “ईडी आ गई आज विधानसभा सत्र का अंतिम दिन है. अडानी के लिए तमनार में काटे जा रहे पेड़ों का मुद्दा आज उठना था. भिलाई निवास में साहब ने ईडी भेज दी”. इन लाईनों में पूर्व मुख्यमंत्री की पीड़ा के साथ आक्रोश की झलक भी देखी जा सकती है. भूपेश बघेल की इस बात में दम है कि छत्तीसगढ़ में अडानी का विरोध करना ही उनके जी का जंजाल बना हुआ है. उनकी सरकार में प्रमुख सलाहकार रहे विनोद वर्मा ने सोशल मीडिया की एक पत्रिका को दिए अपने साक्षात्कार में इस बात का खुलासा किया कि किस तरीके से कांग्रेस की तत्कालीन सरकार को अडानी को लाभ पहुंचाने के लिए बाध्य किया जाता रहा. इसके अलावा भी देश-विदेश के अनेक बुद्धजीवी और न्यायपालिका से जुड़े लोग इस बात को बार-बार कहते हैं कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य इलाकों को लूटने के लिए अडानी को खुली छूट दी गई जिसका मुख्यमंत्री रहते भूपेश बघेल ने पुरजोर विरोध किया यही वजह है कि आज सत्ता से हटते ही उनके और उनके परिवार को निशाना बनाया जा रहा है. वरना ऐसी कौन सी आफत टूट पड़ी थी कि जन्मदिन भी नहीं मनाने दिया गया लड़के को और उठा ले गये. क्या ईडी एक दिन और नहीं रूक सकती थी? यदि रूक जाती तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ता?
न झुका हूं न झुकूंगा!
वैसे भूपेश बघेल ने स्पष्ट किया है कि वे उसी दिन विधानसभा में अडानी का मुद्दा उठाने वाले थे इसीलिए उनकी जुबान बंद करने के लिए उनके परिवार पर हमला किया गया. वे चुप नहीं बैठेंगे. पूर्व मुख्यमंत्री ने मीडिया के समक्ष खुलकर कहा कि वे वीर शिवा जी के वंशज हैं इसलिए वे टूट सकते हैं लेकिन झुक नहीं सकते. वे पहले भी न तो झुके हैं न आगे झुकेंगे और छत्तीसगढ़ से अडानी को भगा कर ही दम लेंगे. चाहे इसके लिए उन्हें कोई भी कीमत क्यों न चुकानी पड़े.
राहुल के बाद भूपेश पर निशाना!
अभी कुछ दिनों पहले ही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और युवा सांसद राहुल गांधी के जीजा जी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ ईडी ने लगातार परेशान करने की कार्रवाई की. हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी से लेकर राहुल गांधी तक जांच की कार्रवाई जारी है. और भूपेश बघेल छत्तीसगढ़ के अकेले ऐसे फॉयर ब्रांड लीडर हैं जो जनता के बीच बहुत लोकप्रिय हैं और राहुल गांधी के सबसे करीबियों में उनकी गिनती होती है. यही वजह है कि विपक्षियों के साथ ही कांग्रेस के कुछ लोगों को यह बात पचती नहीं है यही वजह है कि समय-समय पर इस कद्दावर नेता को परेशान करने की कार्रवाई की जाती है. भूपेश बघेल चूंकि कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव है और उनपर पंजाब का प्रभार भी है इसलिए वे लगातार सुर्खियों में रहते हैं. उनकी व्यक्तिगत आलोचना चाहे कोई कितना भी करें लेकिन सार्वजनिक जीवन में उनकी लोकप्रियता जबरदस्त है. इसका नजारा उस वक्त देखनें को मिला जब चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया गया. बघेल के गिरफ्तार होते ही हजारों- हजार की संख्या में भूपेश समर्थक उमड़ पड़े और विरोध जताने लगे. यहां तक की छत्तीसगढ़ विधानसभा के कांग्रेसी विधायक कोर्ट पहुंच गये और न्यायालय में तिल रखने की जगह न बची.
इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को लोग कितना मानते हैं. वैसे भी राहुल गांधी के साथ भूपेश बघेल की नजदीकियां और दोनों नेताओं द्वारा अडानी का विरोध हर समय भाजपा सरकार को खटकते रहता है और राहुल के बाद भूपेश बघेल संघीय एजेंसियों के निशाने पर बने हुए है.
अडानी के निशाने पर क्यों आए भूपेश बघेल?
लोग सोचते हैं कि छत्तीसगढ़ में इतने बड़े-बड़े नेता हैं तो ईडी के निशाने पर भूपेश बघेल ही क्यों हैं? प्रचारित किया जाता है कि महादेव एप, शराब घोटाला, कोयला घोटाला, मनी लॉड्रींग केस भूपेश बघेल द्वारा कराया गया. इस मामले में पूर्व मंत्री कवासी लखमा को जेल भेजा गया और भी अनेक नौकरशाह अफसर नेता जेल की सींखचों में भेजे गए और जांच कार्रवाई चल रही है जबकि वास्तविकता कुछ और ही है. कारण कि ऐसे समय में जब कांग्रेस का अधिवेशन चलता है, पारिवारिका कार्यक्रम होता है, लड़के का जन्मदिन होता है तभी क्यों भूपेश के घर ईडी द्वारा दस्तक दी जाती है? ज्ञात हो कि सन 2023 के फरवरी महीने में जब रायपुर में कांग्रेस का महाधिवेशन चल रहा था तब बीच में ही ईडी ने छापेमारी कर दी. फिर 23 अगस्त 2023 को भूपेश बघेल के जन्मदिन के दिन उनके घर से लेकर उनके दो ओएसडी के घर, सलाहकार और उनके एक मित्र के घर पर ऐसे चार पांच उनके करीबियों के घर पर छापेमारी की गई. इस मामले में विशेषज्ञों का कुछ और ही कहना है. उनके प्रमुख सलाहकार रहे विनोद वर्मा बेबाक कहते हैं कि एक राजनीतिक पार्टी का राष्ट्रीय अधिवेशन था इसीलिए बाधा पहुंचाने के लिए छापेमारी की गई. उनका तर्क था कि ऐन जन्मदिन पर इस प्रकार की छापे की कार्रवाईयां परेशान करने वाली होती हैं इसीलिए उन्हें निशाना बनाया जाता है.
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी पर राजनीति में आया उबाल
पिछले 18 जुलाई की गई पूर्व मुख्यमंत्री के पुत्र चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को लेकर राजनीति में उबाल आ गया है. एक ओर जहां कांग्रेस इस मामले को लेकर हमलावर बन गई है वहीं बीजेपी लगातार भूपेश के कार्यकाल को लेकर आरोप पर आरोप लगा रही है. उसका कहना है कि शराब घोटाला और कोयला घोटाला से लेकर महादेव एप और मनी लॉड्रींग में भूपेश बघेल का सीधा संबंध है जबकि वही कांग्रेस इसे सिरे से नकार रही है.
जिस पप्पू बंसल की शिकायत पर चैतन्य बघेल की गिरफ्तारियां हुई है उस पप्पू बंसल की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि पप्पू बसंल कौन है? इसकी जानकारी सबको होनी चाहिए. बताया जाता है कि पप्पू बंसल के खिलाफ एक गैर जमानती वारंट है और वह फरार आरोपी है. और इस फरार आरोपी को ईडी अपने ऑफिस बुलाती है, बयान दर्ज करती है लेकिन उसको गिरफ्तार नहीं करती है तब सवाल उठता है कि ऐसे में उसके बयान की क्या प्रामाणिकता है? इस मामले में विशेषज्ञ पूछते हैं कि क्या ईडी ने कोई सबूत इकट्ठे किए हैं? क्या उनके पास कुछ और भी एविडेंस है?
ज्ञात हो कि इसी साल के मार्च महीने में 10 तारीख को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घर छापेमारी हुई थी तब सवाल उठता है कि क्या भूपेश के घर से ईडी ने कोई आपत्तिजनक सामाग्री या सबूत पाये थे? आखिर वह इसे सार्वजनिक तौर पर उजागार क्यों नहीं करती कि भूपेश निवास में छापेमारी के बाद उसे क्या मिला? जो पैसा मिला भी तो क्या इसका कोई सबूत है कि वह मनी लॉड्रिंग का पैसा था?
उल्लेखनीय है कि चैतन्य बघेल का राजनीति से कोई लेना देना नहीं है वे खेती का काम करते हैं. सनद रहे कि वे अपनी पैतृक जमीन पर जो उनके पर दादा के पिताजी के पास से रही होगी उस जमीन पर वो खेती करते हैं जो खासी जमीन उनके पास रही है वह भिलाई स्टील प्लांट के निर्माण के समय में इनके परिवार ने एक बड़ी लंबी जमीन उसके लिए भी दान दिया था. तो देखा जाए तो चैतन्य बघेल जमींदार परिवार से आते हैं और वे उस परिवार से आते हैं जो सेवा का काम करते हैं. उनके पास अभी भी जो करीब 150 एकड़ की जो जमीन है उसमें खेती करते हैं और वे अपने दादा जी से उन्होंने खेती सीखी है.पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पास राजनीति की वजह से समय नहीं था. इसलिए चैतन्य बघेल पर खेती की जिम्मेदारियां बढ़ीं.
इस मामले में भूपेश के राजनीतिक सलाहकार विनोद वर्मा ने सोशल मीडिया की पत्रिका में जो साक्षात्कार दिया उसमें बघेल की एक पैतृक जमीन के बारे में स्पष्ट किया है कि जिस पर बघेल ने बिल्डिंग प्रोजेक्ट लाया जिसके लिए सोसाइटी बनाई और उन बिल्डिंग्स को बेच रहे थे. तो उसमें इनका कहना है कि इसमें आपने धन शोधन किया होगा. ये पूरा प्रोजेक्ट जो है यह 15 साल पुराना है और 15 साल पुराने प्रोजेक्ट में धन शोधन करके क्या आप बताना चाहते हैं कि 2022 में जो घटना हो रही है वो दो 15 साल पुराने प्रोजेक्ट में कैसे धनशोधन हो सकता है? यह तो नहीं हो सकता.
बड़े पैमाने पर काटे जा रहे पेड़ और खोदे जा रहे पहाड़?
विनोद वर्मा का कहना है कि असल में अडानी जी को भूपेश बघेल से जितनी पीड़ा है उतना इस देश में किसी और राजनीतिज्ञ से नहीं हो सकती. क्योंकि उन्होंने उनके बहुत से प्रोजेक्ट को छत्तीसगढ़ में फेल कर दिया. वे तमनार के मामले में कहते हैं कि तमनार का मामला वह है कि महाराष्ट्र की विद्युत कंपनी महाजेंको को छत्तीसगढ़ में खदान दी हुई है, उस खदान की खुदाई के लिए जो 75 एकड़ की जो जमीन चाहिए वहां पर अभी जंगल की कटाई हुई है. जब तक भूपेश की सरकार थी उन्होंने कटाई को रोके रखा और अनुमति नहीं दी. जब भूपेश की सरकार थी तब उन्हें महाजेंको की जमीन के लिए महाराष्ट्र की तत्कालीन सरकार द्वारा बार्गनिंग की गई कि भैया हमारी ही सरकार है हमारी ही विद्युत कंपनी है… तो भी मुख्यमंत्री रहते भूपेश ने कहा कि जंगल को किसी भी सूरत में हम कटने नहीं देंगे और न ही किसी को दे सकते हैं और न ही हमारे नेता राहुल गांधी ऐसा चाहते हैं ना सोनिया जी चाहती हैं ना प्रियंका जी चाहती हैं, तो जंगल को काटकर खदान नहीं बनने दिया जाएगा.
लेकिन विड्बंना देखिए की जैसे ही भाजपा की सरकार सत्ता में आई उसने अनुमति दे दी. जबकि इसके लिए प्रॉपर ग्राम सभा भी नहीं हुई जबकि पेशा कानून लागू है, और वह पांचवी अनुसूची का क्षेत्र है. वर्मा के अनुसार एक दूसरा, जिस 75 एकड़ में कटाई हुई है उसमें वनाधिकार कानून के तहत व्यक्तिगत वनाधिकार और सामुदायिक वनाधिकार दोनों दिए हुए हैं जिसके अनुसार वनाधिकार पट्टे को रद्द किए बिना आप जंगल नहीं काट सकते. तब सवाल उठता है कि ये जंगल किसके इशारे पर काटे गए?
स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ पर अडानी की निगाहें लगी हुई थी और उसने ही सारा षड्यंत्र रचा. विनोद वर्मा साफ कहते है कि स्थानीय ग्रामीणों को पता है कि अडानी की कोयला खदान बनने वाली है. इसे बच्चा-बच्चा जानता है. साथ ही साथ वहां की विधायक विद्यावती सिदार जब इसका विरोध करने पहुंची तो आदिवासियों के साथ उनको भी पकड़ा गया और परेशान किया गया. इतना ही नहीं आदिवासी महिलाओं के साथ गिरफ्तार भी किया गया. ऐसे गिरफ्तार करके रखा गया कि उनको लघुशंका तक के लिए जाने की अनुमति नहीं थी. पीने को पानी नहीं दिया गया. यहां तक की अनेक कांग्रेस कार्यकर्ताओं को नक्सली बताकर फंसाया गया. यह सब देखकर भूपेश बघेल स्वयं तमनार पहुंचे और उनके साथ 24 विधायक इकट्ठे हो गए. इन विधायकों के साथ वे तमनार गए और वहां के ग्रामीणों से बात की. भूपेश ने दिल खोलकर स्थानीय लोगों का साथ दिया.
जल-जंगल और जमीन को लूटने की साजिश
देखा जाए तो केंद्र में जब से मोदी की सरकार बैठी है तब से ही छत्तीसगढ़ के जल-जंगल और जमीन को लूटने की साजिश चल रही है. अडानी ग्रुप यहां बड़ी तेजी से सक्रिय है. कोयला, आयरन ओर सहित अनेक खदानें उसने ले रखी है. यहां तक कि सीमेंट प्लांटो पर उसका कब्जा हो गया है. ACC जैसी कई बड़ी-बड़ी सीमेंट कम्पनियों को अडानी ने खरीद लिया है और वह लगातार यहां से माल ढुलाई कर रहा है. भूपेश सरकार के हटते ही जैसे ही भाजपा की सरकार यहां बैठी चर्चा उड़ी की बिना मुख्यमंत्री की पदस्थापना के ही छत्तीसगढ़ की खदानों से माल ढुलाई शुरू कर दी गई है.
इस मामले में भी जानकारों का स्पष्ट कहना है कि यह छत्तीसगढ़ का दुर्भाग्य है कि यहां कोयले की खदानें हैं. जो कोल स्कैम हुआ है इसे बहुत प्रचारित किया गया और कहा गया कि गलत रेट में ऑक्शन किया गया. जबकि देखा जाए तो बीजेपी सरकार ने अलग-अलग राज्यों को कोल खदाने आवंटित करनी शुरू कर दी. एक को राजस्थान को दे दी. एक गुजरात को, एक महाराष्ट्र को, एक आंध्रप्रदेश को. इस प्रकार इन खदानों में ज्यादातर में बीजेपी या उनके समर्थन वाली सरकार थी तो सबके एमडी एनडीओ एमडीओ अडानी के बन गए, तो छत्तीसगढ़ का कोयला खोदा जाता है और ट्रांसपोर्ट करके दूसरे राज्यों की विद्युत कंपनियों को दे दिए जाते हैं. छत्तीसगढ़ के लोग सिर्फ प्रदूषण की मार झेल रहे हैं और अपने जंगल को नष्ट होते देख रहे हैं. पूरा का पूरा पर्यावरण बिगड़ रहा है. वाटर लेवल डाउन हो रहा है. नदी – नाले सूख रहे हैं और छत्तीसगढ़ लुट रहा है!
छत्तीसगढ़ को बड़ी आर्थिक क्षति
राजनीति के जानकारों का कहना है कि ईडी के बहाने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर चाहे कितना भी शिकंजा कसा जाए किंतु सच्चाई है कि छत्तीसगढ़ चारो तरफ से शोषण और लूट का शिकार हो रहा है. यहां के लोग मारे जा रहे हैं. और तो और खदानों से रॉयल्टी तक की चोरी की जा रही है. अर्थ तंत्र को जानने वाले लोग कहते हैं कि अगर ईमानदारी से खदानों की रॉयल्टी सही मिलती तो 10 साल में 1 लाख करोड़ की रॉयल्टी मिल गई होती. छत्तीसगढ़ को बहुत कम रॉयल्टी मिलती है. तो छत्तीसगढ़ की कीमत पर दूसरे राज्य कोयला खोद के निकाल कर ले जा रहे हैं और वो सारे घने जंगलों के बीच है.
पाठशाला बंद, मधुशाला शुरू!
इसी प्रकार शराब घोटाले को भी झूठी हवा दी जा रही है. वरना सवाल है कि 4 साल से ऊपर हो गया शराब घोटाले की जांच अब तक पूरी क्यों नहीं हो रही है. बार-बार इसका नाम लेकर भूपेश बघेल को बदनाम किया जा रहा है. जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी प्रदेश में भाजपा की सरकार है और उसके रहते 40 हजार नकली होलोग्राम पकड़े गए! इसका मतलब यह है कि नकली होलोग्राम से शराब तो भाजपा की सरकार भी बेच रही है! नकली शराब का जो मामला है या दूसरे प्रदेश से आने वाली शराब से तस्करी का मामला है वह इस सरकार में भी कहां रुका है और शराबबंदी भी कहां हुई? उल्टा छत्तीसगढ़ में धड़ाधड़ शराबखाने खोलने की योजना है. शराब दुकानों की संख्या लगातार बढ़ रही है. नहीं भी तो 10 हजार स्कूल बंद कर 67 नये शराबखाने खोलने की चर्चा बड़ी तेजी से सरगर्म है. क्या यही है विष्णु का सुशासन?
सचमुच में सुशासन की पैरोकार है विष्णुदेव की सरकार?
हांलिया ईडी की कार्रवाई से छत्तीसगढ़ में सियासत गरमाई हुई है. लोग कह रहे हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की राह में दिल्ली में राहुल गांधी और छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल कांटा बने हुए हैं. ये लोग अडानी के अवैध कारोबार और लूट तंत्र को रोकने के लिए लगातार प्रतिरोध का सामना कर रहे हैं. 18 जुलाई 2025 को भूपेश के घर छापा इसी की परिणति है. लेकिन भूपेश बघेल ने जिस दृढ़इच्छा शक्ति से कहा है कि वे टूट जाएंगे किंतु झुकेंगे नहीं इस बात की ओर इशारा करता है कि वे छत्तीसगढ़ के विकास और यहां के लोगों के भलाई के साथ कोई समझौता करने वाले नहीं. आने वाले दिनों में देखना यह होगा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच कहां तक जाती है और इसके भविष्य में परिणाम क्या होने वाले है. विष्णुदेव साय की भाजपा सरकार का चेहरा भी दिखाई देगा कि क्या वह सचमुच में सुशासन की पैरोकार है? या कि सब हवा हवाई है?
