पद्मश्री सुरेंद्र दुबे के निधन पर मुख्यमंत्री साय, पूर्व मुख्यमंत्री बघेल,सांसद अग्रवाल ने जताया शोक
रायपुर- छत्तीसगढ़ के हास्य कवि पद्मश्री सुरेंद्र दुबे का आज 26 जून को हार्टअटैक से निधन हो गया. रायपुर के एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांसें ली. पद्मश्री सुरेंद्र दुबे के निधन पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शोक जताया है.
https://x.com/vishnudsai/status/1938215099472236757
मुख्यमंत्री साय ने ट्वीट कर लिखा है- छत्तीसगढ़ी साहित्य व हास्य काव्य के शिखर पुरुष, पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे जी का निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है. अचानक मिली उनके निधन की सूचना से स्तब्ध हूँ. अपने विलक्षण हास्य, तीक्ष्ण व्यंग्य और अनूठी रचनात्मकता से उन्होंने न केवल देश-विदेश के मंचों को गौरवान्वित किया, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई. जीवनपर्यंत उन्होंने समाज को हँसी का उजास दिया, लेकिन आज उनका जाना हम सभी को गहरे शोक में डुबो गया है. उनकी जीवंतता, ऊर्जा और साहित्य के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा. ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें. ॐ शांति!
https://x.com/bhupeshbaghel/status/1938206596578087218
पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने ट्वीट कर लिखा है कि पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित छत्तीसगढ़ के हास्य कवि डॉ. सुरेन्द्र दुबे के निधन का दुखद समाचार मिला है. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति एवं परिवारजनों को दुःख सहने का सामर्थ्य दे. रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी दुख जताया है.
https://x.com/brijmohan_ag/status/1938207681648726035
सांसद बृजमोहन ने ट्वीट कर लिखा है – हर पल मुस्कान बाँटने वाला चला गया… छत्तीसगढ़ के रत्न, हमारे प्रिय साथी और जाने-माने हास्य कवि पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे के निधन का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है. अपने तीखे व्यंग्य और हास्य से उन्होंने समाज को गहराई से छुआ है, हंसाया है. वहीं गंभीर विषयों पर सोचने को मजबूर किया है. दुबे जी ने 20 वर्षों तक मेरे साथ लगातार काम किया है. उनमें किसी विषय को समझने, पहचानने और उस विषय को अंतिम परिणीति तक पहुंचाने की अद्भुत कला थी. वे छत्तीसगढ़ की साहित्यिक और सांस्कृतिक पहचान थे, जिनकी भरपाई भविष्य में संभव नहीं है. ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें.
