फायर ब्रांड नेता भूपेश बघेल के खिलाफ कसा शिकंजा
भिलाई– देश में भाजपा के केंद्रीय सत्ता में आने के बाद राजनीति अब नई करवट ले रही है. जिन राज्यों में गैर भाजपाई दलों का राजनैतिक कद बढ़ रहा है और जो भाजपा के लिए नई समस्या खड़ी कर सकते हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ मोदी सरकार कानूनी शिकंजा कस रही है. जो भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं उनके खिलाफ ईडी,आईटी,सीबीआई और पुलिस के माध्यम से मुसीबतें खड़ी की जा रही हैं. ताकि भाजपा के समक्ष किसी प्रकार की राजनैतिक चुनौती न खड़ी हो सके.
मोदी सरकार द्वारा गैर राजनीतिक दलों को निपटाने के अपने अभियान के तहत मुख्यमंत्रियों, पूर्व मुख्यमंत्रियों और व्यापक जनाधार वाले नेताओं को निशाना बनाया जा रहा है. केंद्र और राज्य सरकारों की जांच एजेंसियों के दायरे में अब तक अधिकतर ऐसे मजबूत नेता ही आए हैं. विभिन्न दलों के बड़े नेताओं के खिलाफ संगीन आरोप लगाकर उन्हें जेल में ठूंसा जा चुका है और जो बच गए हैं, उनके खिलाफ ईडी, आईटी, सीबीआई और पुलिस का शिकंजा तेजी से कसता जा रहा है. यह जांच ऐजेंसियां भाजपा सरकार के किसी विंग की तरह कार्य कर रही हैं. आप पार्टी के प्रमुख और मुख्यमंत्री रहे अरविंद केजरीवाल, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दिल्ली के पूर्व आबकारी मंत्री मनीष सिसोदिया, राज्यसभा सदस्य संजय सिंह, शिवसेना नेता व राज्यसभा सदस्य संजय राउत आदि को जेल भेजा जा चुका है.
इसके अलावा मोदी सरकार पर हमलावर रहने वाली पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया सहित कई विपक्ष के नेताओं के खिलाफ विभिन्न जांच ऐजेंसियां तेजी से शिकंजा कस रही हैं. इनमें ममता बनर्जी और भूपेश बघेल के खिलाफ दबिश बढ़ा दी गई है. भाजपा के तीसरी बार केंद्र में काबिज होने के बाद हौसला बढ़ गया है और चार राज्यों के चुनाव को ध्यान में रखते हुए विरोधियों के खिलाफ मुहिम तेज हो गई है. इसका एक बड़ा कारण लोकसभा चुनाव में भाजपा का ग्राफ गिरने से उसकी बढ़ती तिलमिलाहट भी है. मात्र 240 सीटों वाली भाजपा मध्यावधि चुनाव से चिंतित होकर लॉग लाइफ टॉइम सत्ता में बने रहने के लिए उन फॉयरब्रांड नेताओं और प्रमुख राजनीतिक दलों को शक्तिहीन करने के लिए अपने लक्ष्य को हर हाल में पूरा करना चाहती है. भाजपा सरकार यह अच्छी तरह जानती है कि जब तक उसे चुनौती देने वाला इंडिया गंठबंधन एकजुट रहेगा तब तक वह लंबे समय तक केंद्र व राज्यों में स्थिर नहीं रह सकती. इसलिए उनकी कारगुजारियों को उजागर करने वाले प्रमुख विपक्षीय नेताओं पर सरकार फंदा कस रही है. मोदी और अमित शाह के खिलाफ सबसे ज्यादा आक्रामक भूपेश बघेल, ममता बनर्जी और केजरीवाल हैं.
छत्तीसगढ़ में पूर्व मुख्यमंत्री श्री बघेल जैसे फॉयरब्रांड नेता हैं, जो खुलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जनविरोधी और पूंजीपति-परस्त नीतियों का विरोध करते हैं. वे अमित शाह को तड़ीपार नेता गृहमंत्री है, जैसा कड़क बयान भी दे चुके हैं. इस तरह के तल्ख बयान देते रहने के साथ श्री बघेल अदाणी को बस्तर के नीलकंठ पहाड़ में आयरन ओर खदानों को सौंपे जाने और रायगढ़ के हसदेव पहाड़ से जंगल कटाई का भी मुखर विरोध करते रहे हैं. कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने नगरनार स्टील प्लांट को निजी हाथों में बेचने का भी विरोध किया था. इस दबाव के कारण ही हाल में छत्तीसगढ़ के प्रवास पर आए इस्पात मंत्री टी.एस.कुमार स्वामी को नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण नहीं होगा जैसा बयान देने के लिए मजबूर होना पड़ा. केंद्र सरकार को इस बात का बखूबी अंदाजा है कि जब तक भूपेश बघेल जैसे आक्रामक नेता मजबूत रहेंगे छत्तीसगढ़ में भाजपा की सत्ता को चुनौती मिलती रहेगी और यहां के प्रचुर खनिज भंडारों और प्राकृतिक संसाधनों का अदाणीकरण भी मुश्किल होगा. यही वजह है कि प्रदेश में 15 साल से काबिज रमन सरकार का सूपड़ा साफ कर पिछले चुनाव में जीतते-जीतते रह गए कांग्रेस सुप्रीमो भूपेश बघेल के खिलाफ चक्रव्यूह सघन किया जा रहा है. उन्हें शराब घोटाला और महादेव सट्टा मामले में संलिप्तता का आरोप लगाकर ईडी, आईटी और ईओडब्ल्यू द्वारा घेरा जा रहा है.
छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था को बेनकाब करने वाली बालौदाबाजार में कलेक्टोरेट जलाने, लोहारीडीह कवर्धा में तीन साहुओं की हत्या और आगजनी, कोंटा और बिलासपुर के दो गांवों में टोनही कांड में 9 लोगों की हत्या और पुलिस प्रताड़ना आदि बड़ी घटनाओं को लेकर भी श्री बघेल सरकार पर लगातार हमला कर रहे हैं. उन्होंने भिलाई के तेजतर्रार विधायक देवेंद्र यादव को जेल भेजे जाने का भी पुरजोर विरोध किया. भाजपा सरकार अब इस स्तर तक उतर आई है कि श्री बघेल की छवि, जनाधार और पॉलिटिकल कॅरियर को खत्म करने के लिए उनके परिजनों पर भी कानूनी फंदा कस रही है. हाल ही में एक सरकारी कॉलेज के प्राध्यापक पर हुए जानलेवा हमले के आरोप में पुलिस ने श्री बघेल के पुत्र और पुत्री से भी पूछताछ की थी. इसका कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तीव्र विरोध किया था.
