किधर जा रहा छत्तीसगढ़, हिंसक घटनाओं में भारी वृद्धि

भिलाई- कभी शांति का टापू कहे जाने वाले समृद्ध और शांत प्रदेश छत्तीसगढ़ को किसकी नजर लग गई है, यहां पर दिन प्रतिदिन हत्या, लूट, बलात्कार, चोरी-डकैती और सामूहिक हत्याओं का सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. अभी दुर्ग जिले के नंदिनी-खुंदनी गांव के गणेश पंडाल में डीजे के धुन पर नाचने के दौरान हुई तनातनी की घटना, दूसरे दिन मौत के तांडव में बदल गई. शुक्रवार 6 सितंबर को गांव के ही गणेश पंडाल में डीजे की संगीत पर कुछ युवक नाच रहे थे इस दौरान उनमें आपसी विवाद हो गया. ये सभी युवक एक ही गांव के थे. वहां उपस्थित वरिष्ठजनों के हस्तक्षेप से मामला शांत तो हो गया लेकिन दूसरे ही दिन 7 सितंबर की रात के समय विवादित पक्षों में पुन: झड़प हो गई और यह झड़प चंद मिंटो में बलवा के रूप में तब्दील हो गई. इस घटना में एक ही परिवार के 3 युवक मारे गए. इन युवकों में दो सगे भाई और एक उनका चचेरा भाई शामिल हैं.

बताया जाता है कि दूसरे पक्ष का भी एक युवक गंभीर रूप से घायल है. मामले में गंभीर विषय यह है कि एक दिन पूर्व हुए मामूली विवाद को लेकर दूसरे दिन दोनों पक्ष लाठी-डंडे और धारदार हथियारों के साथ आपस में भिड़े और इसकी परिणति तीन युवकों की हत्या के रूप में हुई. इस मामले में नंदिनी थाने के पुलिस की उदासीनता भी सामने आ रही है. बताया जाता है कि 6 सितंबर की झड़प के संबंध में पुलिस को सूचना थी लेकिन पुलिस ने दूसरे दिन शांति व्यवस्था हेतु कोई प्रयास नहीं किया गया और न ही गणेश पंडाल में पुलिस तैनात की गई.

उक्त घटना घटना में अब तक 15 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. मृतक करण यादव, राजेश यादव और वासु यादव के परिवार में चीखें गूंज रही है, रूक-रूक कर महिलाओं की दिल दहलाने वाली चीखों के अलावा शेष गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है. गांव में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है. इस दुखद घटना से पूरे क्षेत्र में शोक व्याप्त है. जागरूक नागरिकों के बीच यह चर्चा का विषय है कि प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद आपराधिक घटनाओं में तेजी से वृद्धी हो रही हैं. यहां तक कि प्रदेश के चर्चित उपमुख्यमंत्री जो राज्य के गृहमंत्री भी हैं उनके गृह जिले कवर्धा में भी हत्या की घटनाएं बढ़ी है. देखा जाएं तो पूरा प्रदेश इस तरह की घटनाओं से लहूलुहान हो रहा है. महादेव सट्टा केंद्र के लिए कुख्यात हो चुके छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में इस दौरान हत्या और गंभीर वारदातों की संख्या बेतहाशा वृद्धि हुई है. दुर्ग पुलिस कानून व्यवस्था की दृष्टि से कमजोर और विफल साबित हो रही है. नंदिनी खुंदनी की घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है. खासकर गणेश पंडालों में हो रही मारपीट चंदाखोरी, तनातनी और अवैध बिजली कनेक्शन की आड़ में मेला आयोजित करने की बढ़ती प्रवृत्ति को लेकर भी लोगों में चिंता और आक्रोश देखा जा रहा है.

इसी तारतम्य में राजधानी रायपुर के ईदगाह भाठा के गणेश पंडाल में गणेश मूर्ति क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना भी भारी हंगामे का कारण बनी. इस मामले में दो आरोपी शेख जाफर और शेख जाकिर को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. बताया जाता है कि दोनों आरोपी आदतन बदमाश है. इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद उभरे जन आक्रोश को हिंदू संगठनों के नेताओं ने धैर्य का परिचय देते हुए शांत किया गया. अन्यथा इस घटना से संप्रदायिक तनाव भी उत्पन्न हो सकता था. आमतौर पर छत्तीसगढ़ में एक दशक पूर्व ऐसी घटनाएं नहीं होती थी किंतु पिछले कुछ वर्षों में गौ तस्करी, गांजा और मादक पदार्थों की तस्करी के साथ ही आपराधिक घटनाएं लगातार घटित हो रही है. इसके पीछे उन तत्वों की विशेष भूमिका है जो पिछले 5-6 वर्षों में अन्य प्रांतों से आकर न केवल शहरों बल्कि ग्रामीण और वनांचलों में भी अपने ठिकाने बना लिए हैं. राजनीति और समाज से जुड़े लोगों का मानना है कि राज्य सरकार पुलिस और प्रशासन में कसावट लाने के साथ ही विभिन्न सामाजिक संगठनों को जागरूक और सर्तक करने का अभियान चलाकर प्रदेश में शांति और सद्भाव सुरक्षित कर सकती है, लेकिन इसके लिए राजनैतिक भेदभाव से मुक्त होकर सभी वर्गों से सहयोग लेना होगा. प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति लचर होने से आमजन के बीच असुरक्षा और विष्णुदेव सरकार के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है और सरकार की छवि धूमिल हो रही है.
