हैवानियत के खिलाफ DPS में भारी बवाल
भिलाई- देश के नामी-गिरामी डीपीएस स्कूल रिसाली भिलाई में 2 अगस्त शुक्रवार को उस वक्त बड़ा हंगाम हुआ जब सैंकड़ों की संख्या में इस स्कूल के बच्चे और पालकों ने स्कूल में पहुचंकर प्रबंधन का घेराव किया. पेरैंट्स विगत 5 जुलाई को स्कूल के बाथरूम में एक बच्ची के साथ हुई यौन प्रताड़ना के खिलाफ सूक्ष्म जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे. पालकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन द्वारा साजिश पूर्वक इस घटना को छुपाया जाने का अपराध किया जा रहा है. खबर है कि पीड़ित मासूम के माता पिता ने इस घटना के संबंध में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मिलकर न्याय की मांग की थी. लेकिन थाने से लेकर उच्च स्तर तक गुहार लगाने के बावजूद पुलिस अधीक्षक ने उन पर इस घटना का खुलासा नहीं करने की सलाह दी और उनसे कहा कि इससे पीड़ित बच्ची और परिवार की बदनामी होगी. पुलिस से निराश होने के बाद पीड़ित पक्ष ने दुर्ग-भिलाई के जिम्मेदार सत्ता पक्ष और जागरुक विपक्ष के विधायकों से भी मिलकर इस घटना की जानकारी देते हुए हस्तक्षेप करने का आग्रह किया था लेकिन विधायकों ने पल्ला झाड़ दिया.

प्रशासन और प्रबंधन का पीड़ित पर था दबाव
इस स्थिति से निराश होकर पीड़ित पक्ष ने चुप्पी साध ली लेकिन धीरे-धीरे इस घटना की जानकारी आम नागरिकों में और डीपीएस स्कूल के तमाम पालकों के पास पहुंची. चर्चा है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल इस स्कूल में बल्कि कुछ और स्कूलों में भी हो चूकी है लेकिन अधिकारी, नेताओं और स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत से घटना को दबा दिया गया. ऐसा हैवानियत कृत्य करने वाले को समर्थन देना और पीड़ित पक्ष को मानसिक दबाव डालकर मुंह बंद करने के लिए मजबूर किया जाना भी एक पैशाचिक कृत्य भी है. स्कूल प्रबंधन को भी माफ नहीं किया जा सकता. पालकों ने कहा कि शर्म और चिंता का विषय है कि पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारी और अपने आप को जनता का हितैषी बताने वाले जनप्रतिनिधी भी ऐसे मामलों में स्कूल प्रबंधन का साथ दे रहें है. यह शर्मनाक है जब शहरी क्षेत्रों के नामी-गिरामी स्कूलों में ऐसी स्थिति है तो वनवासी क्षेत्रों और दूरस्थ गांवों के स्कूलों और छात्रावासों की क्या स्थिति होगी? इसका अंदाजा लगाया जाना मुश्किल नहीं है. वैसे भी विभिन्न छात्रावासों में हुए यौन शोषण और बालिकाओं के गर्भवती होने की कुछ घटनाएं भी उजागर हो चुकी हैं लेकिन किसी भी मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होना शासन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता के दावे पर सवाल खड़ा करता है.
स्कूल में पढ़ते है अफसरों के बच्चे
बड़े नामी-गिरामी स्कूलों में बड़े अधिकारियों, राजनेताओं और व्यवसायिओं के बच्चे पढ़ते है. यदि ऐसी घटनाओं के लिए दोषी तत्वों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो किसी दिन इन अधिकारियों और नेताओं के बच्चे भी वहशियों के शिकार बन सकते हैं. लेकिन चिंता का विषय है कि यही अधिकारी और नेता अपने स्वार्थ के लिए ऐसे घृणित और शर्मनाक मामलों में भी न केवल आंख मुंद बैठे हैं बल्कि स्कूल चलाने वाले कार्पोरेटरों का बचाव करते है. डीपीएस भिलाई की यह घिनौनी और शर्मनाक घटना प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है. उन जागरुक पालकों को इस बात के लिए धन्यवाद दिया जाना चाहिए कि उन्होंने एकता और साहस का परिचय देते हुए डीपीएस रिसाली की इस अमानवीय और घिनौनी घटना का विरोध करने के साथ ही भ्रष्ट और निक्कमे पुलिस प्रशासन के अधिकारियों के मुंह पर करारा तमाचा मारा है.
