न इस काम की विशेषज्ञता न ही जांचने के स्टाफ, 11 साल पुराने टेंडर पर आज तक हो रही आपूर्ति
महिला स्व सहायता समूहों से छिन गया काम
छत्तीसगढ़ आजतक- छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम अपने मूल उद्देश्य से भटक गया है. विभाग द्वारा ऐसे-ऐसे कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है जो उसके अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आते. इनमें खाद्य वस्तुओं की जांच करना एवं उनकी आपूर्ति करने जैसे कार्य शामिल हैं. विभाग के पास खाद्य वस्तुओं को जांचने के लिए न तो किसी तरह की विशेषज्ञता है और न ही इसके लिए उसके पास कोई प्रशिक्षित अमला है.

बीज एवं कृषि विकास निगम गठन का मूल कार्य बीज प्रक्रिया केन्द्रों के माध्यम से किसानों को प्रमाणित बीजों की आपूर्ति करना है. इसके साथ ही मांग के अनुरूप टेन्डर प्रक्रिया के माध्यम से कृषि सामग्रियों की विभागीय आपूर्ति सुनिश्चित करना है.
वर्ष 2022 में राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को अधिसूचना जारी करते हुए छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम में शामिल कर लिया गया. इसके तहत समस्त प्रकार की कृषि सामग्री, जिसमें बीज, कृषि औषधि एवं कृषि यंत्र, आदि को शामिल किया गया. रेट कांट्रेक्ट के माध्यम से इसकी आपूर्ति को अनुमोदित किया गया.
पर यही बीज निगम अब ऐसे कार्य कर रहा है जिसके लिए वह योग्य ही नहीं है. निगम एक प्राइवेट संस्था के माध्यम से विभिन्न प्रकार के खाद्य सामग्री, जिसमें सोयामिल्क, चिक्की, बड़ी, आदि की आपूर्ति शिक्षा विभाग एवं महिला बाल विकास विभाग को की जा रही है. इसके लिए 11 वर्ष पुराने टेंडर रेट का इस्तेमाल किया जा रहा है.
जनस्वास्थ्य के लिए खतरनाक
महिला एवं बाल विकास विभाग को होने वाली खाद्य सामग्री का उद्देश्य उनके पोषण स्तर में वृद्धि करना है. इसके लिए उपलब्ध कराई जा रही सामग्री की गुणवत्ता को सुनिश्चित करना जरूरी हो जाता है. पर बीज निगम द्वारा बीज निगम के पास खाद्य सामग्री निर्माण, गुणवत्ता निर्धारण आदि जांचने के लिए अमला ही नहीं है. पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के अंतर्गत चल रहे इस गोरखधंधे के कारण खाद्य वस्तुओं की गुणवत्ता से खिलवाड़ हो रहा है. इसकी शिकायत कई बार विकासखंडों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से की गई है.
महिला स्व सहायता समूहों से छिना काम
सुपोषण योजना अंतर्गत महिला बाल विकास में रेडी टू ईट सामग्री की सप्लाई पूर्व में कलेक्टर/विभाग द्वारा चयनित विभिन्न क्षेत्रीय महिला स्वसहायता समूहों द्वारा की जाती थी. अब यह काम उनसे छिन गया है. स्व सहायता समूहों को इसलिए भी इस योजना से जोड़ा गया था ताकि इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित हो. यह उनके अपने नौनिहालों से जुड़ा मामला था. इसका दूसरा पहलू यह था कि इससे उनके पास पर्याप्त काम हो जाता था. पीपीपी मॉडल लाने के बाद सालाना लगभग 500 करोड़ का यह काम उनसे छिन गया है.
खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग हुआ निठल्ला
अगर खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति का काम बीज एवं कृषि विकास निगम की प्राइवेट पार्टनर संस्थाएं ही करेंगी तो छत्तीसगढ़ खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग क्या करेगा. बिना किसी तरह की गुणवत्ता जांच के इस तरह खाद्य सामग्रियों की आपूर्ति भविष्य में महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं.
